korican 150mg tablet allopathy (Fluconazole (150mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
korican 150mg tablet allopathy (Fluconazole (150mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Kerwin Formulations. Contains Fluconazole (150mg).

korican 150mg tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Fluconazole (150mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Kerwin Formulations 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 21, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is korican 150mg tablet used for?

korican 150mg tablet (Fluconazole (150mg)) is used to treat anti infectives. It contains Fluconazole (150mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Fluconazole (150mg)
  • Manufacturer: Kerwin Formulations
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 korican 150mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

korican 150mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Fluconazole (150mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The first generic medicine was introduced in India in 1970 after the Patents Act was amended.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Fluconazole (150mg)
Brand Namekorican 150mg tablet
ManufacturerKerwin Formulations
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action ClassFungal ergosterol synthesis inhibitor
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take korican 150mg tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 korican 150mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of korican 150mg tablet?

  • Headache
  • Nausea
  • Stomach pain

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔄 Best Substitutes for korican 150mg tablet

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Medical Note: Always consult your doctor before switching medications. Generic alternatives with same salts are therapeutically equivalent.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about korican 150mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of korican 150mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Fluconazole (150mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of korican 150mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Neck collar pehna toh gardan aur akad gayi! Kya galat kar raha hoon?

Namaste. Aaj subah uth ke bahut takleef hui. Neck collar pehna tha raat ko, soch raha tha isse aaram milega, par ulta gardan mein aur akad aa gayi. Hath to pehle hi sunn the, ab to ungliyon mein bhi jhanjhanahat si hoti hai. Doctor ne kaha tha collar pehno, lekin mujhe lagta hai yeh pressure badha raha hai. Kya koi bhai ya behn bata sakta hai? Kya collar se vaastav mein fayda hota hai ya nahi? Maine aaj subah collar utaar diya aur dheere se garmi ka kapda gardan par rakha—thoda aaram aaya. Haan, yoga aur homeopathy ka sahaara hai. Pichle mahine homeopathy ki dawai le raha tha, lekin ab collar ke chakkar mein sab bigad gaya. Pata nahi kya karein. Kya kisi ne garmi ki patai ya halki massage se shanti payi? Mujhe yoga ka ek aasan yaad aa raha hai, lekin aaj gardan mein itna dard hai ki uthne ka mann nahi karta. Aap sab se vinamra nivedan hai—apna anubhav zaroor share karein.

Thyroid ki wajah se aankhein bahar nikal rahi hain? Kya karein? 😩 #Help

Yaar, aaj kal toh aankhein bahut problem de rahi hain. Thyroid ke wajah se bulging issue ho gaya hai, jaise koi bahar nikal aayi hoon. Pehle log bolte the "arey tum toh patli ho gayi" but ab toh koi mera chehra dekh ke poochh leta hai "kya hua? neend poori nahi aayi kya?" 😤 Kal ek relative ne toh seedha kaha "teri aankhein kyu nikal rahi hain?" Bhai, main kya bolun? Yeh thyroid hai, koi makeup ya skincare se theek nahi hota. Heart palpitations bhi hote hain, haath kaanpte hain, aur ab aankhein bhi... kya zindagi hai. Kisi ko pata hai koi home remedy ya doctor ke paas jana hai? Mera endocrinologist toh sirf dawai de raha hai, lekin yeh bulging kabhi kam hoga ya nahi? Koi batao, thoda relief chahiye. 😩

