pre aldonil 150mg/150mg tablet - Uses, Price and Side Effects

pre aldonil 150mg/150mg tablet: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Zydus Cadila 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 15, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is pre aldonil 150mg/150mg tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
pre aldonil 150mg/150mg tablet (manufactured by Zydus Cadila) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of anti diabetic. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of pre aldonil 150mg/150mg tablet uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Epalrestat (150mg) + Pregabalin (150mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 pre aldonil 150mg/150mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

pre aldonil 150mg/150mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti diabetic और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Epalrestat (150mg) + Pregabalin (150mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? India has the highest number of USFDA-compliant plants outside the USA.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Epalrestat (150mg) + Pregabalin (150mg)
Manufacturer / BrandZydus Cadila
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI DIABETIC
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 pre aldonil 150mg/150mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take pre aldonil 150mg/150mg tablet (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use pre aldonil 150mg/150mg tablet exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking pre aldonil 150mg/150mg tablet, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ pre aldonil 150mg/150mg tablet Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Nausea
  • Vomiting
  • Diarrhea
  • Drowsiness
  • Dizziness
  • Uncoordinated body movements
  • Increased liver enzymes

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔄 Alternative Brands / Substitutes

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Alternative medicines with exact same composition and strength (Epalrestat (150mg) + Pregabalin (150mg)):

Medical Note: Always consult your doctor before switching medications. Generic alternatives with same salts are therapeutically equivalent.

🛑 Myths vs. Facts about pre aldonil 150mg/150mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of pre aldonil 150mg/150mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Epalrestat (150mg) + Pregabalin (150mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of pre aldonil 150mg/150mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Diabetic Neuropathy & Foot Pain - 12-06-2026

