paincom 0.5% gel allopathy (Piroxicam (0.5% w/w)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
paincom 0.5% gel allopathy (Piroxicam (0.5% w/w)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Biochem Pharmaceutical Industries. Contains Piroxicam (0.5% w/w).

paincom 0.5% gel - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Piroxicam (0.5% w/w) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Biochem Pharmaceutical Industries 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 20, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is paincom 0.5% gel used for?

paincom 0.5% gel is primarily used for the treatment of pain analgesics. It contains the active ingredient Piroxicam (0.5% w/w), which works by treating the underlying condition effectively. Always consult your doctor before using this medication.

  • Manufacturer: Biochem Pharmaceutical Industries
  • Medicine Form: Allopathy
  • Key Benefit: Rapid relief from pain analgesics symptoms.
  • Safety: Consult doctor before use during pregnancy or lactation.

🇮🇳 paincom 0.5% gel के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

paincom 0.5% gel का उपयोग मुख्य रूप से pain analgesics और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Piroxicam (0.5% w/w) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? Over 80% of the antiretroviral drugs used globally to combat AIDS are supplied by Indian pharmaceutical companies.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Piroxicam (0.5% w/w)
Manufacturer / BrandBiochem Pharmaceutical Industries
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassPAIN ANALGESICS
Action ClassNSAID's- Non-Selective COX 1&2 Inhibitors (enolic acids)
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 paincom 0.5% gel Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How and when to take paincom 0.5% gel?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use paincom 0.5% gel exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking paincom 0.5% gel, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ What are the side effects of paincom 0.5% gel?

Common and serious side effects may include:

  • No common side effects seen
  • Vomiting
  • Stomach pain
  • Nausea
  • Headache
  • Dizziness

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔄 Best Substitutes for paincom 0.5% gel

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Alternative brands with exact same active ingredient and strength (Piroxicam (0.5% w/w)):

  1. felcam gel
    Sun Pharmaceutical Industries Ltd ₹14.90 💰 73.7% CHEAPER
  2. minicam gel
    Blue Cross Laboratories Ltd ₹28.72 💰 49.2% CHEAPER
  3. dupox gel
    Bennet Pharmaceuticals Limited ₹37.50 💰 33.7% CHEAPER
  4. mobicam 0.5% gel
    Cipla Ltd ₹40.00 💰 29.3% CHEAPER
  5. ugesic gel
    Meyer Organics Pvt Ltd ₹67.77 📈 19.8% COSTLIER
  6. pirox gel
    Cipla Ltd ₹74.25 📈 31.3% COSTLIER
  7. dolonex gel
    Pfizer Ltd ₹79.75 📈 41% COSTLIER

Medical Note: Always consult your doctor before switching medications. Generic alternatives with same salts are therapeutically equivalent.

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🛑 Myths vs. Facts about paincom 0.5% gel

  • Myth: Generic substitutes of paincom 0.5% gel are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Piroxicam (0.5% w/w)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of paincom 0.5% gel can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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70 saal ka collar pehena: Gardan aur zyada akad gayi, kya karein?

Namaste ji. Main Om Prakash Gupta, 70 saal ka, retired teacher hoon. Kal raat meri neck collar laga kar sone ki koshish ki, lekin mujhe usse koi aaram nahi mila. Uski jagah toh gardan aur mooh aur bhi zyada akad gaya. Bahut bechaini hui. Pichle kuch mahino se cervical spondylosis ki wajah se haathon mein sunnapan aur shoulder mein dard rahta hai. Doctor ne collar pehenne ko kaha tha, lekin lagta hai yeh mere liye nahi hai. Ghar mein bivi ko bhi yehi problem hai, unka bhi dard badh gaya hai. Hum dono ek dusre ki madad karte hain, lekin ab toh roz ka kaam bhi mushkil ho raha hai. Beta bahar job karta hai, phone pe kehta hai 'rest karo', par rest se kya hota hai? Yoga aur homeopathy se bahut umeed hai. Kya kisi ko collar se aaram mila hai? Ya koi doosra upay bata sakte hain? Dard se toh mera mann udd gaya hai.

