biocetam 400mg tablet allopathy (Piracetam (400mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
biocetam 400mg tablet allopathy (Piracetam (400mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Biochem Pharmaceutical Industries. Contains Piracetam (400mg).

biocetam 400mg tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Piracetam (400mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Biochem Pharmaceutical Industries 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 21, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is biocetam 400mg tablet used for?

biocetam 400mg tablet (Piracetam (400mg)) is used to treat neuro cns. It contains Piracetam (400mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Piracetam (400mg)
  • Manufacturer: Biochem Pharmaceutical Industries
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 biocetam 400mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

biocetam 400mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से neuro cns और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Piracetam (400mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

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📋 Drug Information

Generic Name(s)Piracetam (400mg)
Brand Namebiocetam 400mg tablet
ManufacturerBiochem Pharmaceutical Industries
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassNEURO CNS
Action ClassNootropic agent
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take biocetam 400mg tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 biocetam 400mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of biocetam 400mg tablet?

  • Weight gain
  • Nervousness
  • Abnormality of voluntary movements

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about biocetam 400mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of biocetam 400mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Piracetam (400mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of biocetam 400mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Minoxidil ke side effects: 2 hafte mein dizzy aur fast heartbeat - kya karun?

bhai log, minoxidil shuru kiya hai 2 hafte pehle. ek baat batao - kya iske side effects sach mein aate hain? main 5% wala foam lagata hoon raat ko. pehle 2-3 din theek tha, ab kal se thoda dizzy feel kar raha hoon aur heart beat thoda fast ho raha hai. yaar, darr lag raha hai. kya yeh common hai ya mujhe band kar dena chahiye? mera ek dost bolta hai "arre temporary hota hai, saans le" par main soch raha hoon ki shayad yeh mere liye nahi hai. waise bhi friends "takle" bol ke chidha rahe hain, aur agar minoxidil se aur kuch ho gaya toh mazaak aur badega. koi hai jiska similar experience ho? minoxidil continue karu ya drop karun? main soch raha hoon ki dermaroller bhi try karun par pehle yeh side effects ka scene clear karo. please help karo bhai log, bahut confuse hoon.

