azelick 250mg tablet - Uses, Price and Side Effects

azelick 250mg tablet: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

No reviews yet
Azithromycin (250mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Duken Pharmaceuticals 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 17, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is azelick 250mg tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
azelick 250mg tablet (manufactured by Duken Pharmaceuticals) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of anti infectives. It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of azelick 250mg tablet uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains Azithromycin (250mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 azelick 250mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

azelick 250mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से anti infectives और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Azithromycin (250mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? India has the highest number of USFDA-compliant plants outside the USA.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Azithromycin (250mg)
Manufacturer / BrandDuken Pharmaceuticals
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassANTI INFECTIVES
Action ClassMacrolides
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 azelick 250mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take azelick 250mg tablet (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Follow the prescription: Always use azelick 250mg tablet exactly as prescribed by your healthcare provider. Do not alter the dosage yourself.
  • Check Expiry: Never consume expired medicines. Always double-check the manufacturing and expiry date on the packaging before use.
  • Storage: Store the medicine in a cool, dry place away from direct sunlight and out of reach of children.
  • Report Side Effects: If you experience severe allergic reactions, swelling, or breathing issues after taking azelick 250mg tablet, seek emergency medical help immediately.
  • Don't self-medicate: Do not share this medicine with others even if their symptoms seem similar to yours.

⚠️ azelick 250mg tablet Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Vomiting
  • Nausea
  • Abdominal pain
  • Diarrhea

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about azelick 250mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of azelick 250mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Azithromycin (250mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of azelick 250mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

💬 Real Patient Experiences (Astitva)

Join Community

Read real stories and discussions from our patient community regarding similar health conditions.

GhuTno ke dard ka ilaaj: sarson tel lahsun ka jhol ya sahi doctor?

Mere ghuTno me bahut dard rehta hai. Aaj subah bahu ne kaha ki kya fayda doctor ke paas jaa ke, bas sarson tel aur lahsun garam karke malish karo. Maine try kiya. Thoda aaram to mila par raat ko phir se dard shuru ho gaya. Kya kisi aur ne bhi ye remedy try kiya hai? Kya ye sach me kaam karta hai ya bas timepass hai? Main to sochti hoon doctor se injection lagwana chahiye par bahu kehte hain "amma aap bore kar rahi ho". Ab kya karu? Zameen par nahi baith sakti, western toilet bhi zaruri hai. Is umar me koi sunne wala nahi.