Complete Guide to Hypothyroidism - 03-06-2026

हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) का संपूर्ण गाइड: कारण, लक्षण, इलाज और डाइट नमस्ते! क्या आपको लगातार थकान रहती है, वजन बढ़ रहा है, या ठंड ज्यादा लगती है? ये हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन की कमी) के संकेत हो सकते हैं। यह एक बहुत ही कॉमन एंडोक्राइन डिसऑर्डर है, खासकर भारत में महिलाओं में। इस गाइड में हम आपको हर चीज़ डीपली समझाएंगे – बीमारी कैसे होती है, क्या खाएं, क्या न खाएं, दवाइयां, घरेलू उपाय और मेंटल हेल्थ पर असर। चलिए शुरू करते हैं! 1. डीप इंट्रोडक्शन और डिजीज मैकेनिज्म (बॉडी के अंदर क्या होता है?) थायराइड ग्लैंड एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है जो आपकी गर्दन के सामने, एडम्स एप्पल के नीचे होती है। यह ग्रंथि थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) नामक हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन आपके शरीर की हर कोशिका के मेटाबॉलिज्म (एनर्जी बर्न करने की गति) को कंट्रोल करते हैं। हाइपोथायरायडिज्म कैसे होता है? प्राइमरी हाइपोथायरायडिज्म (सबसे कॉमन): थायराइड ग्लैंड खुद ही कमजोर हो जाती है। 90% मामलों में इसका कारण हाशिमोटो थायरॉयडिटिस (एक ऑटोइम्यून बीमारी) है, जहां शरीर की इम्यूनिटी अपनी थायराइड ग्लैंड पर अटैक कर देती है। सेकेंडरी हाइपोथायरायडिज्म: पिट्यूटरी ग्लैंड (दिमाग में) पर्याप्त TSH (थायराइड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) नहीं बनाती, जिससे थायराइड को सिग्नल नहीं मिलता। सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म: TSH थोड़ा बढ़ा होता है लेकिन T3/T4 नॉर्मल होते हैं। लक्षण हल्के या न के बराबर होते हैं। मैकेनिज्म समझें: जब थायराइड हार्मोन कम बनते हैं, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। कोशिकाएं एनर्जी के लिए ग्लूकोज और फैट को ठीक से नहीं जला पातीं। इससे थकान, वजन बढ़ना, कब्ज, और ठंड लगना जैसे लक्षण आते हैं। साथ ही, हृदय की धड़कन धीमी हो जाती है और ब्रेन फंक्शन (याददाश्त, फोकस) पर असर पड़ता है। 2. कॉमन और रेयर लक्षण (Symptoms – Common and Rare) हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण धीरे-धीरे आते हैं और अक्सर अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। इसलिए इसे "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है। कॉमन लक्षण (ज्यादातर लोगों में): लगातार थकान और कमजोरी: सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस होना। वजन बढ़ना या वजन घटाने में मुश्किल: डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद वजन कम न होना। ठंड ज्यादा लगना (Cold intolerance): दूसरों को गर्मी लग रही हो, लेकिन आपको ठंड लगे। कब्ज (Constipation): पाचन धीमा होने के कारण। ड्राई स्किन और बालों का झड़ना: त्वचा रूखी, खुजलीदार; बाल पतले और टूटने लगते हैं। मसल्स और जोड़ों में दर्द: बिना कारण दर्द या अकड़न। मूड स्विंग और डिप्रेशन: उदासी, चिड़चिड़ापन, या बिना कारण रोना। दिल की धड़कन धीमी (Bradycardia): पल्स 60 से कम होना। भूख कम लगना या स्वाद में बदलाव। रेयर लक्षण (गंभीर या अनदेखे मामलों में): माइक्सेडीमा कोमा: बहुत गंभीर स्थिति, जिसमें बेहोशी, हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान गिरना), और सांस लेने में दिक्कत होती है। यह मेडिकल इमरजेंसी है। हाथ-पैरों में सूजन (Pitting edema): पैरों, टखनों या हाथों पर पानी भरना। आवाज का भारी होना (Hoarseness): गले में गांठ या सूजन के कारण। मेंटल फॉग और कंसंट्रेशन की कमी: बातें भूलना, फोकस न कर पाना। मासिक धर्म में बदलाव: पीरियड्स का अनियमित होना, ज्यादा ब्लीडिंग या बिल्कुल बंद होना (Amenorrhea)। बहरापन (Hearing loss): कान के अंदरूनी हिस्से पर असर के कारण। पैरों या हाथों में झुनझुनी (Carpal tunnel syndrome): नसों पर दबाव पड़ने से। गॉइटर (Goiter): गर्दन में थायराइड ग्लैंड का बढ़ना, जो दिखाई दे सकता है। नोट: अगर आपको इनमें से 3-4 लक्षण एक साथ हफ्तों से हैं, तो डॉक्टर से TSH, T3, T4 टेस्ट जरूर कराएं। 