Complete Guide to Healthy Eating Habits - 01-06-2026

स्वस्थ खाने की आदतें: एक संपूर्ण चिकित्सा मार्गदर्शिका (Healthy Eating Habits: A Complete Medical Guide) नमस्ते! क्या आप जानते हैं कि हमारी सेहत का 80% हिस्सा हमारी डाइट और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है? आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, हम अक्सर खाने-पीने की गलत आदतें अपना लेते हैं, जो धीरे-धीरे हमारे शरीर को अंदर से कमजोर कर देती हैं। यह गाइड आपको स्वस्थ खाने की आदतों के बारे में हर एक छोटी-बड़ी बात बताएगी, जो साइंस और आयुर्वेद दोनों पर आधारित है। चलिए, शुरू करते हैं! 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) स्वस्थ खाने की आदतें क्या हैं? स्वस्थ खाने की आदतों का मतलब सिर्फ "डाइटिंग" या "वजन कम करना" नहीं है। यह एक जीवनशैली है, जहाँ आप अपने शरीर को सही पोषण (macronutrients: carbs, protein, fats; micronutrients: vitamins, minerals) देते हैं, ताकि वह बीमारियों से लड़ सके, एनर्जी से भरा रहे, और लंबी उम्र तक स्वस्थ रहे। शरीर के अंदर क्या होता है? (Disease Mechanism) जब आप गलत खाना (जैसे जंक फूड, ज्यादा चीनी, प्रोसेस्ड फूड) खाते हैं, तो आपके शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं: इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): ज्यादा चीनी और रिफाइंड कार्ब्स (जैसे सफेद चावल, मैदा) खाने से पैंक्रियाज को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है। धीरे-धीरे, शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता खो देती हैं, जिससे ब्लड शुगर बढ़ता है और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा होता है। सूजन (Inflammation): ट्रांस फैट, ओमेगा-6 फैटी एसिड्स (जैसे रिफाइंड ऑयल) और चीनी शरीर में क्रॉनिक सूजन पैदा करते हैं। यह सूजन हृदय रोग, गठिया, और यहां तक कि कैंसर का कारण बन सकती है। गट माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) का असंतुलन: आपकी आंत में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया रहते हैं। फाइबर की कमी और प्रोसेस्ड फूड खाने से अच्छे बैक्टीरिया मर जाते हैं और बुरे बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, जिससे पाचन खराब होता है, इम्युनिटी कमजोर होती है, और मूड भी खराब होता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress): जंक फूड में एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी होती है, जिससे शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ते हैं। ये फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है और क्रॉनिक बीमारियां होती हैं। स्वस्थ खाने से शरीर कैसे ठीक होता है? जब आप सही खाना खाते हैं (जैसे साबुत अनाज, हरी सब्जियां, प्रोटीन, हेल्दी फैट), तो: इंसुलिन संवेदनशीलता वापस आती है। सूजन कम होती है। गट हेल्दी रहता है, जिससे पाचन और इम्युनिटी मजबूत होती है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है और कोशिकाएं रिपेयर होती हैं। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) गलत खाने की आदतों के लक्षण धीरे-धीरे दिखते हैं। कुछ लोगों में ये जल्दी दिखते हैं, तो कुछ में सालों बाद। यहाँ दोनों तरह के लक्षण दिए गए हैं: सामान्य लक्षण (Common Symptoms) थकान और कमजोरी: हर समय सुस्ती महसूस होना, खासकर खाना खाने के बाद। वजन बढ़ना या घटना: बिना किसी कारण के वजन में बदलाव। पाचन संबंधी समस्याएं: गैस, एसिडिटी, कब्ज, या दस्त। त्वचा की समस्याएं: मुंहासे, रूखी त्वचा, या एक्जिमा। बार-बार बीमार पड़ना: कमजोर इम्युनिटी के कारण जुकाम, फ्लू जल्दी पकड़ना। मूड स्विंग्स: चिड़चिड़ापन, चिंता, या डिप्रेशन जैसा महसूस होना। नींद न आना: अनिद्रा या बेचैन नींद। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms) बालों का झड़ना: प्रोटीन या आयरन की कमी से। नाखूनों का कमजोर होना: बायोटिन या जिंक की कमी से। मुंह में छाले: विटामिन B12 या फोलिक एसिड की कमी से। हाथ-पैरों में जलन या सुन्नपन (Tingling): विटामिन B12 या न्यूरोपैथी का संकेत, जो डायबिटीज या पोषण की कमी से हो सकता है। धुंधला दिखना (Blurry Vision): विटामिन A की कमी या ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से। हड्डियों में दर्द: विटामिन D या कैल्शियम की कमी से। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan) यहाँ एक पूरी डाइट प्लान दी गई है, जो भारतीय खानपान पर आधारित है। यह सभी उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है। क्या खाएं (What to Eat - "Kya Khaye") साबुत अनाज (Whole Grains): गेहूं की रोटी, ब्राउन राइस, बाजरा, ज्वार, रागी (nachni), ओट्स, क्विनोआ। ये फाइबर और विटामिन B से भरपूर होते हैं। दालें और फलियां (Legumes & Pulses): मूंग दाल, तूर दाल, चना, राजमा, काबुली चना, सोयाबीन। ये प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां (Leafy Greens): पालक, मेथी, सरसों का साग, बथुआ, केल। इनमें आयरन, कैल्शियम, और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। रंगीन सब्जियां (Colorful Vegetables): गाजर, चुकंदर, शिमला मिर्च, ब्रोकली, फूलगोभी, लौकी, तोरी, कद्दू। हर रंग का अपना पोषण होता है। फल (Fruits): सेब, केला, संतरा, पपीता, आम (सीमित मात्रा में), जामुन, अमरूद, अनार। छिलके सहित खाएं (जहां संभव हो)। हेल्दी फैट (Healthy Fats): घी (1-2 चम्मच रोज), नारियल तेल, जैतून का तेल, बादाम, अखरोट, अलसी के बीज, चिया सीड्स। प्रोटीन (Protein): अंडे, चिकन (ग्रिल्ड), मछली (सैल्मन, मैकेरल), पनीर, टोफू, दही (ग्रीक यॉगर्ट), छाछ। ड्राई फ्रूट्स और बीज (Nuts & Seeds): बादाम, अखरोट, काजू (सीमित), किशमिश, सूरजमुखी के बीज, कद्दू के बीज। हर्बल ड्रिंक्स (Herbal Drinks): ग्रीन टी, अदरक की चाय, तुलसी का काढ़ा, नींबू पानी (बिना चीनी), छाछ। क्या न खाएं (What to Avoid - "Kya Na Khaye") रिफाइंड कार्ब्स (Refined Carbs): सफेद चावल, मैदा (नूडल्स, ब्रेड, समोसा, बिस्कुट), सफेद चीनी, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस। ट्रांस फैट (Trans Fats): बाजार में मिलने वाले तले हुए खाद्य पदार्थ (समोसा, पकौड़ा, फ्रेंच फ्राइज), मार्जरीन, वनस्पति घी। प्रोसेस्ड फूड (Processed Foods): पैकेज्ड स्नैक्स (चिप्स, नमकीन), फ्रोजन फूड, सॉसेज, बेकन, मैगी। ज्यादा नमक और चीनी: अचार, चटनी, सॉस, मिठाइयां, केक, पेस्ट्री। फ्राइड फूड (Fried Foods): भुजिया, बड़ा-पाव, छोले-भटूरे, आलू के पराठे (तेल में तले हुए)। कैफीन और अल्कोहल (Excess): ज्यादा चाय-कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स, शराब। नमूना डाइट प्लान (Sample Daily Meal Plan) सुबह (6-7 AM): गुनगुना पानी + नींबू + शहद, या भीगे हुए बादाम (4-5) + अखरोट (2)। नाश्ता (8-9 AM): ओट्स उपमा (सब्जियों के साथ) या मूंग दाल चीला या 2 अंडे का ऑमलेट + 1 रोटी। मिड-मॉर्निंग (11 AM): 1 फल (सेब या नाशपाती) या एक मुट्ठी भुने चने। दोपहर का खाना (1-2 PM): 2 रोटी (गेहूं/बाजरा) + 1 कटोरी दाल + 1 कटोरी हरी सब्जी + सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर) + 1 कटोरी दही। शाम (4-5 PM): ग्रीन टी या छाछ + मुरमुरे की चिवड़ा (भुना हुआ) या 1 मुट्ठी ड्राई फ्रूट्स। रात का खाना (7-8 PM): 1 रोटी + ग्रिल्ड पनीर/चिकन + सब्जी का सूप या खिचड़ी (मूंग दाल + चावल) + घी। सोने से पहले (10 PM): 1 गिलास गुनगुना दूध (हल्दी के साथ) या कैमोमाइल चाय। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) यहाँ दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। कृपया डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। आमतौर पर दी जाने वाली दवाएं और उनका काम मेटफॉर्मिन (Metformin): टाइप 2 डायबिटीज में दी जाती है। यह लिवर में ग्लूकोज बनने को कम करती है और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है। स्टैटिन (Statins) जैसे एटोरवास्टेटिन (Atorvastatin): कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए। यह लिवर में कोलेस्ट्रॉल बनने को रोकती है। एंटीहाइपरटेंसिव (Antihypertensives) जैसे लोसार्टन (Losartan): ब्लड प्रेशर कम करने के लिए। यह ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करती है। प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (PPIs) जैसे ओमेप्राजोल (Omeprazole): एसिडिटी और GERD के लिए। यह पेट में एसिड बनने को कम करती है। एंटीडिप्रेसेंट्स (Antidepressants) जैसे SSRI: डिप्रेशन और चिंता के लिए, जो गलत खाने की आदतों से बढ़ सकती है। दवाएं कैसे काम करती हैं? ये दवाएं शरीर के अंदर केमिकल बैलेंस को ठीक करती हैं। उदाहरण के लिए, मेटफॉर्मिन लिवर को कम शुगर बनाने का संकेत देती है, जबकि स्टैटिन लिवर में एक एंजाइम (HMG-CoA रिडक्टेज) को ब्लॉक करती है जो कोलेस्ट्रॉल बनाता है। लेकिन याद रखें, दवाएं सिर्फ लक्षणों को कंट्रोल करती हैं, जड़ से बीमारी को ठीक करने के लिए डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपचार (Home Remedies) पाचन सुधारने के लिए: रोज सुबह खाली पेट 1 चम्मच अजवाइन + काला नमक गुनगुने पानी के साथ लें। या खाने के बाद 1 चम्मच सौंफ चबाएं। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए: हल्दी वाला दूध (गोल्डन मिल्क) रोज रात को पिएं। इसमें करक्यूमिन होता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी है। ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए: करेले का जूस (थोड़ा पानी मिलाकर) रोज सुबह पिएं। या मेथी के बीज रात भर भिगोकर सुबह चबाएं। वजन कम करने के लिए: ग्रीन टी में नींबू और शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार पिएं। यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है। त्वचा के लिए: एलोवेरा जूस (बिना चीनी) रोज पिएं। यह शरीर को डिटॉक्स करता है। नींद के लिए: सोने से 1 घंटा पहले जायफल (एक चुटकी) गुनगुने दूध में मिलाकर पिएं। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) समय पर खाना खाएं: हर दिन एक ही समय पर नाश्ता, लंच और डिनर करें। रात का खाना सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खा लें। पानी पीने की आदत: दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। खाना खाने के बीच में पानी पिएं, खाने के साथ नहीं। एक्सरसाइज: रोज 30-45 मिनट की एक्सरसाइज करें (तेज चलना, योग, साइकिलिंग)। यह मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और तनाव कम करता है। नींद पूरी करें: 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें। नींद की कमी से हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जिससे भूख बढ़ती है। माइंडफुल ईटिंग (Mindful Eating): खाना खाते समय टीवी या फोन न देखें। धीरे-धीरे चबाकर खाएं, ताकि पेट भरे होने का संकेत दिमाग तक पहुंचे। तनाव प्रबंधन: ध्यान (मेडिटेशन), प्राणायाम (अनुलोम-विलोम), या संगीत सुनने से तनाव कम करें। तनाव बढ़ने पर लोग ज्यादा खाते हैं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव आपका पेट और दिमाग आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं (गट-ब्रेन एक्सिस)। गलत खाने की आदतों से: चिंता और डिप्रेशन बढ़ सकता है: ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड खाने से ब्रेन में सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन) कम बनता है। मूड स्विंग्स: ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से चिड़चिड़ापन और गुस्सा आता है। याददाश्त कमजोर होना: ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की कमी से ब्रेन फॉग (भूलने की बीमारी) हो सकती है। नींद की समस्या: कैफीन और चीनी से नींद खराब होती है, जिससे मानसिक थकान बढ़ती है। दैनिक जीवन पर प्रभाव एनर्जी लेवल: हेल्दी खाने से दिनभर एनर्जी बनी रहती है, जबकि जंक फूड खाने से दोपहर में सुस्ती आती है। काम पर फोकस: सही पोषण से दिमाग तेज चलता है, जिससे प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। सामाजिक जीवन: जब आप स्वस्थ रहते हैं, तो आप परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने में ज्यादा मजा लेते हैं। बीमार रहने से सामाजिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। आत्मविश्वास: वजन कंट्रोल और अच्छी त्वचा से आत्मविश्वास बढ़ता है। 7. 