Complete Guide to Diabetes Home Remedies - 31-05-2026

डायबिटीज के घरेलू उपचार: एक संपूर्ण और विस्तृत गाइड (Diabetes Home Remedies: A Complete Guide) नमस्ते! अगर आप या आपके परिवार में किसी को डायबिटीज (मधुमेह) है, तो यह गाइड आपके लिए ही है। यहाँ हम बात करेंगे डायबिटीज के घरेलू उपचार (Diabetes Home Remedies) के बारे में, लेकिन पूरी तरह से वैज्ञानिक और विस्तृत जानकारी के साथ। यह कोई साधारण लेख नहीं है; यह एक मेडिकल गाइड है जो आपको बीमारी को समझने, उसके लक्षणों को पहचानने, और सही आहार व जीवनशैली अपनाने में मदद करेगा। ध्यान दें: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) डायबिटीज क्या है? (What is Diabetes?) डायबिटीज एक क्रोनिक (दीर्घकालिक) मेटाबोलिक बीमारी है, जिसमें शरीर में ब्लड शुगर (ग्लूकोज) का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है। ग्लूकोज हमारे शरीर की कोशिकाओं (cells) के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। लेकिन जब यह कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता और खून में ही जमा रह जाता है, तो समस्या शुरू होती है। यह शरीर के अंदर कैसे होता है? (How does it happen inside the body?) इसे समझने के लिए हमें इंसुलिन (Insulin) नामक हार्मोन को समझना होगा। इंसुलिन पैंक्रियाज (अग्न्याशय) में बनता है। यह एक चाबी (key) की तरह काम करता है, जो कोशिकाओं के दरवाजे (ग्लूकोज ट्रांसपोर्टर) को खोलता है ताकि ग्लूकोज अंदर जा सके। टाइप 1 डायबिटीज: इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं (बीटा सेल्स) पर हमला कर देती है और उन्हें नष्ट कर देती है। इसलिए शरीर में इंसुलिन बनना ही बंद हो जाता है। यह आमतौर पर बचपन या युवावस्था में होता है। टाइप 2 डायबिटीज (सबसे आम): यह दो कारणों से हो सकता है: इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता खो देती हैं। यानी चाबी (इंसुलिन) तो है, लेकिन ताला (कोशिका का दरवाजा) जंग लग गया है और नहीं खुलता। ग्लूकोज अंदर नहीं जा पाता। इंसुलिन की कमी (Relative Insulin Deficiency): समय के साथ, पैंक्रियाज ज्यादा इंसुलिन बनाने की कोशिश करता है, लेकिन अंततः थक जाता है और उसकी इंसुलिन बनाने की क्षमता कम हो जाती है। जेस्टेशनल डायबिटीज: यह केवल गर्भावस्था के दौरान होता है। गर्भावस्था के हार्मोन इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा कर सकते हैं। यह आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन माँ को बाद में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। ब्लड शुगर कंट्रोल क्यों जरूरी है? लगातार हाई ब्लड शुगर (हाइपरग्लाइसीमिया) शरीर की छोटी और बड़ी रक्त वाहिकाओं (blood vessels) और नसों (nerves) को नुकसान पहुंचाता है। यही कारण है कि डायबिटीज के लंबे समय तक रहने पर किडनी, आंखें, दिल और पैरों जैसे अंग प्रभावित होते हैं। 2. सामान्य और असामान्य लक्षण (Common AND Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms): बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खासकर रात में। शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को बाहर निकालने के लिए ज्यादा पानी खींचता है। अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia): बार-बार पेशाब करने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है, जिससे प्यास बहुत लगती है। अचानक वजन कम होना (Unexplained Weight Loss): खासकर टाइप 1 में। शरीर ग्लूकोज का उपयोग नहीं कर पाता, इसलिए वह ऊर्जा के लिए फैट और मसल्स को तोड़ना शुरू कर देता है। ज्यादा भूख लगना (Polyphagia): भरपेट खाने के बावजूद बार-बार भूख लगती है, क्योंकि कोशिकाओं को ऊर्जा नहीं