Complete Guide to Type 2 Diabetes - 04-06-2026

टाइप 2 डायबिटीज: एक संपूर्ण और विस्तृत गाइड (Type 2 Diabetes: The Ultimate Guide) नमस्ते! अगर आप या आपके परिवार में किसी को टाइप 2 डायबिटीज है, तो यह गाइड आपके लिए ही है। यह सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल कंडीशन है जिसे सही जानकारी और देखभाल से पूरी तरह मैनेज किया जा सकता है। आइए, इसे गहराई से समझते हैं। 1. डीप इंट्रोडक्शन और डिजीज मैकेनिज्म (बॉडी के अंदर क्या होता है?) टाइप 2 डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जहाँ आपका शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं। शुरुआत में पैंक्रियाज (अग्न्याशय) ज्यादा इंसुलिन बनाकर इसकी भरपाई करता है, लेकिन समय के साथ वह थक जाता है और इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है। कैसे होती है यह प्रक्रिया? खाना पचने के बाद: जब आप कार्बोहाइड्रेट (चावल, रोटी, मीठा) खाते हैं, तो यह ग्लूकोज (शुगर) में बदल जाता है और खून में मिल जाता है। इंसुलिन का काम: पैंक्रियाज से निकलने वाला इंसुलिन एक "चाबी" की तरह होता है जो कोशिकाओं के दरवाजे खोलता है ताकि ग्लूकोज अंदर जा सके और एनर्जी बन सके। टाइप 2 में समस्या: कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति "बहरी" हो जाती हैं (इंसुलिन रेजिस्टेंस)। ग्लूकोज अंदर नहीं जा पाता और खून में जमा होता रहता है। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। लंबी अवधि में: पैंक्रियाज अधिक इंसुलिन बनाने की कोशिश करता है, लेकिन अंततः उसकी बीटा कोशिकाएं खराब हो जाती हैं, जिससे इंसुलिन की कमी हो जाती है। जेनेटिक्स और मोटापा इसके मुख्य कारण हैं। खासकर पेट के आसपास की चर्बी (विसरल फैट) इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Symptoms) टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे आते हैं, इसलिए कई लोगों को पता ही नहीं चलता। आइए, इन्हें समझते हैं: सामान्य लक्षण (Common): बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खासकर रात में। किडनी अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए ज्यादा पानी खींचती है। अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia): बार-बार पेशाब के कारण शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है। भूख ज्यादा लगना (Polyphagia): ग्लूकोज कोशिकाओं तक नहीं पहुँच पाता, इसलिए शरीर को लगता है कि उसे एनर्जी की जरूरत है। अचानक वजन कम होना: बिना किसी डाइट के वजन कम होना, क्योंकि शरीर फैट और मसल को तोड़कर एनर्जी लेता है। थकान और कमजोरी: कोशिकाओं में ग्लूकोज नहीं पहुँचने के कारण। धुंधला दिखना (Blurry Vision): हाई ब्लड शुगर आंखों के लेंस में सूजन पैदा करता है। घाव का धीरे भरना: हाई शुगर ब्लड सर्कुलेशन और इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है। बार-बार इंफेक्शन: स्किन, यूरिनरी ट्रैक्ट, या फंगल इंफेक्शन (जैसे खुजली) आम हैं। दुर्लभ लक्षण (Rare): पैरों में जलन या सुन्नता (Peripheral Neuropathy): "पैर में जलन" या "सुई चुभने" जैसा महसूस होना। यह नसों को नुकसान का संकेत है। त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans): गर्दन, बगल, या जांघों के बीच की त्वचा मोटी और काली हो जाती है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। यौन समस्याएं: पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन, महिलाओं में योनि का सूखापन। हाथ-पैर में झुनझुनी: नसों में खिंचाव के कारण। बार-बार मसूड़ों में इंफेक्शन: या दांतों का ढीला होना। ध्यान दें: अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और HbA1c या फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट कराएं। 