azitim 500 tablet allopathy (Azithromycin (500mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
azitim 500 tablet allopathy (Azithromycin (500mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by P R G Pharma Pvt Ltd. Contains Azithromycin (500mg).

Azitim 500 Tablet - Uses, Price, Side Effects

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Azithromycin (500mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 P R G Pharma Pvt Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 21, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is azitim 500 tablet used for?

Azitim 500 Tablet contains Azithromycin 500mg, a macrolide antibiotic used to treat various bacterial infections such as respiratory tract infections, skin infections, ear infections, and sexually transmitted diseases. It works by stopping the growth of bacteria. Take it as prescribed, usually once daily for 3 to 5 days.

  • Generic Name: Azithromycin (500mg)
  • Manufacturer: P R G Pharma Pvt Ltd
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 azitim 500 tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

azitim 500 tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Azithromycin (500mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The first generic medicine was introduced in India in 1970 after the Patents Act was amended.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Azithromycin (500mg)
Brand Nameazitim 500 tablet
ManufacturerP R G Pharma Pvt Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action ClassMacrolides
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take azitim 500 tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 azitim 500 tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of azitim 500 tablet?

  • Vomiting
  • Nausea
  • Abdominal pain
  • Diarrhea

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔬 Drug Interactions

⚠️ Drug Severity Effect
Warfarin Major Increased bleeding risk
Digoxin Moderate Increased digoxin levels
Antacids Moderate Reduced absorption of azithromycin

🛡️ Safety & Warnings

Liver
Low
Kidney
Low
Heart
Low

🛑 Myths vs. Facts about azitim 500 tablet

  • Myth: Generic substitutes of azitim 500 tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Azithromycin (500mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of azitim 500 tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Haddiyan kamzor? Ye 5 desi nuskhe calcium ki kami door karenge!

Namaste dosto. Aaj subah uthte hi gale aur kandhe mein jakad si mehsoos hui, hath bhi kuch der ke liye sunn ho gaye. Doctor ne kaha tha haddiyan kamzor ho rahi hain, calcium aur vitamin D ki kami hai. Maine suna hai haddi majboot karne ke liye diet mein kuch cheezein shamil karni chahiye jaise til, badam, hara dhaniya, aur haldi wala doodh. Par mujhe samajh nahi aata ki roz kitna lena chahiye? Aur kya homeopathy ke saath ye sab safe hai? Maine aaj subah ek glass doodh mein haldi aur shahad mila kar piya, thoda aaram mila. Par aap logon se poochna hai ki haddiyon ke liye sabse asardar desi nuskha kya hai? Aur kya yogurt (dahi) bhi faydemand hai? Please apne tajurbe share karein. Dhanyavad.