3. डिटेल्ड डाइट प्लान (Kya Khaye aur Kya Na Khaye) हाइपोथायरायडिज्म में डाइट का बहुत महत्व है। सही खाना थायराइड हार्मोन के उत्पादन और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है। यहां पूरी लिस्ट है: ✅ Kya Khaye (क्या खाएं – थायराइड फ्रेंडली फूड्स) आयोडीन युक्त आहार: आयोडीन थायराइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी है। लेकिन ज्यादा न लें। समुद्री नमक (आयोडाइज्ड सॉल्ट) – थोड़ा सा खाने में डालें। समुद्री शैवाल (Seaweed) – जैसे नोरी, केल्प (सीमित मात्रा में)। दूध, दही, पनीर – कैल्शियम और आयोडीन का अच्छा स्रोत। अंडे (पूरे) – विटामिन डी और आयोडीन। सेलेनियम युक्त फूड्स: सेलेनियम T4 को T3 में बदलने में मदद करता है। ब्राजील नट्स (रोज 2-3 दाने)। टूना, सार्डिन, सैल्मन मछली। सूरजमुखी के बीज, तिल। मशरूम (खासकर शिटाके)। जिंक युक्त आहार: जिंक थायराइड हार्मोन के उत्पादन को सपोर्ट करता है। कद्दू के बीज, चिया सीड्स। चना, मूंग दाल, राजमा। रेड मीट (सीमित मात्रा में, अगर नॉन-वेज खाते हैं)। फाइबर रिच फूड्स: कब्ज से राहत के लिए। ओट्स, जौ, ब्राउन राइस। हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, बथुआ)। फल (सेब, नाशपाती, जामुन)। एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स: ऑटोइम्यून रिएक्शन कम करने के लिए। हल्दी (दूध में डालकर पिएं)। अदरक, लहसुन, दालचीनी। ग्रीन टी (लिमिटेड)। ❌ Kya Na Khaye (क्या न खाएं – थायराइड को नुकसान पहुंचाने वाले फूड्स) गोइट्रोजेनिक फूड्स (कच्चे रूप में): ये थायराइड हार्मोन के उत्पादन को ब्लॉक कर सकते हैं। लेकिन पकाने से इनका असर कम हो जाता है। कच्ची गोभी, ब्रोकली, फूलगोभी, केल (इन्हें स्टीम या सब्जी बनाकर खाएं)। सोया उत्पाद (टोफू, सोया मिल्क) – सीमित मात्रा में, पका कर ही लें। मूंगफली, बाजरा, स्ट्रॉबेरी (ज्यादा मात्रा में न लें)। प्रोसेस्ड और जंक फूड: पैकेज्ड स्नैक्स, फास्ट फूड (पिज्जा, बर्गर) – इनमें ट्रांस फैट और शुगर होता है, जो मेटाबॉलिज्म को और धीमा करता है। मीठे ड्रिंक्स (कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस)। अत्यधिक फाइबर: ज्यादा फाइबर (जैसे चोकर, साबुत अनाज) थायराइड दवा (लेवोथायरोक्सिन) के अवशोषण को कम कर सकता है। दवा लेने के 4 घंटे बाद ही फाइबर वाली चीजें खाएं। कैफीन और अल्कोहल: ये दवा के अवशोषण को प्रभावित करते हैं। दवा लेने के बाद कम से कम 1 घंटा कॉफी/चाय न पिएं। डेली डाइट चार्ट (उदाहरण): सुबह (7 बजे): लेवोथायरोक्सिन दवा खाली पेट लें। 30 मिनट बाद नाश्ता करें। नाश्ता (8 बजे): ओट्स या दलिया (दूध के साथ), 1 अंडा (उबला), 2 ब्राजील नट्स। दोपहर (1 बजे): 1 रोटी (गेहूं), हरी सब्जी (पालक या मेथी), दाल, सलाद (खीरा, टमाटर)। शाम (4 बजे): मुट्ठी भर कद्दू के बीज या 1 फल (सेब/नाशपाती)। रात (8 बजे): ग्रिल्ड मछली या पनीर, उबली ब्रोकली (स्टीम्ड), 1 छोटी चपाती। 4. मेडिकल मैनेजमेंट (दवाइयां और इलाज) हाइपोथायरायडिज्म का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। मुख्य दवा: लेवोथायरोक्सिन (Levothyroxine) यह क्या है? यह सिंथेटिक T4 हार्मोन है, जो शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी को पूरा करता है। कैसे काम करता है? यह आपके शरीर में जाकर T3 में बदल जाता है, जिससे मेटाबॉलिज्म सामान्य हो जाता है। डोज: डॉक्टर TSH लेवल के अनुसार डोज तय करते हैं (आमतौर पर 25-200 mcg/दिन)। शुरुआत में छोटी डोज दी जाती है, फिर धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है। कैसे लें? खाली पेट (सुबह उठते ही) पानी के साथ लें। दवा लेने के बाद 30-60 मिनट तक कुछ न खाएं-पिएं (सिर्फ पानी ले सकते हैं)। कैल्शियम, आयरन, या एंटासिड दवाओं के साथ 4 घंटे का गैप रखें। साइड इफेक्ट्स: सही डोज पर कोई साइड इफेक्ट नहीं। ज्यादा डोज लेने से हाइपरथायरायडिज्म (दिल की धड़कन तेज, घबराहट) हो सकता है। अन्य दवाएं (कम कॉमन): लियोथायरोनिन (Liothyronine): सिंथेटिक T3 हार्मोन। कभी-कभी लेवोथायरोक्सिन के साथ दिया जाता है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट ज्यादा होते हैं। थायराइड एक्सट्रैक्ट (Desiccated thyroid): प्राकृतिक स्रोत (सूअर के थायराइड) से बना, लेकिन आधुनिक दवा से कम प्रभावी। मॉनिटरिंग: हर 6-8 हफ्ते में TSH टेस्ट कराएं जब तक डोज सही न हो जाए। एक बार सही डोज मिलने पर साल में 1-2 बार TSH चेक कराएं। गर्भावस्था में हर तिमाही में TSH चेक कराना जरूरी है। चेतावनी: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें या डोज न बदलें। इससे गंभीर समस्या हो सकती है। 