3. विस्तृत डाइट प्लान (क्या खाएं और क्या न खाएं) डायबिटीज में डाइट ही सबसे बड़ी दवा है। सही खाना खाकर आप ब्लड शुगर को कंट्रोल कर सकते हैं। यहाँ भारतीय खाने पर फोकस किया गया है। क्या खाएं (Eat This): साबुत अनाज (Whole Grains): ब्राउन राइस, ओट्स, ज्वार, बाजरा, रागी (मडुआ), और साबुत गेहूं की रोटी। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। दालें और फलियां: मूंग दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, और मसूर। प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, बथुआ, केल, और ब्रोकोली। कैलोरी में कम और पोषक तत्वों में भरपूर। लो-ग्लाइसेमिक फल: जामुन, सेब, नाशपाती, संतरा, पपीता, और अमरूद। केला और अंगूर सीमित मात्रा में। हेल्दी फैट: बादाम, अखरोट, अलसी के बीज, चिया सीड्स, और जैतून का तेल। ये इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाते हैं। प्रोटीन: अंडे, चिकन (बिना त्वचा), मछली (सैल्मन, टूना), पनीर, और टोफू। डेयरी: दही (बिना मीठा), छाछ, और कम फैट वाला दूध। मसाले: हल्दी, दालचीनी, मेथी दाना, और अदरक। ये ब्लड शुगर कम करने में मदद करते हैं। क्या न खाएं (Avoid This): रिफाइंड कार्ब्स: सफेद चावल, मैदा (नान, पराठा, ब्रेड), और सफेद पास्ता। ये शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। मीठा और शुगर: मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी), कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, आइसक्रीम, और चॉकलेट। फ्राइड फूड: समोसा, पकौड़ा, चिप्स, और भुजिया। ये ट्रांस फैट से भरे होते हैं। प्रोसेस्ड फूड: बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, और इंस्टेंट नूडल्स। हाई-ग्लाइसेमिक फल: तरबूज, खरबूजा, और आम (सीमित मात्रा में ले सकते हैं)। शराब: खासकर बीयर और मीठी वाइन। शराब से ब्लड शुगर अचानक गिर या बढ़ सकता है। डाइट टिप्स: छोटे-छोटे भोजन करें: दिन में 3 मुख्य भोजन और 2 स्नैक्स (जैसे मुट्ठी भर बादाम या फल)। फाइबर बढ़ाएं: हर भोजन में सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर) शामिल करें। पानी पिएं: दिन में 8-10 गिलास पानी। चाय या कॉफी बिना चीनी के। खाने का ऑर्डर: पहले सब्जी, फिर प्रोटीन, और अंत में कार्ब्स खाएं। इससे शुगर कंट्रोल रहता है। 4. मेडिकल मैनेजमेंट (दवाएं और उनका काम) नोट: यह केवल शैक्षिक जानकारी है। कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में कई तरह की दवाएं इस्तेमाल होती हैं। इनका मकसद ब्लड शुगर को कंट्रोल करना और जटिलताओं को रोकना है। मुख्य दवाएं: मेटफॉर्मिन (Metformin): यह पहली पसंद है। यह लिवर से ग्लूकोज उत्पादन कम करता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है। साइड इफेक्ट्स में पेट खराब हो सकता है, इसलिए खाने के साथ लें। सल्फोनिलयूरिया (Sulfonylureas) - जैसे ग्लिमेपिराइड: ये पैंक्रियाज से इंसुलिन रिलीज बढ़ाते हैं। हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) का खतरा रहता है। DPP-4 इनहिबिटर (जैसे सीटाग्लिप्टिन): ये इंसुलिन रिलीज बढ़ाते हैं और ग्लूकागन (शुगर बढ़ाने वाला हार्मोन) कम करते हैं। SGLT2 इनहिबिटर (जैसे डैपाग्लिफ्लोजिन): ये किडनी के जरिए यूरिन में शुगर बाहर निकालते हैं। वजन कम करने और हार्ट प्रोटेक्शन में मददगार। GLP-1 एगोनिस्ट (जैसे सेमाग्लूटाइड): ये इंजेक्शन होते हैं और इंसुलिन रिलीज बढ़ाते हैं, भूख कम करते हैं, और वजन घटाने में मदद करते हैं। इंसुलिन थेरेपी: अगर मौखिक दवाएं काम न करें, तो इंसुलिन (लंबी या तेज असर वाली) दी जाती है। दवाओं के साथ सावधानियां: नियमित रूप से ब्लड शुगर चेक करें। हाइपोग्लाइसीमिया (कमजोरी, पसीना, चक्कर) के लक्षण पहचानें और तुरंत ग्लूकोज लें। किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट नियमित कराएं। 