Complete Guide to Type 1 Diabetes - 06-06-2026

टाइप 1 डायबिटीज: एक संपूर्ण गाइड (कारण, लक्षण, इलाज और जीवनशैली) नमस्ते! यह गाइड आपको टाइप 1 डायबिटीज के बारे में हर छोटी-बड़ी जानकारी देगी। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही पैंक्रियाज (अग्न्याशय) के इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला कर देता है। इसका मतलब है कि शरीर खुद इंसुलिन नहीं बना पाता, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए जरूरी है। यह गाइड पूरी तरह से हिंग्लिश (हिंदी + इंग्लिश) में लिखी गई है ताकि भारतीय पाठकों को आसानी से समझ आए। 1. डीप इंट्रोडक्शन और डिजीज मैकेनिज्म (यह शरीर में कैसे और क्यों होता है?) टाइप 1 डायबिटीज (T1D) को पहले "जुवेनाइल डायबिटीज" या "इंसुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज मेलिटस" (IDDM) कहा जाता था। यह आमतौर पर बचपन या युवावस्था में शुरू होता है, लेकिन किसी भी उम्र में हो सकता है। शरीर के अंदर क्या होता है? पैंक्रियाज में बीटा कोशिकाएं: आपका पैंक्रियाज (पेट के पीछे स्थित एक ग्रंथि) में लाखों "आइलेट्स ऑफ लैंगरहैंस" होते हैं। इनमें बीटा कोशिकाएं इंसुलिन बनाती हैं। इंसुलिन का काम: इंसुलिन एक हार्मोन है जो ब्लड से ग्लूकोज (शुगर) को कोशिकाओं में ले जाता है। कोशिकाएं इस ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करती हैं। ऑटोइम्यून अटैक: टाइप 1 में, शरीर का इम्यून सिस्टम (जो आमतौर पर बैक्टीरिया और वायरस से लड़ता है) गलती से बीटा कोशिकाओं को "दुश्मन" समझ लेता है और उन्हें नष्ट करना शुरू कर देता है। इंसुलिन की कमी: जैसे-जैसे बीटा कोशिकाएं खत्म होती हैं, शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है। ब्लड शुगर बढ़ने लगता है क्योंकि ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता और खून में ही रह जाता है। यह क्यों होता है? (कारण) जेनेटिक कारण: कुछ जीन (जैसे HLA-DR3, HLA-DR4) इस बीमारी के खतरे को बढ़ाते हैं। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर जीन वाले व्यक्ति को यह बीमारी हो। एनवायरनमेंटल ट्रिगर: वायरल इंफेक्शन (जैसे कॉक्ससैकी वायरस, रूबेला), कुछ दवाएं, या तनाव इम्यून सिस्टम को गलत तरीके से एक्टिवेट कर सकते हैं। ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया: शरीर में एंटीबॉडीज (जैसे GAD65 एंटीबॉडी, आइलेट सेल एंटीबॉडी) बन जाती हैं जो बीटा कोशिकाओं पर हमला करती हैं। नोट: टाइप 1 डायबिटीज टाइप 2 से बिल्कुल अलग है। टाइप 2 में शरीर इंसुलिन बना तो लेता है लेकिन उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाता (इंसुलिन रेजिस्टेंस)। टाइप 1 में इंसुलिन बनना ही बंद हो जाता है। 2. कॉमन और रेयर लक्षण (Symptoms) टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण अचानक और गंभीर हो सकते हैं। यहां कॉमन और रेयर दोनों लक्षण दिए गए हैं: कॉमन लक्षण (जो ज्यादातर मरीजों में होते हैं) बार-बार पेशाब आना (Polyuria): किडनी अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए ज्यादा पानी खींचती है, जिससे बार-बार पेशाब आता है। बहुत ज्यादा प्यास लगना (Polydipsia): पेशाब के कारण पानी की कमी हो जाती है, जिससे लगातार प्यास लगती है। भूख बढ़ना (Polyphagia): शरीर कोशिकाओं में ग्लूकोज नहीं पहुंच पाता, इसलिए उसे लगता है कि उसे ऊर्जा की जरूरत है, जिससे भूख बढ़ जाती है। अचानक वजन कम होना: शरीर ऊर्जा के लिए मांसपेशियों और फैट को तोड़ने लगता है, जिससे वजन तेजी से घटता है। थकान और कमजोरी: कोशिकाओं को ऊर्जा नहीं मिलती, इसलिए हर समय थकान महसूस होती है। धुंधला दिखना (Blurry Vision): हाई ब्लड शुगर आंखों के लेंस में तरल पदार्थ को प्रभावित करता है, जिससे नजर धुंधली हो जाती है। कम कॉमन लक्षण (जो शुरुआत में या गंभीर मामलों में दिखते हैं) पैरों में जलन या झनझनाहट (Peripheral Neuropathy): हाई शुगर