peptryp a tablet allopathy (Trypsin (48mg) + Rutoside (100mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
peptryp a tablet allopathy (Trypsin (48mg) + Rutoside (100mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Meditouch Wellness. Contains Trypsin (48mg) + Rutoside (100mg).

peptryp a tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 Meditouch Wellness 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 20, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is peptryp a tablet used for?

peptryp a tablet is primarily used for the treatment of PAIN ANALGESICS. It contains Trypsin (48mg) + Rutoside (100mg) which works effectively. Always consult your doctor before using this medication.

  • Generic Name: Trypsin (48mg) + Rutoside (100mg)
  • Manufacturer: Meditouch Wellness
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 peptryp a tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

peptryp a tablet का उपयोग मुख्य रूप से pain analgesics और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Trypsin (48mg) + Rutoside (100mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Trypsin (48mg) + Rutoside (100mg)
Brand Namepeptryp a tablet
ManufacturerMeditouch Wellness
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassPAIN ANALGESICS
Action ClassInformation pending
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take peptryp a tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 peptryp a tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of peptryp a tablet?

  • Nausea
  • Vomiting
  • Heartburn
  • Stomach pain
  • Indigestion
  • Loss of appetite
  • Diarrhea

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔄 Best Substitutes for peptryp a tablet

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  1. dynadol tbr tablet
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  2. alzibit-forte tablet
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Medical Note: Always consult your doctor before switching medications. Generic alternatives with same salts are therapeutically equivalent.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about peptryp a tablet