5. घरेलू उपाय और लाइफस्टाइल में बदलाव (Proven Home Remedies) दवाओं के साथ-साथ ये प्राकृतिक उपाय ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं: प्रभावी घरेलू उपाय: मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट चबाएं या पानी पिएं। फाइबर शुगर अब्जॉर्प्शन को धीमा करता है। दालचीनी (Cinnamon): रोजाना 1-2 ग्राम दालचीनी पाउडर गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर लें। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाती है। करेला (Bitter Gourd): करेले का जूस या सब्जी खाएं। इसमें पॉलीपेप्टाइड-p होता है जो इंसुलिन की तरह काम करता है। आंवला (Indian Gooseberry): विटामिन C से भरपूर, यह पैंक्रियाज को रिपेयर करता है। आंवला पाउडर या जूस लें। जामुन (Black Plum): जामुन के बीज का पाउडर पानी के साथ लें। यह शुगर को तोड़ने में मदद करता है। हल्दी (Turmeric): करक्यूमिन इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करता है। हल्दी वाला दूध (बिना चीनी) पिएं। एलोवेरा जूस: रोजाना 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जूस (बिना मीठा) लें। यह ब्लड शुगर कम करता है। लाइफस्टाइल में बदलाव: रोजाना व्यायाम: 30-45 मिनट तेज चलना, योग, या साइकिलिंग। मसल्स बनाने के लिए वेट ट्रेनिंग भी करें। वजन कम करें: सिर्फ 5-10% वजन कम करने से ब्लड शुगर काफी कम हो सकता है। नींद पूरी करें: 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। स्ट्रेस मैनेजमेंट: ध्यान (मेडिटेशन), गहरी सांस लेना, या संगीत सुनना। स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल शुगर बढ़ाता है। धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये ब्लड शुगर और जटिलताओं को बढ़ाते हैं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव डायबिटीज सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक बीमारी भी है। इसका सीधा असर आपके मूड और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: डायबिटीज डिस्ट्रेस: ब्लड शुगर चेक करने, दवाएं लेने, और डाइट फॉलो करने का दबाव। डिप्रेशन और चिंता: डायबिटीज के मरीजों में डिप्रेशन का खतरा 2-3 गुना ज्यादा होता है। "मैं कभी ठीक नहीं हो सकता" जैसे विचार आना। हाइपोग्लाइसीमिया का डर: लो ब्लड शुगर के कारण बेहोशी या कमजोरी का डर। सामाजिक अलगाव: पार्टियों में खाने-पीने से परहेज करने पर दोस्तों से दूरी। दैनिक जीवन पर प्रभाव: खाने की योजना: हर भोजन के बारे में सोचना पड़ता है। बाहर खाने पर परेशानी। थकान: हाई या लो शुगर से एनर्जी की कमी, जिससे काम या पढ़ाई प्रभावित होती है। नींद में खलल: रात में बार-बार पेशाब आना या शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव। वित्तीय बोझ: दवाओं, टेस्ट स्ट्रिप्स, और डॉक्टर विजिट का खर्च। कैसे संभालें: परिवार और दोस्तों से बात करें। सपोर्ट ग्रुप जॉइन करें (ऑनलाइन या ऑफलाइन)। मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलर या थेरेपिस्ट से मिलें। छोटी-छोटी जीत का जश्न मनाएं (जैसे, एक दिन शुगर कंट्रोल रहना)। 7. 10 विस्तृत FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) 1. क्या टाइप 2 डायबिटीज पूरी तरह ठीक हो सकता है? हाँ, इसे रिवर्स किया जा सकता है, खासकर शुरुआती चरणों में। वजन कम करने, डाइट बदलने, और एक्सरसाइज से ब्लड शुगर नॉर्मल हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बीमारी खत्म हो गई; आपको सावधान रहना होगा। 2. क्या मैं डायबिटीज में चावल खा सकता हूँ? हाँ, लेकिन ब्राउन राइस या बासमती चावल सीमित मात्रा में (एक कटोरी) खाएं। सफेद चावल से बचें। इसे दाल और सब्जी के साथ खाएं ताकि शुगर धीरे-धीरे बढ़े। 