नसों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे पैरों या हाथों में सुन्नता, जलन या झनझनाहट होती है। बार-बार इंफेक्शन: त्वचा, मसूड़ों, या यूरिनरी ट्रैक्ट में बार-बार इंफेक्शन होना। खासकर फंगल इंफेक्शन (जैसे खुजली, सफेद पानी) आम है। धीरे-धीरे घाव भरना: हाई शुगर ब्लड सर्कुलेशन को खराब करता है, जिससे छोटे कट या घाव भी देर से भरते हैं। स्किन में डार्क पैच (Acanthosis Nigricans): गर्दन, बगल या जांघों के बीच काले, मोटे पैच। यह टाइप 2 में ज्यादा आम है, लेकिन टाइप 1 में भी हो सकता है। डायबिटिक केटोएसिडोसिस (DKA): यह एक जानलेवा स्थिति है। जब शरीर में इंसुलिन बिल्कुल नहीं होता, तो शरीर फैट को तोड़कर "कीटोन्स" बनाता है। इससे खून अम्लीय हो जाता है। लक्षण: मतली, उल्टी, पेट दर्द, फल जैसी सांस, गहरी और तेज सांस लेना (Kussmaul breathing), और बेहोशी। 3. डिटेल्ड डाइट प्लान (क्या खाएं, क्या न खाएं - भारतीय खाना) टाइप 1 डायबिटीज में डाइट का मतलब "खाना न खाना" नहीं है, बल्कि "सही खाना" है। इंसुलिन लेने के बाद आपको कार्बोहाइड्रेट्स को गिनना (Carb Counting) सीखना होगा। यहां भारतीय खाने के हिसाब से डिटेल्ड गाइड है: क्या खाएं (Foods to Eat) साबुत अनाज (Whole Grains): ब्राउन राइस, जई (Oats), क्विनोआ, बाजरा, रागी (Nachni), ज्वार। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। दालें और फलियां (Legumes): मूंग दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, मसूर दाल। प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, बथुआ, सरसों का साग। कैलोरी कम, पोषक तत्व ज्यादा। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली सब्जियां: करेला, लौकी, तुरई, परवल, भिंडी, फूलगोभी, ब्रोकली। प्रोटीन के स्रोत: चिकन (बिना त्वचा), मछली (विशेषकर मैकेरल/सार्डिन), अंडे, पनीर, टोफू। प्रोटीन शुगर को स्थिर रखता है। हेल्दी फैट: नारियल तेल, जैतून का तेल, घी (सीमित मात्रा में), बादाम, अखरोट, अलसी के बीज (Flax seeds)। फल (सीमित मात्रा में): सेब, नाशपाती, जामुन, अमरूद, संतरा, पपीता। केला और आम को सीमित करें या इंसुलिन के साथ लें। दूध और दही: बिना मीठा दही, छाछ। दूध में लैक्टोज होता है, इसलिए इसे कार्ब के रूप में गिनें। क्या न खाएं (Foods to Avoid) रिफाइंड कार्ब्स: सफेद चावल, मैदा (रोटी, नान, ब्रेड, पास्ता), सफेद आटा। मीठी चीजें: मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी, रसगुल्ला), कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, आइसक्रीम, चॉकलेट, केक। फ्राइड फूड: समोसा, पकौड़े, भजिया, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज। ये ट्रांस फैट और कैलोरी से भरे होते हैं। स्टार्च वाली सब्जियां (सीमित करें): आलू, शकरकंद, अरबी (Colocasia), कद्दू। चीनी से भरे नाश्ते: कॉर्नफ्लेक्स, मूसली (अगर मीठा हो), पैकेज्ड स्नैक्स। शराब: अल्कोहल ब्लड शुगर को अचानक गिरा सकता है (हाइपोग्लाइसीमिया) और लिवर को प्रभावित करता है। नमूना इंडियन डाइट प्लान (एक दिन का) नाश्ता (8:00 AM): 1 कटोरी ओट्स उपमा (सब्जियों के साथ) + 1 कप बिना मीठा दूध या 2 रागी डोसा + नारियल चटनी। मिड-मॉर्निंग स्नैक (11:00 AM): 1 सेब या 1 मुट्ठी बादाम। दोपहर का खाना (1:30 PM): 2 मल्टीग्रेन रोटी + 1 कटोरी मूंग दाल + हरी सब्जी (जैसे लौकी) + 1 कटोरी दही। शाम का स्नैक (4:30 PM): 1 कप भुने हुए चने या 1 कप ग्रीन टी + 2 मारी बिस्कुट (बिना मीठा)। रात का खाना (7:30 PM): 1 कटोरी ब्राउन राइस + 1 कटोरी पालक पनीर + 1 कटोरी सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर)। सोने से पहले (10:00 PM): 1 गिलास गुनगुना दूध (बिना चीनी) या 1 कप दही। टिप: हर भोजन से पहले और बाद में ब्लड शुगर चेक करें। इंसुलिन की डोज को कार्ब के हिसाब से एडजस्ट करें। 