डायबिटिक न्यूरोपैथी और पैरों का दर्द: एक संपूर्ण गाइड (Diabetic Neuropathy & Foot Pain) नमस्ते! यदि आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज (मधुमेह) से जूझ रहा है और पैरों में जलन, सुन्नपन या दर्द महसूस करता है, तो आप सही जगह पर हैं। यह गाइड आपको डायबिटिक न्यूरोपैथी के बारे में हर छोटी-बड़ी जानकारी देगी – यह कैसे होता है, इसके लक्षण क्या हैं, क्या खाएं-क्या न खाएं, घरेलू उपचार और डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली दवाइयां। आइए, इसे बहुत ही सरल और विस्तार से समझते हैं। 1. गहरा परिचय और रोग का तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) डायबिटिक न्यूरोपैथी डायबिटीज की एक गंभीर जटिलता है, जो नसों (nerves) को नुकसान पहुंचाती है। यह समस्या तब होती है जब ब्लड शुगर (खून में शक्कर) का स्तर लंबे समय तक बहुत अधिक रहता है। यह शरीर के अंदर कैसे होता है? (How it happens inside the body) हाई ब्लड शुगर का प्रभाव: जब शुगर लेवल बढ़ता है, तो यह नसों की छोटी रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को नुकसान पहुंचाता है जो नसों को ऑक्सीजन और पोषण देती हैं। इससे नसें कमजोर हो जाती हैं और सही तरीके से सिग्नल नहीं भेज पातीं। मेटाबोलिक पाथवे (Metabolic Pathway): अतिरिक्त ग्लूकोज नसों के अंदर जमा होकर सोर्बिटोल और फ्रुक्टोज में बदल जाता है। ये पदार्थ नसों में पानी खींचते हैं और उन्हें सूजन देते हैं, जिससे नसों की कार्यक्षमता खत्म हो जाती है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress): हाई शुगर से शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ जाते हैं, जो नसों के माइलिन शीथ (protective layer) को नष्ट कर देते हैं। इंफ्लेमेशन (Inflammation): यह प्रक्रिया नसों में सूजन पैदा करती है, जिससे दर्द और जलन होती है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली नसें पैरों और पंजों में होती हैं, इसलिए इसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी भी कहा जाता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms) पैरों में जलन (Burning sensation): खासकर रात के समय पैरों में आग जैसी जलन होना। सुन्नपन (Numbness): पैरों या पंजों में महसूस न होना, जैसे कि वे "सो गए" हों। झुनझुनी (Tingling): पैरों में चींटियां चलने जैसा एहसास। तेज दर्द (Sharp pain): बिना किसी कारण के पैरों में चाकू चुभने जैसा दर्द। स्पर्श के प्रति संवेदनशीलता (Sensitivity to touch): हल्का सा कपड़ा या चादर छूने पर भी दर्द होना। मांसपेशियों में कमजोरी: चलने-फिरने में दिक्कत, पैर लड़खड़ाना। त्वचा में बदलाव: पैरों की त्वचा सूखी, फटी या लाल हो जाना। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी: पसीना न आना, पेट फूलना, कब्ज या डायरिया, पेशाब करने में परेशानी। चक्कर आना (Dizziness): ब्लड प्रेशर के कंट्रोल में गड़बड़ी के कारण खड़े होने पर चक्कर। नपुंसकता (Erectile Dysfunction): पुरुषों में यौन समस्याएं। धुंधला दिखना (Blurry vision): आंखों की नसों पर प्रभाव पड़ने से। वजन कम होना: बिना कारण वजन घटना, खासकर अगर पाचन तंत्र प्रभावित हो। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan) – क्या खाएं और क्या न खाएं डायबिटिक न्यूरोपैथी में डाइट का सबसे अहम रोल है। सही खाना ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है और नसों की मरम्मत में मदद करता है। क्या खाएं (What to Eat – Indian Foods) साबुत अनाज (Whole Grains): जई (oats), ज्वार, बाजरा, ब्राउन राइस, क्विनोआ। ये धीमी गति से ग्लूकोज छोड़ते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, बथुआ, सरसों का साग। इनमें विटामिन B और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो नसों के लिए फायदेमंद हैं। प्रोटीन स्रोत: दालें (मूंग, मसूर, चना), सोया, पनीर, अंडे, मछली (सैल्मन, सार्डिन – ओमेगा-3 से भरपूर)। हेल्दी फैट: अखरोट, बादाम, अलसी के बीज, चिया सीड्स, जैतून का तेल, नारियल का तेल। फल (Low GI): जामुन (ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी), सेब, नाशपाती, पपीता, संतरा। केला और आम से बचें। मसाले: हल्दी (करक्यूमिन – एंटी-इंफ्लेमेटरी), दालचीनी (शुगर कंट्रोल), अदरक, लहसुन। ड्रिंक्स: नारियल पानी, हर्बल चाय (ग्रीन टी, कैमोमाइल), नींबू पानी (बिना चीनी)। क्या न खाएं (What to Avoid) रिफाइंड शुगर: मिठाई, केक, पेस्ट्री, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस। रिफाइंड आटा (Maida): सफेद ब्रेड, नूडल्स, पास्ता, समोसे। तले हुए खाद्य पदार्थ: पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज, भुजिया। हाई फैट डेयरी: फुल क्रीम दूध, मक्खन, क्रीम। रेड मीट: मटन, पोर्क – इनमें सैचुरेटेड फैट होता है जो सूजन बढ़ा सकता है। शराब और सिगरेट: ये नसों को और नुकसान पहुंचाते हैं। नमूना डाइट चार्ट (Sample Diet Chart) सुबह (7 AM): गुनगुना पानी + नींबू + 2 भीगे हुए बादाम। नाश्ता (8 AM): जई का दलिया (oats) या बाजरे की रोटी + सब्जी। मिड-मॉर्निंग (10 AM): 1 सेब या मुट्ठी भर अखरोट। दोपहर का खाना (1 PM): ब्राउन राइस + मूंग दाल + पालक की सब्जी + सलाद। शाम (4 PM): ग्रीन टी + 2-3 भुने चने। रात का खाना (7 PM): ज्वार की रोटी + लौकी की सब्जी + दही। सोने से पहले (9 PM): 1 गिलास हल्दी वाला दूध (बिना चीनी)। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) – दवाइयां और उनका काम डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित दवाइयां लिखते हैं। यह केवल शैक्षिक जानकारी है; अपने डॉक्टर से सलाह लें। ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां मेटफॉर्मिन (Metformin): लीवर में ग्लूकोज उत्पादन कम करता है और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है। इंसुलिन (Insulin): अगर शुगर बहुत हाई है, तो इंसुलिन इंजेक्शन दिए जाते हैं। न्यूरोपैथी के दर्द के लिए दवाइयां गैबापेंटिन (Gabapentin) या प्रीगाबालिन (Pregabalin): ये नसों के दर्द को कम करने के लिए एंटी-कन्वल्सेंट दवाएं हैं। ये मस्तिष्क में दर्द सिग्नल को ब्लॉक करती हैं। डुलॉक्सेटीन (Duloxetine) या एमिट्रिप्टिलाइन (Amitriptyline): ये एंटीडिप्रेसेंट हैं, लेकिन नसों के दर्द में भी कारगर हैं। ये सेरोटोनिन और नॉरएपिनेफ्रिन के स्तर को बढ़ाकर दर्द कम करते हैं। टॉपिकल क्रीम: कैप्साइसिन क्रीम (मिर्च से बनी) या लिडोकेन पैच – सीधे दर्द वाली जगह पर लगाई जाती है। नसों की मरम्मत के लिए सप्लीमेंट्स विटामिन B12: नसों के माइलिन शीथ की मरम्मत करता है। मेटफॉर्मिन लेने वालों में B12 की कमी आम है। अल्फा-लिपोइक एसिड (ALA): एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो नसों को फ्री रेडिकल्स से बचाता है और दर्द कम करता है। बेनफोटियामिन (Benfotiamine): विटामिन B1 का एक रूप, जो नसों की क्षति को रोकता है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपचार गुनगुने पानी में पैर भिगोना: रोज रात को 10-15 मिनट पैरों को गुनगुने पानी में भिगोएं। इसमें एप्सम सॉल्ट (Epsom salt) मिलाएं – यह सूजन और दर्द कम करता है। सावधानी: पानी गुनगुना हो, गर्म नहीं, क्योंकि सुन्नपन के कारण जल सकते हैं। हल्दी और दूध: एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीएं। हल्दी में करक्यूमिन होता है जो नसों की सूजन कम करता है। एलोवेरा जेल: पैरों पर एलोवेरा जेल लगाने से जलन और सूजन में राहत मिलती है। अरंडी का तेल (Castor oil): पैरों की मालिश करने से दर्द कम होता है और त्वचा मुलायम रहती है। मेथी दाना: रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट चबाएं। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करता है। जीवनशैली में बदलाव नियमित व्यायाम: रोज 30 मिनट तेज चलना, योग या साइकिल चलाना। यह ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और नसों को पोषण देता है। पैरों की देखभाल: रोज पैरों की जांच करें – कोई कट, छाला या लालिमा तो नहीं है। मॉइश्चराइजर लगाएं, लेकिन पंजों के बीच न लगाएं। सही जूते पहनें: नरम, चौड़े और कुशन वाले जूते पहनें। तंग या नुकीले जूतों से बचें। धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये नसों को और कमजोर करते हैं। स्ट्रेस मैनेजमेंट: ध्यान (meditation), गहरी सांस लेना और पर्याप्त नींद लें। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) डायबिटिक न्यूरोपैथी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत थका देने वाली होती है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डिप्रेशन (Depression): लगातार दर्द और सुन्नपन से व्यक्ति उदास हो सकता है। "कभी ठीक नहीं होगा" का डर मन में बैठ जाता है। चिंता (Anxiety): पैरों में घाव या इंफेक्शन का डर, जो अल्सर या एम्प्यूटेशन तक ले जा सकता है। नींद की समस्या: रात में दर्द बढ़ने से नींद पूरी नहीं होती, जिससे थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। दैनिक जीवन पर प्रभाव चलने-फिरने में दिक्कत: पैरों में कमजोरी के कारण सीढ़ियां चढ़ना या लंबी दूरी तक चलना मुश्किल हो जाता है। सामाजिक अलगाव: लोग पार्टियों या मिलन-जुलन में जाने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें अपने पैरों की शर्म या दर्द का डर होता है। नौकरी पर असर: जिन लोगों को लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है (जैसे शिक्षक, सेल्समैन), उनके लिए काम करना मुश्किल हो जाता है। सुझाव: परिवार और दोस्तों से बात करें, सपोर्ट ग्रुप जॉइन करें, और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलर से मिलें। याद रखें, आप अकेले नहीं हैं। 7. 10 विस्तृत FAQs (Frequently Asked Questions) 1. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी पूरी तरह ठीक हो सकती है? नहीं, यह पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती, लेकिन ब्लड शुगर को कंट्रोल करके, दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव से लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है और नसों की और क्षति को रोका जा सकता है। 2. क्या पैरों में जलन (burning sensation) हमेशा डायबिटिक न्यूरोपैथी का संकेत है? जरूरी नहीं, लेकिन अगर आपको डायबिटीज है और पैरों में जलन, सुन्नपन या झुनझुनी है, तो यह न्यूरोपैथी का शुरुआती लक्षण हो सकता है। डॉक्टर से जांच कराएं। 3. क्या मैं डायबिटिक न्यूरोपैथी में व्यायाम कर सकता हूं? हां, हल्का व्यायाम जैसे तेज चलना, स्विमिंग या योग बहुत फायदेमंद है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और दर्द कम होता है। लेकिन अगर पैरों में घाव या अल्सर है, तो पहले डॉक्टर से पूछें। 4. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी से पैर काटने (amputation) की नौबत आ सकती है? हां, अगर पैरों में छोटे-छोटे घाव या कट को नजरअंदाज किया जाए, तो वे संक्रमित हो सकते हैं और गैंग्रीन (ऊतक मृत्यु) हो सकता है, जिससे एम्प्यूटेशन की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए पैरों की रोज देखभाल करें। 5. क्या आयुर्वेदिक या घरेलू उपचार डायबिटिक न्यूरोपैथी में कारगर हैं? कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां (जैसे गुडमार, जामुन, हल्दी) और घरेलू उपचार लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना मुख्य उपचार के रूप में न अपनाएं। 6. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में दर्द के लिए पेनकिलर लेना सुरक्षित है? सामान्य पेनकिलर (जैसे इबुप्रोफेन) लंबे समय तक लेना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि ये किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। डॉक्टर विशेष न्यूरोपैथी दवाएं (जैसे गैबापेंटिन) लिखते हैं। 7. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी से पैरों में सूजन (swelling) हो सकती है? हां, कभी-कभी नसों की क्षति के कारण पैरों में सूजन हो सकती है, लेकिन यह आमतौर पर खराब सर्कुलेशन या किडनी की समस्या का संकेत भी हो सकता है। 8. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी के लिए कोई विशेष जूते (special shoes) होते हैं? हां, डायबिटिक फुटवियर (Diabetic shoes) बाजार में उपलब्ध हैं। ये चौड़े, गहरे और कुशन वाले होते हैं, जो पैरों पर दबाव नहीं डालते और घावों से बचाते हैं। 9. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी से हाथों में भी दर्द हो सकता है? हां, इसे "पेरिफेरल न्यूरोपैथी" कहते हैं जो हाथों और पैरों दोनों को प्रभावित कर सकती है। हाथों में भी जलन, सुन्नपन या कमजोरी हो सकती है। 10. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में विटामिन B12 लेना फायदेमंद है? हां, विटामिन B12 नसों की मरम्मत में मदद करता है। खासकर अगर आप मेटफॉर्मिन ले रहे हैं, तो B12 की कमी हो सकती है। डॉक्टर से पूछकर B12 सप्लीमेंट लें। मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी समस्या के लिए हमेशा किसी योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। स्व-चिकित्सा करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