3. डायबिटीज में कौन से फल नहीं खाने चाहिए? आम, तरबूज, खरबूजा, और अंगूर में शुगर ज्यादा होती है। इन्हें सीमित मात्रा में खाएं। सेब, नाशपाती, और जामुन सुरक्षित हैं। 4. क्या डायबिटीज से पैरों में जलन ठीक हो सकती है? हाँ, ब्लड शुगर कंट्रोल करने से नसों की क्षति धीमी होती है। डॉक्टर न्यूरोपैथी के लिए दवाएं (जैसे गैबापेंटिन) दे सकते हैं। पैरों की मालिश और गुनगुने पानी से सिकाई करें। 5. क्या गर्भावस्था में टाइप 2 डायबिटीज खतरनाक है? हाँ, इसे गर्भकालीन डायबिटीज कहते हैं। इससे बच्चे का वजन बढ़ सकता है या प्री-एक्लेमप्सिया का खतरा होता है। डॉक्टर की निगरानी में डाइट और इंसुलिन जरूरी है। 6. क्या डायबिटीज में शहद खा सकते हैं? शहद में भी शुगर होती है और यह ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। बहुत कम मात्रा में (एक चम्मच) ले सकते हैं, लेकिन बेहतर है कि इससे बचें। 7. क्या डायबिटीज से किडनी खराब हो सकती है? हाँ, अनियंत्रित डायबिटीज डायबिटिक नेफ्रोपैथी का कारण बन सकती है। इसलिए नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट (क्रिएटिनिन, यूरिन एल्ब्यूमिन) कराएं। 8. क्या डायबिटीज में एक्सरसाइज से शुगर कम होता है? हाँ, एक्सरसाइज से मसल्स ग्लूकोज का उपयोग करती हैं, जिससे ब्लड शुगर कम होता है। लेकिन हाइपोग्लाइसीमिया से बचने के लिए एक्सरसाइज से पहले शुगर चेक करें और स्नैक लें। 9. क्या डायबिटीज में ड्राई फ्रूट्स खा सकते हैं? हाँ, बादाम, अखरोट, और पिस्ता अच्छे हैं। लेकिन किशमिश और खजूर में शुगर ज्यादा होती है, इन्हें सीमित मात्रा में लें। 10. क्या डायबिटीज से आंखों की रोशनी जा सकती है? हाँ, डायबिटिक रेटिनोपैथी से अंधापन हो सकता है। इसलिए साल में एक बार आंखों की जांच (डाइलेटेड आई एग्जाम) कराएं। ब्लड शुगर कंट्रोल रखने से यह रोका जा सकता है। मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी चिकित्सा सलाह, निदान, या उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श किए बिना कोई भी दवा, डाइट, या व्यायाम शुरू न करें। टाइप 2 डायबिटीज एक गंभीर स्थिति है, और इसका प्रबंधन चिकित्सकीय देखरेख में ही किया जाना चाहिए। अंतिम शब्द: टाइप 2 डायबिटीज को मैनेज करना एक यात्रा है, मंजिल नहीं। छोटे-छोटे बदलावों से बड़ी सफलता मिलती है। अपने शरीर को समझें, डॉक्टर से नियमित संपर्क रखें, और खुद को प्रेरित रखें। आप अकेले नहीं हैं!

Dil ka patient hoon, walking ya running? Confusion ho gayi!

Yaar, post-heart attack life mein ek naya confusion aa gaya hai. Mera doctor ne kaha walking is best, low impact, steady raho. Lekin maine ek friend se suna jo marathon runner hai, usne bola running se heart stronger hota hai. Ab main confuse hoon. Mera haal hi mein angioplasty hua tha, 3 months pehle. Ab dheere dheere walking shuru ki hai, 20-25 minutes daily. Lekin kabhi kabhi lagta hai ki thoda aur push karu toh better hoga. Par phir darr lagta hai ki kahin over-exert na ho jau. Koi hai jo experienced ho? Walking vs running - kaunsa zyada safe hai for heart patients like me? Main soch raha hoon ki walking mein hi rahu, lekin kya usse enough benefit milega? Running ka temptation hai but anxiety bhi hai. Please share your thoughts or experiences.

Browse SaathiMed's Medicines A-Z

Search our extensive medical database alphabetically to find uses, price, composition, and side effects.

A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z
Back to Medicines Directory
SaathiMed App
SaathiMed App Consult doctors & order medicines faster
Install