4. मेडिकल मैनेजमेंट (दवाएं और इंसुलिन) टाइप 1 डायबिटीज का कोई मौखिक इलाज नहीं है। केवल इंसुलिन ही मुख्य उपचार है। यहां विस्तार से बताया गया है: इंसुलिन के प्रकार रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन (Rapid-acting): जैसे लिसप्रो (Humalog), एस्पार्ट (NovoRapid), ग्लुलिसिन (Apidra)। यह 10-15 मिनट में काम करना शुरू करता है और 1-2 घंटे में पीक पर होता है। इसे खाने से ठीक पहले लिया जाता है। शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन (Short-acting): जैसे रेगुलर इंसुलिन (Humulin R, Novolin R)। यह 30 मिनट में काम करना शुरू करता है और 2-4 घंटे में पीक पर होता है। इसे खाने से 30 मिनट पहले लेना चाहिए। इंटरमीडिएट-एक्टिंग इंसुलिन (Intermediate-acting): जैसे एनपीएच (Humulin N, Novolin N)। यह 2-4 घंटे में काम करना शुरू करता है और 4-8 घंटे में पीक पर होता है। यह बेसल (बैकग्राउंड) इंसुलिन के रूप में काम करता है। लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन (Long-acting): जैसे ग्लार्गिन (Lantus), डिटेमिर (Levemir), डेग्लुडेक (Tresiba)। यह 24 घंटे तक धीरे-धीरे काम करता है और इसमें कोई पीक नहीं होता। इसे दिन में एक बार लिया जाता है। इंसुलिन लेने के तरीके इंसुलिन पेन: सबसे आम तरीका। पेन में इंसुलिन का कार्ट्रिज होता है और आप डायल करके डोज सेट करते हैं। इंसुलिन सिरिंज: शीशी से इंसुलिन खींचकर इंजेक्शन लगाना। सस्ता लेकिन सही डोज नापना जरूरी है। इंसुलिन पंप: एक छोटा डिवाइस जो लगातार इंसुलिन देता है। इसे पेट पर लगाया जाता है। यह बेसल और बोलस (खाने के समय) दोनों इंसुलिन देता है। इनहेल्ड इंसुलिन (Afrezza): फेफड़ों के जरिए लिया जाने वाला रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन। भारत में कम आम है। ब्लड शुगर मॉनिटरिंग ग्लूकोमीटर: उंगली में चुभाकर ब्लड शुगर चेक करना। दिन में 4-8 बार जरूरी है। कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटर (CGM): जैसे डेक्सकॉम, फ्रीस्टाइल लिब्रे। यह त्वचा के नीचे एक सेंसर लगाकर हर 5 मिनट में शुगर दिखाता है। अन्य दवाएं (कभी-कभी) प्रामलिनटाइड (Symlin): एक सिंथेटिक हार्मोन जो खाने के बाद शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसे इंसुलिन के साथ लिया जाता है। एस्पिरिन: दिल के दौरे के खतरे को कम करने के लिए (डॉक्टर की सलाह पर)। महत्वपूर्ण: कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के इंसुलिन या दवाएं बंद न करें। इंसुलिन की डोज को मिस करने से DKA हो सकता है। 5. प्रूवन होम रेमेडीज और लाइफस्टाइल चेंजेस ये उपाय इंसुलिन की जगह नहीं ले सकते, लेकिन ब्लड शुगर को स्थिर रखने और कॉम्प्लीकेशन को कम करने में मदद करते हैं: प्रूवन होम रेमेडीज करेला (Bitter Gourd): इसमें "चारैंटिन" नाम का तत्व होता है जो ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है। रोज सुबह खाली पेट करेले का जूस (1/4 कप) पिएं। मेथी दाना (Fenugreek Seeds): मेथी में घुलनशील फाइबर होता है जो शुगर के अवशोषण को धीमा करता है। रात भर 1 चम्मच मेथी दाना पानी में भिगोकर सुबह खाएं या मेथी दाना पाउडर गुनगुने पानी के साथ लें। दालचीनी (Cinnamon): यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाने में मदद कर सकता है। 1/2 चम्मच दालचीनी पाउडर को गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर पिएं। आंवला (Indian Gooseberry): विटामिन सी से भरपूर, यह पैंक्रियाज की कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद करता है। रोज 1 आंवला खाएं या आंवला जूस पिएं। ग्रीन टी: इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में मदद करते हैं। दिन में 2-3 कप बिना चीनी की ग्रीन टी लें। एलोवेरा जूस: एलोवेरा में मौजूद यौगिक ब्लड शुगर को कम कर सकते हैं। 