Bahu ke tension se BP high? Ghar ke nuskhe aazma ke dekho!

Aaj subah se hi BP high hai yaar. Choti bahu ne kal raat ka bartan nahi dhoye, maine subah uthke uthke sab kuch kiya. Phir usko bole toh bolti hai "aapko kya dikkat hai, main office ja rahi hoon." Office! Haan hum bhi toh poora ghar sambhalte hain na, koi appreciation nahi. Mera BP aaj 150/100 aa raha hai, doctor ne dawai badha di hai par gussa aur tension kam nahi hoti. Mene socha kuch natural remedy try karu, subah lahsun ki 2 kachchi kali kha li, aur neem ke patte ka juice piya. Thoda aaram mila lekin yeh bahu ka rona hi nahi chodega. Kya karein? Koi toh batao kaise aisi situations mein BP control karein? Koi ghar ka nuskha ho toh batao.

Office meeting 15 min ka, BP high ho gaya! Heart attack survivors ke liye stress ka solution batao!

Yaar, aaj office mein ek chhoti si meeting thi… bas 15 minute ki. But project milestone nahi touch hua tha, toh senior management ka pressure tha. Mera BP suddenly upar chala gaya. Dimag mein ek dum se wohi feeling — heart attack ke time jaisi tightness. Felt like I’m going to black out. I had to step out, drink water, and just breathe for 5 minutes. Mujhe abhi angioplasty hue sirf 3 mahine hue hai. Doctors ne kaha tha stress kam karo, but IT project management mein stress kaise avoid karun? Deadline, client calls, late night emails. Aur ghar mein bhi tension hai — EMI, kids ka future. Kisi ne koi small tip di hai office stress handle karne ki? Main ab lunch break pe 10 minute walk try kar raha hoon. Aur chai-cookie skip karta hoon. Magar yeh sudden panic attacks ka kya karein? Koi natural way hai? Please share your experience.

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