10 विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (10 Detailed FAQs) 1. क्या डायबिटीज में चावल खा सकते हैं? हां, लेकिन सीमित मात्रा में। सफेद चावल की बजाय ब्राउन राइस या परबॉयल्ड राइस खाएं। एक बार में 1 कटोरी से ज्यादा न खाएं। साथ में दाल और सब्जी जरूर लें, ताकि शुगर धीरे-धीरे बढ़े। 2. क्या वजन घटाने के लिए सिर्फ सलाद खाना सही है? नहीं, सिर्फ सलाद खाने से शरीर को प्रोटीन और फैट नहीं मिलता, जिससे मसल्स कमजोर हो जाती हैं और मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। संतुलित डाइट लें जिसमें प्रोटीन, हेल्दी फैट और कार्ब्स हों। 3. रोज कितना पानी पीना चाहिए? एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में 8-10 गिलास (लगभग 2-2.5 लीटर) पानी पीना चाहिए। गर्मी में या एक्सरसाइज करने पर ज्यादा पिएं। प्यास लगने पर ही पानी पिएं, जबरदस्ती नहीं। 4. क्या घी खाना सेहत के लिए अच्छा है? हां, घी (desi ghee) हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है। यह विटामिन A, D, E, K को अब्जॉर्ब करने में मदद करता है। लेकिन रोज 1-2 चम्मच से ज्यादा न खाएं, क्योंकि इसमें कैलोरी ज्यादा होती है। 5. क्या फल खाने से शुगर बढ़ती है? फलों में नेचुरल शुगर (फ्रुक्टोज) होती है, लेकिन साथ में फाइबर भी होता है, जो शुगर को धीरे-धीरे बढ़ने देता है। डायबिटीज के मरीज कम शुगर वाले फल (जैसे जामुन, सेब, नाशपाती) खा सकते हैं, लेकिन आम और केला सीमित मात्रा में। 6. क्या रात में दूध पीना चाहिए? हां, रात में गुनगुना दूध (हल्दी या जायफल के साथ) पीना नींद के लिए अच्छा है। लेकिन अगर आपको लैक्टोज इनटॉलरेंस है, तो बादाम दूध या सोया मिल्क लें। 7. क्या जंक फूड को पूरी तरह छोड़ देना चाहिए? जरूरी नहीं, लेकिन इसे "कभी-कभार" (once in a while) खाएं। हफ्ते में एक बार छोटी मात्रा में खा सकते हैं, लेकिन रोज की आदत न बनाएं। इससे क्रेविंग भी कंट्रोल रहेगी। 8. क्या शाकाहारी लोगों को प्रोटीन की कमी होती है? नहीं, अगर सही खाना खाएं। दालें, पनीर, टोफू, सोया, दही, और ड्राई फ्रूट्स प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। रोज अपनी डाइट में इन्हें शामिल करें। 9. क्या खाली पेट चाय पीना सही है? नहीं, खाली पेट चाय पीने से एसिडिटी और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। चाय हमेशा नाश्ते के बाद या दोपहर में पिएं। ग्रीन टी भी खाली पेट न पिएं। 10. क्या डिटॉक्स डाइट (जैसे जूस क्लींज) सेहत के लिए अच्छी है? नहीं, ज्यादातर डिटॉक्स डाइट साइंटिफिक नहीं हैं। शरीर खुद को डिटॉक्स करने में सक्षम है (लिवर और किडनी की मदद से)। सिर्फ साबुत अनाज, फल, सब्जियां और पानी पीना ही सबसे अच्छा डिटॉक्स है। चिकित्सा अस्वीकरण (Medical Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान, या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा एक योग्य डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (dietitian) से परामर्श लें। दवाओं या घरे

Dialysis ke baad pyas se tang: Koi natural remedy batao jo safe ho?

Yaar, aaj raat bahut takleef hui. Dialysis ke baad bhi pyas itni lagti hai ki jeena mushkil ho gaya. Doctor ne 1 liter se zyada paani nahi peene diya, lekin aaj toh gala suk gaya tha. Family walo ko bhi pareshan karta hoon - beta roz kehti hai, "Papa, thoda control karo." Lekin woh samajhte nahi, yeh pyas kaise hoti hai. Maine aaj thoda sa neebu ka ras paani mein mix kiya, lekin koi fark nahi pada. Kya koi aisa tarika hai ki pyas kam lage? Mera ek dost ne kaha tha ki ice cubes choosne se aaram milta hai, lekin doctor ne mana kar diya kyunki usme bhi paani hota hai. Family financially bhi thak gayi hai. Beta ne apni naukri chhod di dialysis ke expenses ke liye. Bahut bura lagta hai. Koi batao, pyas kaise control karein? Aur kya koi aisa natural remedy hai jo safe ho CKD stage 4 mein? Please help, bahut mushkil ho raha hai.

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