  • Myth: Generic substitutes of peptryp a tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Trypsin (48mg) + Rutoside (100mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of peptryp a tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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डायबिटीज के घरेलू उपचार: एक संपूर्ण और विशेषज्ञ गाइड नमस्ते! यदि आप या आपके परिवार में किसी को डायबिटीज (मधुमेह) है, तो यह गाइड आपके लिए ही है। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो आज के समय में भारत में तेजी से बढ़ रही है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है – सही जानकारी, घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। यह गाइड हिंग्लिश (हिंदी + इंग्लिश) में है, ताकि आपको हर बात आसानी से समझ आए। चलिए, शुरू करते हैं! 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Disease Mechanism) डायबिटीज क्या है? डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर का ब्लड शुगर (ग्लूकोज) लेवल बहुत ज्यादा हो जाता है। ग्लूकोज हमारे शरीर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, लेकिन इसे कोशिकाओं तक पहुंचाने के लिए इंसुलिन नामक हार्मोन की जरूरत होती है। शरीर के अंदर क्या होता है? टाइप 1 डायबिटीज: इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से पैनक्रियाज (अग्न्याशय) की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं (बीटा सेल्स) पर हमला कर देती है। इससे इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। यह आमतौर पर बचपन या युवावस्था में होता है। टाइप 2 डायबिटीज (सबसे आम): इसमें दो समस्याएं होती हैं – इंसुलिन रेजिस्टेंस (शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का जवाब नहीं देतीं) और इंसुलिन की कमी (पैनक्रियाज पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता)। यह मोटापा, गलत खानपान और कम एक्सरसाइज से जुड़ा है। जेस्टेशनल डायबिटीज: गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण होता है, जो अक्सर डिलीवरी के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन टाइप 2 का खतरा बढ़ा देता है। कैसे होता है? जब आप खाना खाते हैं, तो कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में टूट जाता है। यह ग्लूकोज ब्लड में आता है। सामान्य स्थिति में, पैनक्रियाज इंसुलिन छोड़ता है, जो ग्लूकोज को कोशिकाओं में ले जाता है। डायबिटीज में यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिससे ब्लड में ग्लूकोज जमा होने लगता है – इसे ही हाइपरग्लाइसेमिया कहते हैं। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Symptoms) डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे आते हैं, इसलिए इसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। नीचे दिए गए लक्षणों पर ध्यान दें: सामान्य लक्षण (Common Symptoms): बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खासकर रात में। शरीर अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia): पेशाब ज्यादा होने से डिहाइड्रेशन होता है, जिससे बार-बार प्यास लगती है। भूख का बढ़ना (Polyphagia): कोशिकाओं को ऊर्जा नहीं मिलती, इसलिए शरीर ज्यादा खाने का संकेत देता है। वजन कम होना (बिना कारण): खासकर टाइप 1 में, शरीर मांसपेशियों और फैट को तोड़ने लगता है। थकान और कमजोरी: ऊर्जा की कमी के कारण। धुंधला दिखना (Blurry Vision): ब्लड शुगर के बढ़ने से आंखों के लेंस में सूजन आ जाती है। घाव का धीरे भरना: हाई शुगर ब्लड सर्कुलेशन और इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है। बार-बार इन्फेक्शन: जैसे स्किन इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI), या फंगल इन्फेक्शन। दुर्लभ या कम ज्ञात लक्षण (Rare Symptoms): पैरों में जलन या झुनझुनाहट (Tingling/Burning in Feet): यह डायबिटिक न्यूरोपैथी का संकेत है, जो नसों को नुकसान पहुंचाता है। त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans): गर्दन, बगल या जांघों के आसपास त्वचा मोटी और काली हो जाती है – यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। यौन समस्याएं: पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन, महिलाओं में योनि का सूखापन। सुनने की क्षमता में कमी: हाई ब्लड शुगर कान की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। बार-बार मसूड़ों में संक्रमण या दांतों का ढीला होना: डायबिटीज मुंह की सेहत को प्रभावित करता है। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Diet Plan) डायबिटीज में खानपान सबसे अहम है। सही डाइट ब्लड शुगर को कंट्रोल कर सकती है। यहां बताया गया है कि क्या खाएं और क्या न खाएं – खासकर भारतीय खाने के संदर्भ में। क्या खाएं (Kya Khayein): साबुत अनाज (Whole Grains): ब्राउन राइस, ओट्स, जौ (Barley), बाजरा, रागी (Finger Millet) – ये फाइबर से भरपूर हैं और शुगर धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। दालें और फलियां: मूंग दाल, चना, राजमा, सोयाबीन – प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत। हरी सब्जियां: पालक, मेथी, करेला, लौकी, तोरी, ब्रोकली – ये कम कैलोरी और कम कार्ब वाली होती हैं। फल (सीमित मात्रा में): जामुन, सेब, नाशपाती, पपीता, संतरा, कीवी – आम, अंगूर और केला से बचें। नट्स और बीज: बादाम, अखरोट, अलसी (Flaxseeds), चिया सीड्स – ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए अच्छे। प्रोटीन: अंडे, चिकन (बिना त्वचा के), मछली, पनीर (कम फैट), टोफू। दही (Yogurt): बिना मीठा वाला – प्रोबायोटिक्स के लिए फायदेमंद। मसाले: हल्दी, दालचीनी, मेथी दाना, करी पत्ता – ये ब्लड शुगर कम करने में मदद करते हैं। क्या न खाएं (Kya Na Khayein): रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा (सफेद आटा), ब्रेड, पास्ता, नूडल्स – ये शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। मीठी चीजें: मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी), कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, आइसक्रीम, केक, कुकीज। तला-भुना खाना: समोसा, पकौड़े, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज – इनमें ट्रांस फैट और कैलोरी ज्यादा होती है। फलों का रस: भले ही ताजा हो, इसमें फाइबर नहीं होता और शुगर तेजी से बढ़ती है। पूरा फल खाएं। अल्कोहल: बीयर, वाइन, शराब – ब्लड शुगर को अनियंत्रित कर सकते हैं। प्रोसेस्ड फूड: सॉसेज, बेकन, पैकेज्ड स्नैक्स – इनमें नमक और शुगर छिपा होता है। एक दिन का नमूना डाइट प्लान (Sample Meal Plan): सुबह (नाश्ता): ओट्स या रागी का दलिया + बादाम और अलसी के बीज + एक कप बिना मीठी चाय। मिड-मॉर्निंग: एक सेब या मुट्ठी भर भीगे बादाम। दोपहर (लंच): 1 रोटी (बाजरा या गेहूं) + मूंग दाल + करेले की सब्जी + हरी सलाद। शाम (स्नैक): भुना चना या मखाना + एक कप ग्रीन टी। रात (डिनर): ग्रिल्ड चिकन या पनीर + तोरी या ब्रोकली की सब्जी + सलाद। सोने से पहले: एक गिलास गुनगुना दूध (बिना चीनी) या दही। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) डायबिटीज का इलाज दवाओं और इंसुलिन से होता है। यहां हम सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य से बता रहे हैं – कृपया डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। आमतौर पर दी जाने वाली दवाएं: मेटफॉर्मिन (Metformin): यह सबसे आम दवा है। यह लिवर में ग्लूकोज बनने को कम करता है और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है। टाइप 2 के लिए पहली पसंद। सल्फोनिलयूरिया (Sulfonylureas): जैसे ग्लिक्लाजाइड – यह पैनक्रियाज से ज्यादा इंसुलिन निकलवाता है। डीपीपी-4 इनहिबिटर्स (DPP-4 Inhibitors): जैसे सीताग्लिप्टिन – यह इंसुलिन स्राव को बढ़ाता है और ग्लूकागन को कम करता है। एसजीएलटी2 इनहिबिटर्स (SGLT2 Inhibitors): जैसे डापाग्लिफ्लोज़िन – यह किडनी के जरिए पेशाब में अतिरिक्त शुगर बाहर निकालता है। इंसुलिन: टाइप 1 के लिए जरूरी, टाइप 2 में भी जरूरत पड़ सकती है। यह शरीर में सीधे इंसुलिन पहुंचाता है। कैसे काम करती हैं? ये दवाएं या तो इंसुलिन बनाने में मदद करती हैं, या इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करती हैं, या फिर शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालती हैं। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार कॉम्बिनेशन थेरेपी दे सकते हैं। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) ये घरेलू उपचार वैज्ञानिक रूप से समर्थित हैं और डॉक्टरी इलाज के साथ मिलकर काम करते हैं। प्राकृतिक उपचार: करेला (Bitter Gourd): इसमें 'चारेंटिन' नामक यौगिक होता है, जो ब्लड शुगर कम करता है। रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच करेले का जूस पिएं। मेथी दाना (Fenugreek Seeds): फाइबर और गैलेक्टोमैनन से भरपूर। रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट चबाएं या पानी पिएं। दालचीनी (Cinnamon): इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है। आधा चम्मच दालचीनी पाउडर गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर पिएं। जामुन (Black Plum): जामुन के बीज का पाउडर शुगर कम करने में मदद करता है। 1 चम्मच पाउडर पानी के साथ लें। हल्दी (Turmeric): करक्यूमिन इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करता है। दूध में हल्दी मिलाकर पिएं। एलोवेरा जूस: ब्लड शुगर कम करने और पाचन सुधारने में मददगार। बिना मीठा जूस पिएं। नीम (Neem): नीम की पत्तियां ब्लड शुगर कंट्रोल करती हैं। कुछ पत्तियां चबाएं या पानी में उबालकर पिएं। जीवनशैली में बदलाव: नियमित व्यायाम: रोज 30-45 मिनट तेज चलना, योग (सूर्य नमस्कार, कपालभाति), या हल्का जॉगिंग। एक्सरसाइज इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है। वजन कम करना: शरीर का 5-10% वजन कम करने से ब्लड शुगर में बड़ा सुधार आता है। पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। तनाव प्रबंधन: ध्यान (Meditation), गहरी सांस लेना, या संगीत सुनना – तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) शुगर बढ़ाते हैं। पानी पिएं: दिन में 8-10 गिलास पानी पीने से किडनी शुगर बाहर निकालने में मदद करती है। धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये ब्लड शुगर को बढ़ाते हैं और जटिलताओं का खतरा बढ़ाते हैं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) डायबिटीज सिर्फ शारीरिक बीमारी नहीं है – यह मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करती है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: डिप्रेशन और चिंता: ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से मूड स्विंग हो सकता है। डायबिटीज के मरीजों में डिप्रेशन का खतरा 2-3 गुना ज्यादा होता है। डायबिटीज बर्नआउट: लगातार दवाओं, डाइट और मॉनिटरिंग से थकान और निराशा हो सकती है। सामाजिक अलगाव: खानपान की पाबंदियों के कारण पार्टियों या सामाजिक आयोजनों में शर्मिंदगी महसूस हो सकती है। हाइपोग्लाइसीमिया का डर: शुगर लो होने का डर (खासकर रात में) लगातार तनाव पैदा करता है। दैनिक जीवन पर प्रभाव: नियमित मॉनिटरिंग: दिन में 2-4 बार ब्लड शुगर चेक करना पड़ता है, जो व्यस्त जीवन में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खाने की योजना: हर भोजन की पहले से योजना बनानी पड़ती है, जिसमें समय और मेहनत लगती है। यात्रा में कठिनाई: दवाएं, इंसुलिन और स्नैक्स साथ ले जाना जरूरी होता है। काम पर प्रभाव: बार-बार ब्रेक लेना या शुगर लो होने पर काम रोकना पड़ सकता है। समाधान: परिवार का सहयोग, काउंसलिंग, और डायबिटीज सपोर्ट ग्रुप में शामिल होना बहुत मददगार होता है। याद रखें – आप अकेले नहीं हैं! 7. 10 विस्तृत FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) 1. क्या डायबिटीज पूरी तरह ठीक हो सकती है? टाइप 1 डायबिटीज पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती, लेकिन इंसुलिन से कंट्रोल की जा सकती है। टाइप 2 डायबिटीज को सही डाइट, एक्सरसाइज और वजन घटाकर रिवर्स किया जा सकता है (यानी बिना दवा के शुगर नॉर्मल रहना)। इसे 'रिमिशन' कहते हैं। 2. क्या मीठा खाने से डायबिटीज होती है? सीधे तौर पर नहीं, लेकिन ज्यादा मीठा खाने से मोटापा बढ़ता है, जो टाइप 2 डायबिटीज का मुख्य कारण है। जेनेटिक्स और लाइफस्टाइल भी अहम भूमिका निभाते हैं। 3. क्या गुड़ या शहद डायबिटीज में सुरक्षित है? नहीं, गुड़ और शहद में भी चीनी की तरह ही कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। ये ब्लड शुगर को बढ़ा सकते हैं। बहुत कम मात्रा में (जैसे 1 चम्मच) ले सकते हैं, लेकिन बेहतर है कि इनसे बचें। 4. क्या डायबिटीज में आलू खाना चाहिए? आलू में स्टार्च ज्यादा होता है, जो शुगर बढ़ाता है। लेकिन अगर आप उबला हुआ आलू छिलके सहित खाएं और मात्रा सीमित रखें (जैसे 1 छोटा आलू), तो ठीक है। तले हुए आलू (फ्राइज) से बचें। 5. क्या डायबिटीज में चावल खा सकते हैं? सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या बाजरा खाएं। अगर सफेद चावल खाना है, तो मात्रा कम रखें (जैसे आधी कटोरी) और साथ में दाल और सब्जी जरूर खाएं, ताकि शुगर धीरे-धीरे बढ़े। 6. क्या डायबिटीज में पैरों की देखभाल जरूरी है? हां, बहुत जरूरी! डायबिटिक फुट अल्सर एक गंभीर समस्या है। रोज पैरों को धोएं, मॉइस्चराइज़र लगाएं, नाखून साफ रखें, और किसी भी छोटे घाव को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। 7. क्या डायबिटीज में प्रेग्नेंसी सेफ है? हां, अगर ब्लड शुगर को अच्छी तरह कंट्रोल किया जाए। प्रेग्नेंसी से पहले और दौरान डॉक्टर की निगरानी जरूरी है। जेस्टेशनल डायबिटीज में भी सही देखभाल से मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। 8. क्या डायबिटीज में व्रत (उपवास) रख सकते हैं? व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। लंबे उपवास से शुगर लो (हाइपोग्लाइसीमिया) हो सकता है। अगर व्रत रखते हैं, तो हल्का खाना (फल, दूध, मखाना) खाएं और शुगर बार-बार चेक करें। 9. क्या डायबिटीज से अंधापन हो सकता है? हां, अनियंत्रित डायबिटीज से डायबिटिक रेटिनोपैथी हो सकती है, जो अंधेपन का कारण बन सकती है। लेकिन नियमित आंखों की जांच (डाइलेटेड आई एग्जाम) और शुगर कंट्रोल करके इसे रोका जा सकता है। 10. क्या डायबिटीज में शराब पी सकते हैं? शराब ब्लड शुगर को अनियंत्रित कर सकती है – पहले बढ़ा सकती है, फिर अचानक गिरा सकती है। अगर पीनी ही है, तो बहुत कम मात्रा में (जैसे 1 ड्रिंक) और खाने के साथ पिएं। बीयर और स्वीट वाइन से बचें। निष्कर्ष (Conclusion) डायबिटीज एक गंभीर लेकिन प्रबंधनीय बीमारी है। घरेलू उपचार, सही डाइट, नियमित व्यायाम और डॉक्टरी सलाह से आप पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। याद रखें – छोटे-छोटे बदलाव बड़ा फर्क लाते हैं। अपने ब्लड शुगर को नियमित रूप से चेक करें, सकारात्मक रहें, और अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें। मेडिकल डिस्क्लेमर: यह गाइड केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी दवा, सप्लीमेंट या घरेलू उपचार शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी योग्य स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श करें। डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, और गलत उपचार से जटिलताएं हो सकती हैं। आपका स्वास्थ्य आपके हाथ में है – जागरूक रहें, स्वस्थ रहें!