5. प्रूवन होम रेमेडीज और लाइफस्टाइल चेंजेस दवा के साथ ये घरेलू उपाय और लाइफस्टाइल बदलाव थायराइड को कंट्रोल करने में मदद करते हैं: होम रेमेडीज: अश्वगंधा (Ashwagandha): यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी थायराइड हार्मोन को बैलेंस करने में मदद करती है। रोज 300-500 mg अश्वगंधा पाउडर दूध या पानी के साथ लें। (डॉक्टर से पूछकर ही लें, खासकर अगर आप दवा ले रहे हैं।) गुग्गुल (Guggul): यह थायराइड फंक्शन को सपोर्ट करता है। लेकिन इसका सेवन डॉक्टर की देखरेख में ही करें। नारियल तेल (Coconut Oil): इसमें मीडियम-चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCT) होते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाते हैं। खाना पकाने में इस्तेमाल करें या 1 चम्मच सुबह लें। हल्दी वाला दूध: रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पिएं। यह इंफ्लेमेशन कम करता है। मेथी दाना (Fenugreek): मेथी के बीज रात भर भिगोकर सुबह खाली पेट चबाएं। यह मेटाबॉलिज्म को रेगुलेट करता है। लाइफस्टाइल चेंजेस: एक्सरसाइज: रोज 30 मिनट वॉक, योग, या हल्की कार्डियो करें। इससे मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और वजन कंट्रोल रहता है। स्ट्रेस मैनेजमेंट: तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो थायराइड फंक्शन को दबाता है। मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग, या हॉबी अपनाएं। नींद पूरी लें: रोज 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद की कमी से हार्मोन असंतुलन बढ़ता है। सूरज की रोशनी: सुबह 15-20 मिनट धूप में बैठें। विटामिन डी थायराइड फंक्शन के लिए जरूरी है। वजन कंट्रोल करें: धीरे-धीरे वजन घटाने पर फोकस करें (प्रति सप्ताह 0.5-1 किलो)। क्रैश डाइट से बचें। 6. मेंटल हेल्थ और डेली लाइफ पर असर हाइपोथायरायडिज्म सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। मेंटल हेल्थ पर असर: डिप्रेशन और उदासी: थायराइड हार्मोन की कमी से ब्रेन में सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन) कम बनता है, जिससे डिप्रेशन हो सकता है। मेंटल फॉग: कंसंट्रेशन की कमी, बातें भूलना, और धीमी सोच। चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग: छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या रोना आना। नींद की समस्या: थकान के बावजूद नींद न आना या बीच-बीच में जागना। डेली लाइफ पर असर: काम पर फोकस: ऑफिस या पढ़ाई में ध्यान नहीं लगता, प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है। रिश्तों पर असर: मूड स्विंग और थकान के कारण परिवार या पार्टनर से दूरी बन सकती है। सामाजिक जीवन: एनर्जी की कमी के कारण बाहर जाने या मेलजोल में मन नहीं लगता। सेल्फ-इमेज: वजन बढ़ने और बाल झड़ने से आत्मविश्वास कम हो सकता है। कैसे संभालें? डॉक्टर से मेंटल हेल्थ के बारे में खुलकर बात करें। थेरेपी या काउंसलिंग लें (जरूरत पड़े तो)। परिवार और दोस्तों को अपनी बीमारी के बारे में बताएं ताकि वे सपोर्ट कर सकें। छोटे-छोटे लक्ष्य सेट करें (जैसे रोज 10 मिनट वॉक) और खुद को प्रोत्साहित करें। 7. 10 डिटेल्ड FAQs (लॉन्ग-टेल सर्च क्वेरीज) Q1. क्या हाइपोथायरायडिज्म में वजन घटाना मुश्किल है? कैसे घटाएं? हां, मेटाबॉलिज्म धीमा होने के कारण वजन घटाना मुश्किल होता है। लेकिन दवा सही लेने, कम कैलोरी वाली डाइट (1500-1800 कैलोरी/दिन), और रोज 30 मिनट एक्सरसाइज से वजन कम किया जा सकता है। प्रोसेस्ड फूड और शुगर से बचें। Q2. क्या हाइपोथायरायडिज्म प्रेग्नेंसी को प्रभावित करता है? हां, अनकंट्रोल्ड हाइपोथायरायडिज्म से गर्भपात, प्रीटर्म डिलीवरी, और बच्चे के मेंटल डेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है। प्रेग्नेंसी से पहले TSH को 2.5 mIU/L से कम रखें। डॉक्टर से नियमित जांच कराएं। Q3. क्या हाइपोथायरायडिज्म का कोई स्थायी इलाज है? नहीं, यह एक क्रॉनिक कंडीशन है, लेकिन दवा और लाइफस्टाइल से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। कुछ मामलों में (जैसे पोस्टपार्टम थायरॉयडिटिस) यह अस्थायी हो सकता है। Q4. क्या हाइपोथायरायडिज्म में दूध पीना चाहिए? हां, दूध में कैल्शियम और आयोडीन होता है, जो फायदेमंद है। लेकिन दवा लेने के तुरंत बाद दूध न पिएं (कम से कम 4 घंटे का गैप रखें), क्योंकि कैल्शियम दवा के अवशोषण को कम कर सकता है। Q5. क्या हाइपोथायरायडिज्म में केला खा सकते हैं? हां, केला पोटैशियम और फाइबर का अच्छा स्रोत है। यह कब्ज से राहत देता है और एनर्जी देता है। लेकिन ज्यादा मीठा होने के कारण सीमित मात्रा में (1 केला/दिन) खाएं। Q6. क्या हाइपोथायरायडिज्म से बाल झड़ते हैं? कैसे रोकें? हां, हार्मोन की कमी से बाल पतले होकर झड़ते हैं। दवा सही लेने से यह कंट्रोल हो जाता है। इसके अलावा, नारियल तेल से मालिश, आंवला जूस, और प्रोटीन रिच डाइट (अंडे, दाल) से बालों को मजबूत बनाएं। Q7. क्या हाइपोथायरायडिज्म में शराब पी सकते हैं? सीमित मात्रा में शराब पी सकते हैं, लेकिन यह दवा के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है और लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। बेहतर होगा कि शराब से बचें या डॉक्टर से पूछकर