1/4 कप एलोवेरा जूस रोज लें (बिना चीनी)। लाइफस्टाइल चेंजेस एक्सरसाइज: रोज 30-45 मिनट की शारीरिक गतिविधि जरूरी है। जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना, योग, तैराकी। एक्सरसाइज इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाती है। लेकिन हाइपोग्लाइसीमिया से बचने के लिए एक्सरसाइज से पहले और बाद में शुगर चेक करें और स्नैक लें। स्ट्रेस मैनेजमेंट: तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है जो ब्लड शुगर को ऊपर ले जाता है। ध्यान (Meditation), गहरी सांस लेना, संगीत सुनना, या हॉबी अपनाएं। नींद: 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। हाइड्रेशन: दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। पानी किडनी के जरिए अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने में मदद करता है। फुट केयर: रोज अपने पैरों की जांच करें (कट, छाले, लालिमा)। मुलायम तौलिए से पैर सुखाएं और मॉइश्चराइजर लगाएं। ढीले-ढाले मोजे और जूते पहनें। 6. मेंटल हेल्थ और डेली लाइफ पर इम्पैक्ट टाइप 1 डायबिटीज सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक चुनौती भी है। यहां इसका प्रभाव और समाधान दिए गए हैं: मेंटल हेल्थ पर प्रभाव डायबिटीज बर्नआउट: लगातार ब्लड शुगर चेक करना, इंसुलिन लेना, डाइट का ध्यान रखना थकान और निराशा पैदा कर सकता है। मरीज कभी-कभी इलाज छोड़ देना चाहते हैं। डिप्रेशन और एंग्जाइटी: डायबिटीज के मरीजों में डिप्रेशन का खतरा 2-3 गुना ज्यादा होता है। हाइपोग्लाइसीमिया (लो शुगर) का डर हमेशा बना रहता है, जिससे एंग्जाइटी होती है। सोशल आइसोलेशन: पार्टियों में खाने-पीने से परहेज, या इंसुलिन लेने के लिए अलग जाना, दोस्तों और परिवार से दूरी बना सकता है। ईटिंग डिसऑर्डर: कुछ मरीज वजन कंट्रोल करने के लिए जानबूझकर इंसुलिन कम लेते हैं (Diabulimia), जो बेहद खतरनाक है। डेली लाइफ पर प्रभाव स्कूल/ऑफिस: बच्चों को स्कूल में इंसुलिन लेने और शुगर चेक करने के लिए समय चाहिए। ऑफिस में भी ब्रेक लेना पड़ता है। ड्राइविंग: हाइपोग्लाइसीमिया के कारण ड्राइविंग के दौरान बेहोशी आ सकती है। इसलिए ड्राइविंग से पहले शुगर चेक करना जरूरी है। यात्रा: सफर के दौरान इंसुलिन को सही तापमान पर रखना, और हाइपोग्लाइसीमिया के लिए स्नैक्स साथ रखना जरूरी है। समाधान सपोर्ट ग्रुप: डायबिटीज से जुड़े ऑनलाइन या ऑफलाइन ग्रुप से जुड़ें। दूसरों के अनुभव सुनकर हिम्मत मिलती है। काउंसलिंग: मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से बात करें। CBT (कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी) बहुत मददगार है। परिवार को शामिल करें: परिवार के सदस्यों को डायबिटीज के बारे में सिखाएं ताकि वे आपकी मदद कर सकें और आपको अकेला न समझें। रूटीन बनाएं: खाने, इंसुलिन, एक्सरसाइज और नींद का एक फिक्स शेड्यूल बनाएं। इससे मानसिक तनाव कम होता है। 7. 10 डिटेल्ड FAQs (लॉन्ग-टेल सर्च क्वेरीज)

PCOD ka chakkar hai bhai, mood swings ne pagal kar diya 😤 Koi asli desi nuskha batao yaar!

Okay yaar, I seriously need to vent. It’s that time of the month and my PCOD mood swings are on another level. Like, today I literally cried because my chai wala bhaiya put less sugar in my cutting chai. Felt like the world was ending. Then 10 mins later I was laughing at a stupid reel. My colleagues must think I’m bipolar or something. Does anyone else get this extreme irritability before periods? I’m normally a chill person, but the week before, I feel like Hulk ka cousin. I snap at my mom on call, then feel guilty and cry again. Hostel life doesn’t help—can’t control diet, sab mess ka oily khana hai. I tried having more protein and less caffeine this month, but still felt like a volcano. Any home remedies or mindset tricks that actually work? I’m open to anything, even weird desi nuskhe. Please tell me I’m not alone in this emotional rollercoaster. 🫠

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