Lunch mein akela reh gaya, sabki group ban gayi – koi tips hai ya mai hi weird hoon? 😔

Okay so today was literally the worst. I was sitting in the canteen during lunch break and everyone was in their little groups laughing and talking. And I’m just there with my phone, pretending to scroll through reels but actually I was just staring at the screen. Nobody came to sit with me. Not even the one person I thought was my friend from the group project. She saw me, waved, and then went to sit with some other people. Like, I get it, but it still hurts. I tried to calm myself down by taking deep breaths the way my therapist suggested, but honestly it just made me more aware of how alone I was. Started overthinking—maybe I’m boring, maybe I give off weird vibes, maybe I deserve this. And then the anxiety kicked in, heart racing, palms sweating. Had to literally go to the washroom and sit in a stall for 10 minutes. Has anyone else felt this way? Like you’re in a crowd but still invisible? I don’t know how to make friends when everyone already seems to have their group fixed. My parents would just say “focus on studies, yeh sab bakwas hai.” But it’s not bakwas when it’s affecting my whole mood and attendance. Any tips that actually work?

Bhai, mental hospital admit tha, ab college me shame se face kaise karun? 🥺

yaar kal college group me kisi ne mention kiya "mental hospital" and i felt like everyone's eyes were on me. 2 weeks back I was admitted for 3 days. suicidal thoughts tha, abhi bhi aata hai but kam. therapy start ki hai, meds bhi. but ab ye shame bohot heavy hai. parents ko pata hai but they don't talk about it openly. like it never happened. i can't even look at my friends properly. they don't know but i feel they'll judge. therapist ne bola "it's a health issue like any other" but reality different hai na. log bolte "attention seeking" ya "weak character." i can't even reply to group messages properly. ek dost ne pucha "kaha tha tu?" i just said "hospital" and changed topic. kisi aur ko bhi aisa feel hua? how do you handle the shame when people might find out? aur parents ko kaise convince karein ki ye stigma real hai? i don't want to hide forever but abhi toh disclosure bohot scary lagta hai.

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