Aaj Sar Mein Hammer Kyu Chal Raha? Samose Ki Saza Ya BP High?

Yaar aaj subah se sar mein dard ho raha hai, aise lag raha hai jaise koi hammer maar raha hai andar se. Pata nahi kyun, par mujhe lagta hai BP high ho gaya hoga. Kuch din pehle hi check karwaya tha, doctor ne kaha tha "Ramesh ji, tension kam lo, namak aur oily cheezein mat khao." Par kya karein? Dukaan pe gahre samose aaye the, bachhe bhi maang rahe the, socha ek-do kha loonga to kya bigdega... aur aaj yeh haal hai. Maine aaj subah nimbu pani mein thoda sa namak aur shakkar daal kar piya, kuch log kehte hain isse BP control hota hai. Par kuch farak nahi pada. Ab soch raha hoon, kya karein? Koi gharelu nuskha batao bhai log. Doctor ke paas jaane ka time nahi hai, aur woh bhi wahi bolenge "dawai khao, tel mat khao". Aur haan, raat ko neend bhi theek se nahi aati, sochta rehta hoon dukaan ka hisaab-kitaab, bachhon ki padhai, ghar ka kharcha... phir neend uth jaati hai. Kya yeh sab tension ki wajah se BP badh raha hai? Koi toh batao, kaise control karein is sab ko?

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