मिल रही होती। थकान और कमजोरी (Fatigue): शरीर में ऊर्जा की कमी के कारण हमेशा थकान महसूस होना। धुंधला दिखाई देना (Blurry Vision): हाई ब्लड शुगर आंखों के लेंस से तरल पदार्थ खींच लेता है, जिससे फोकस करने में परेशानी होती है। घाव का धीरे भरना (Slow Wound Healing): हाई शुगर रक्त प्रवाह और इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है, जिससे कट या घाव जल्दी नहीं भरते। बार-बार संक्रमण होना (Frequent Infections): जैसे मूत्र मार्ग में संक्रमण (UTI), त्वचा पर फोड़े-फुंसी, या यीस्ट इन्फेक्शन। असामान्य या कम ज्ञात लक्षण (Rare or Less-Known Symptoms): पैरों में जलन या झुनझुनी (Burning or Tingling in Feet): इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। हाई शुगर नसों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे पैरों में सुन्नता, झुनझुनी या जलन होती है। कभी-कभी यह दर्द रात में बढ़ जाता है। त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans): गर्दन, बगल, या जांघों के बीच की त्वचा मोटी, मखमली और काली हो जाती है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। यौन समस्याएं (Sexual Dysfunction): पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) और महिलाओं में योनि का सूखापन (Vaginal Dryness) या सेक्स में रुचि कम होना। बार-बार मसूड़ों में संक्रमण या मसूड़ों से खून आना (Gum Infections): डायबिटीज मुंह में बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है और मसूड़ों की बीमारी (Periodontitis) का खतरा बढ़ाता है। सुनने की क्षमता में कमी (Hearing Loss): हाई ब्लड शुगर आंतरिक कान की छोटी रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स (Irritability & Mood Swings): ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव सीधे मस्तिष्क के रसायनों को प्रभावित करता है, जिससे मूड खराब हो सकता है। डायबिटिक डर्मोपैथी (Diabetic Dermopathy): पिंडलियों पर हल्के भूरे, गोल या अंडाकार धब्बे दिखना। यह हानिरहित है लेकिन डायबिटीज का संकेत हो सकता है। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan - Kya Khaye aur Kya Na Khaye) डायबिटीज को कंट्रोल करने में डाइट सबसे अहम भूमिका निभाती है। यहाँ हम भारतीय खानपान के हिसाब से बता रहे हैं कि क्या खाएं और क्या न खाएं। क्या खाएं (Kya Khaye - What to Eat): फाइबर से भरपूर अनाज (High-Fiber Grains): ज्वार, बाजरा, रागी (मडुआ): ये ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) में कम होते हैं और धीरे-धीरे शुगर छोड़ते हैं। ओट्स (Oats), क्विनोआ (Quinoa): नाश्ते में ले सकते हैं। साबुत गेहूं का आटा (Whole Wheat Flour): मैदे की जगह इसका इस्तेमाल करें। दालें और फलियां (Legumes & Lentils): मूंग दाल, चना दाल, मसूर दाल, राजमा, छोले: ये प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो ब्लड शुगर को स्थिर रखते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां (Green Leafy Vegetables): पालक, मेथी, सरसों का साग, बथुआ: ये कैलोरी में कम और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। मेथी के बीज (Fenugreek Seeds) तो डायबिटीज के लिए रामबाण हैं। अन्य सब्जियां (Other Vegetables): करेला (Bitter Gourd): इसमें पॉलीपेप्टाइड-पी (p-insulin) होता है जो नेचुरल इंसुलिन की तरह काम करता है। लौकी (Bottle Gourd), तोरी (Zucchini), खीरा (Cucumber): ये पानी और फाइबर से भरपूर होते हैं। भिंडी (Okra/Ladyfinger): इसमें मौजूद फाइबर शुगर अब्जॉर्प्शन को धीमा करता है। ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी: क्रूसिफेरस सब्जियां इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाती हैं। फल (Fruits - सीमित मात्रा में): सेब, नाशपाती, अमरूद, संतरा, जामुन, किवी: ये कम GI वाले फल हैं। केला, आम, अंगूर, लीची जैसे मीठे फलों से बचें या बहुत कम मात्रा में लें। नट्स और बीज (Nuts & Seeds): बादाम, अखरोट, पिस्ता, चिया सीड्स, फ्लैक्स सीड्स (अलसी): ये हेल्दी फैट और फाइबर देते हैं। रोजाना एक मुट्ठी लें। प्रोटीन के स्रोत (Protein Sources): अंडे, चिकन (बिना त्वचा के), मछली (खासकर सैल्मन, मैकेरल), पनीर, टोफू, सोया: प्रोटीन भूख को कंट्रोल करता है और शुगर स्पाइक नहीं होने देता। डेयरी (Dairy): दही (ग्रीक योगर्ट), छाछ (Buttermilk), कम वसा वाला दूध: प्रोबायोटिक्स से भरपूर, पाचन के लिए अच्छा। पेय पदार्थ (Beverages): पानी (खूब सारा), नारियल पानी, हर्बल चाय (ग्रीन टी, दालचीनी की चाय), नींबू पानी (बिना चीनी के): ये हाइड्रेशन बनाए रखते हैं और मेटाबॉलिज्म बूस्ट करते हैं। क्या न खाएं (Kya Na Khaye - What to Avoid): चीनी और मीठे पदार्थ (Sugar & Sugary Foods): मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी, रसगुल्ला), कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम: ये ब्लड शुगर को तुरंत आसमान पर पहुंचा देते हैं। शहद, गुड़, मेपल सिरप: ये नेचुरल हैं, लेकिन फिर भी शुगर ही हैं। बहुत सीमित मात्रा में ही लें। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (Refined Carbs): मैदा (White Flour), सफेद चावल, सफेद ब्रेड, पास्ता, नूडल्स: ये फाइबर रहित होते हैं और जल्दी पचकर शुगर बढ़ाते हैं। फ्राइड और फैटी फूड्स (Fried & Fatty Foods): समोसा, पकौड़े, भुजिया, फ्रेंच फ्राइज, बर्गर, पिज्जा: ये वजन बढ़ाते हैं और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देते हैं। ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थ (High-Sodium Foods): अचार, पापड़, चिप्स, प्रोसेस्ड मीट (सॉसेज, बेकन): ये ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक है। मीठे फल (High-Sugar Fruits): केला, आम, अंगूर, लीची, चीकू, खजूर: इन्हें पूरी तरह से ना कहें, लेकिन बहुत कम मात्रा में और खाली पेट न लें। शराब (Alcohol): शराब ब्लड शुगर को अचानक गिरा सकती है (हाइपोग्लाइसीमिया) या बढ़ा सकती है। अगर पीना ही है, तो डॉक्टर से पूछकर बहुत कम मात्रा में लें। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management - Educational Only) यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। दवाएं डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बाद ही लें। डायबिटीज की दवाएं कैसे काम करती हैं? मेटफॉर्मिन (Metformin): यह सबसे आम पहली पसंद की दवा है। यह लिवर में ग्लूकोज उत्पादन को कम करती है और कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है (इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करती है)। सल्फोनील्यूरिया (Sulphonylureas - जैसे ग्लिमेपीराइड, ग्लिपिजाइड): ये पैंक्रियाज को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए उत्तेजित करते हैं। डीपीपी-4 इनहिबिटर्स (DPP-4 Inhibitors - जैसे सीटाग्लिप्टिन): ये एक एंजाइम को ब्लॉक करते हैं जो शरीर के नेचुरल इंक्रीटिन हार्मोन को तोड़ता है। इंक्रीटिन हार्मोन खाने के बाद इंसुलिन रिलीज को बढ़ाते हैं और ग्लूकोज उत्पादन को कम करते हैं। एसजीएलटी2 इनहिबिटर्स (SGLT2 Inhibitors - जैसे डापाग्लिफ्लोजिन, एम्पाग्लिफ्लोजिन): ये किडनी को मूत्र के माध्यम से अधिक ग्लूकोज बाहर निकालने का कारण बनते हैं। इससे ब्लड शुगर कम होता है और वजन भी घटता है। जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 Receptor Agonists - जैसे सेमाग्लूटाइड, लिराग्लूटाइड): ये इंजेक्शन के रूप में ली जाने वाली दवाएं हैं। ये इंसुलिन स्राव बढ़ाती हैं, भूख कम करती हैं, और वजन घटाने में मदद करती हैं। इंसुलिन (Insulin): टाइप 1 डायबिटीज के लिए यह जरूरी है। टाइप 2 में, जब अन्य दवाएं काम नहीं करतीं, तब भी इंसुलिन दिया जाता है। यह सीधे शरीर में ग्लूकोज को कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करता है। कई प्रकार के इंसुलिन होते हैं (तेजी से काम करने वाला, लंबे समय तक काम करने वाला)। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) ये उपाय डॉक्टर की सलाह और दवाओं के साथ मिलकर काम करते हैं। इन्हें दवाओं का विकल्प न समझें। घरेलू उपचार (Home Remedies): मेथी दाना (Fenugreek Seeds): कैसे लें: रात को 1 चम्मच मेथी दाना एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट पानी पिएं और दाने चबाएं। या मेथी दाने का पाउडर बनाकर गुनगुने पानी के साथ लें। फायदा: इसमें गैलेक्टोमैनन नामक फाइबर होता है जो शुगर अब्जॉर्प्शन को धीमा करता है। करेला (Bitter Gourd): कैसे लें: करेले का जूस सुबह खाली पेट पिएं (नींबू मिलाकर स्वाद बढ़ाएं)। या करेले की सब्जी खाएं। फायदा: इसमें चारैंटिन और पॉलीपेप्टाइड-पी होता है, जो ब्लड शुगर कम करने में मदद करते हैं। दालचीनी (Cinnamon): कैसे लें: 1-2 ग्राम दालचीनी पाउडर को गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर दिन में एक बार लें। फायदा: यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है और कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज ग्रहण करने में सुधार करता है। जामुन (Indian Blackberry): कैसे लें: मौसम में जामुन खाएं। जामुन के बीजों को सुखाकर पाउडर बनाएं और रोजाना एक चम्मच पानी के साथ लें। फायदा: जामुन में जंबोलिन और जंबोसिन नामक यौगिक होते हैं जो ब्लड शुगर को कम करते हैं। एलोवेरा (Aloe Vera): कैसे लें: एलोवेरा की पत्ती से जेल निकालकर उसका जूस बनाएं और सुबह खाली पेट पिएं। फायदा: यह ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करता है और पाचन में सुधार करता है। आंवला (Indian Gooseberry): कैसे लें: आंवले का जूस रोजाना सुबह पिएं। या आंवला पाउडर गुनगुने पानी के साथ लें। फायदा: यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है, जो पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं की रक्षा करता है और इंसुलिन उत्पादन को बढ़ावा देता है। हल्दी (Turmeric): कैसे लें: एक चुटकी हल्दी को गुनगुने दूध या पानी में मिलाकर पिएं। काली मिर्च के साथ लें, क्योंकि यह करक्यूमिन के अब्जॉर्प्शन को बढ़ाती है। फायदा: करक्यूमिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करते हैं। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes): नियमित व्यायाम (Regular Exercise): क्या करें: रोजाना कम से कम 30-45 मिनट की एक्सरसाइज करें। तेज चलना (Brisk Walking), जॉगिंग, साइकिलिंग, स्विमिंग, या योगासन (जैसे सूर्य नमस्कार, कपालभाति, अनुलोम-विलोम) बहुत फायदेमंद हैं। फायदा: व्यायाम मांसपेशियों को ग्लूकोज का उपयोग करने में मदद करता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है। वजन नियंत्रण (Weight Management): अगर आपका वजन ज्यादा है, तो सिर्फ 5-10% वजन कम करने से भी ब्लड शुगर कंट्रोल में बड़ा फर्क पड़ सकता है। तनाव प्रबंधन (Stress Management): तनाव (स्ट्रेस) हार्मोन कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन को बढ़ाता है, जो ब्लड शुगर को बढ़ाते हैं। ध्यान (Meditation), गहरी सांस लेना (Deep Breathing), और पर्याप्त नींद लेना तनाव कम करने में मदद करता

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