arpicin 10mg tablet allopathy (Aripiprazole (10mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
arpicin 10mg tablet allopathy (Aripiprazole (10mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Cinerea Biotech Pvt Ltd. Contains Aripiprazole (10mg).

arpicin 10mg tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Aripiprazole (10mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Cinerea Biotech Pvt Ltd 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 20, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is arpicin 10mg tablet used for?

arpicin 10mg tablet is primarily used for the treatment of NEURO CNS. It contains Aripiprazole (10mg) which works effectively. Always consult your doctor before using this medication.

  • Generic Name: Aripiprazole (10mg)
  • Manufacturer: Cinerea Biotech Pvt Ltd
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 arpicin 10mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

arpicin 10mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से neuro cns और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Aripiprazole (10mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? India has the highest number of USFDA-compliant plants outside the USA.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Aripiprazole (10mg)
Brand Namearpicin 10mg tablet
ManufacturerCinerea Biotech Pvt Ltd
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassNEURO CNS
Action ClassAtypical Antipsychotics
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take arpicin 10mg tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 arpicin 10mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of arpicin 10mg tablet?

  • Akathisia (inability to stay still)
  • Anxiety
  • Blurred vision
  • Constipation
  • Dizziness
  • Fatigue
  • Headache
  • Increased saliva production
  • Indigestion
  • Insomnia (difficulty in sleeping)
  • Nausea
  • Parkinsonism
  • Restlessness
  • Sleepiness
  • Tremors
  • Vomiting

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

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Medical Note: Always consult your doctor before switching medications. Generic alternatives with same salts are therapeutically equivalent.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about arpicin 10mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of arpicin 10mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Aripiprazole (10mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of arpicin 10mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Gestational Diabetes - 29-05-2026

गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes) की संपूर्ण गाइड: कारण, लक्षण, आहार और प्रबंधन गर्भावस्था (Pregnancy) हर महिला के जीवन का एक खास और संवेदनशील समय होता है। इस दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। कुछ महिलाओं में ये बदलाव ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित करते हैं, जिसे गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes Mellitus - GDM) कहा जाता है। यह एक अस्थायी स्थिति है, लेकिन अगर इसे सही तरीके से मैनेज न किया जाए, तो यह माँ और बच्चे दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। यह गाइड आपको GDM के हर पहलू के बारे में विस्तार से बताएगी - कैसे यह होता है, इसके लक्षण, क्या खाएं और क्या न खाएं, दवाइयां, घरेलू उपाय और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव। इसे पढ़ने के बाद आप अपनी सेहत को बेहतर तरीके से समझ पाएंगी। 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) गर्भकालीन मधुमेह क्या है? गर्भकालीन मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जहां गर्भावस्था के दौरान (आमतौर पर 24वें से 28वें सप्ताह के बीच) ब्लड शुगर लेवल सामान्य से अधिक हो जाता है। यह टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज से अलग है क्योंकि यह केवल गर्भावस्था में होता है और बच्चे के जन्म के बाद अक्सर ठीक हो जाता है। हालांकि, इससे भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। शरीर के अंदर क्या होता है? (Mechanism) प्लेसेंटा (Placenta) की भूमिका: गर्भावस्था में प्लेसेंटा बच्चे को पोषण देने के लिए हार्मोन (जैसे ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजन, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन) बनाता है। ये हार्मोन इंसुलिन के काम करने में बाधा डालते हैं, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) कहते हैं। इंसुलिन का काम: सामान्यतः इंसुलिन ब्लड शुगर को कोशिकाओं में भेजता है। लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण, शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं देतीं। पैनक्रियाज (Pancreas) की प्रतिक्रिया: इसकी भरपाई के लिए पैनक्रियाज अधिक इंसुलिन बनाता है। कई महिलाओं का शरीर इस अतिरिक्त इंसुलिन को बना पाता है, लेकिन कुछ में ऐसा नहीं होता, जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाता है। बच्चे पर प्रभाव: बढ़ा हुआ ब्लड शुगर प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक पहुंचता है। बच्चे का पैनक्रियाज अधिक इंसुलिन बनाकर प्रतिक्रिया करता है, जिससे बच्चा बहुत बड़ा (मैक्रोसोमिया) हो सकता है, जिससे डिलीवरी में समस्या हो सकती है। जोखिम कारक (Risk Factors): मोटापा (BMI 30+), पारिवारिक इतिहास (टाइप 2 डायबिटीज), पिछली गर्भावस्था में GDM, 25 वर्ष से अधिक उम्र, पीसीओएस (PCOS), और कुछ जातीयताएं (भारतीय, एशियाई मूल की महिलाओं में खतरा अधिक)। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (अक्सर हल्के या नजरअंदाज होते हैं) अत्यधिक प्यास (Polydipsia): बार-बार प्यास लगना, मुंह सूखना। बार-बार पेशाब आना (Polyuria): खासकर रात में बार-बार टॉयलेट जाना। थकान और कमजोरी: सामान्य से अधिक थकान महसूस होना। भूख अधिक लगना (Polyphagia): खाने के बाद भी भूख लगना। धुंधला दिखना (Blurry Vision): ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से आंखों का लेंस प्रभावित होता है। बार-बार संक्रमण: यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), यीस्ट इंफेक्शन (खुजली, सफेद पानी) - ये गर्भावस्था में आम हैं, लेकिन GDM में अधिक हो सकते हैं। दुर्लभ या कम चर्चित लक्षण हाथ-पैरों में जलन या सुन्नता (Neuropathy): "पैर में जलन" या "हाथ-पैर सुन्न होना" - यह लंबे समय तक उच्च शुगर का संकेत हो सकता है, हालांकि GDM में यह कम देखा जाता है। त्वचा में बदलाव: गर्दन, बगल या जांघों के आसपास गहरे, मखमली धब्बे (एकैन्थोसिस नाइग्रिकन्स) - यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है। मतली और उल्टी: यदि शुगर बहुत अधिक हो, तो यह मॉर्निंग सिकनेस जैसा लग सकता है, लेकिन यह अधिक गंभीर हो सकता है। बार-बार सिरदर्द: ब्लड शुगर के असंतुलन से सिरदर्द हो सकता है। महत्वपूर्ण: कई महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होते। इसलिए गर्भावस्था के 24-28 सप्ताह के बीच ग्लूकोज चैलेंज टेस्ट (OGTT) कराना अनिवार्य है। 3. विस्तृत आहार योजना (Detailed Diet Plan) GDM को मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका है डाइट और एक्सरसाइज। सही खाना ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखता है। यहां भारतीय खाने पर आधारित पूरी गाइड है। क्या खाएं? (Kya Khayein - Low GI, High Fiber Foods) साबुत अनाज (Whole Grains): ब्राउन राइस, ओट्स, क्विनोआ, ज्वार, बाजरा, रागी (मडुआ) की रोटी। सफेद चावल और मैदा से बचें। दालें और फलियां (Legumes): मूंग दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, मसूर दाल - ये प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती हैं, जो शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाती हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों का साग, ब्रोकोली, फूलगोभी - कैलोरी में कम, पोषक तत्वों में उच्च। प्रोटीन के स्रोत: अंडे, चिकन (ग्रिल्ड/उबला), मछली (सैल्मन, ट्यूना - ओमेगा-3 के लिए), पनीर, टोफू, दही (बिना मीठा)। प्रोटीन शुगर को स्थिर रखता है। हेल्दी फैट: एवोकाडो, नट्स (बादाम, अखरोट), बीज (चिया, अलसी, कद्दू के बीज), जैतून का तेल, नारियल का तेल। फल (कम मात्रा में): सेब, नाशपाती, जामुन (स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी), संतरा, कीवी, अमरूद। केला, आम, अंगूर, चीकू से बचें या कम खाएं। डेयरी: दूध (बिना मीठा), दही, छाछ - कैल्शियम और प्रोटीन के लिए। क्या न खाएं? (Kya Na Khayein - High Sugar & Refined Foods) शक्कर और मिठाई: चीनी, गुड़, शहद, जैम, मुरब्बा, केक, पेस्ट्री, हलवा, लड्डू, जलेबी, रसगुल्ला। रिफाइंड कार्ब्स: सफेद ब्रेड, सफेद चावल, मैदा की रोटी, नूडल्स, पास्ता, पिज्जा, बर्गर। मीठे पेय पदार्थ: कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक्स, शरबत, लस्सी (मीठी)। तले हुए और प्रोसेस्ड फूड: समोसा, पकौड़ा, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, पैकेज्ड स्नैक्स (बिस्कुट, कुकीज)। फलों का रस: भले ही ताजा हो, इसमें फाइबर नहीं होता और शुगर तेजी से बढ़ती है। पूरा फल खाएं। अधिक नमक और तेल: अचार, पापड़, मसालेदार चीजें - ये ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं। दिन भर का नमूना आहार (Sample Diet Plan) सुबह (7:00 AM): गुनगुना पानी + 2-3 भीगे हुए बादाम + 1 अखरोट। नाश्ता (8:00 AM): 1 कटोरी ओट्स/दलिया (दूध में) या 2 मल्टीग्रेन रोटी + 1 कप दही या 1 अंडे का ऑमलेट (सब्जियों के साथ)। मिड-मॉर्निंग (10:30 AM): 1 सेब या नाशपाती + मुट्ठी भर मखाने। दोपहर का भोजन (1:00 PM): 1 कटोरी ब्राउन राइस या 2-3 ज्वार/बाजरे की रोटी + 1 कटोरी मूंग दाल + हरी सब्जी + सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर)। शाम का नाश्ता (4:00 PM): 1 कप ग्रीन टी या नारियल पानी + 1 मुट्ठी भुने चने या 1 कटोरी फल (जामुन/संतरा)। रात का भोजन (7:30 PM): 1 कटोरी सब्जी + 1 रोटी + 1 कटोरी दाल + सलाद। सोने से पहले (9:30 PM): 1 गिलास गुनगुना दूध (बिना चीनी) या 1 कप दही। टिप्स: दिन में 3 बड़े भोजन की बजाय 5-6 छोटे भोजन करें। खाने के तुरंत बाद न लेटें। खाने के 10-15 मिनट बाद टहलें। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) अगर डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं होता, तो डॉक्टर दवाएं या इंसुलिन लिख सकते हैं। यहां केवल शैक्षिक जानकारी दी गई है। दवाएं (Medications) मेटफॉर्मिन (Metformin): यह एक मौखिक दवा है जो लिवर द्वारा ग्लूकोज उत्पादन को कम करती है और शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती है। यह गर्भावस्था में सुरक्षित मानी जाती है। ग्लिबेंक्लामाइड (Glyburide): यह एक और मौखिक दवा है जो पैनक्रियाज को अधिक इंसुलिन बनाने के लिए उत्तेजित करती है। लेकिन इसके दुष्प्रभाव (जैसे हाइपोग्लाइसीमिया) अधिक हो सकते हैं। इंसुलिन (Insulin Therapy) यदि मौखिक दवाएं काम नहीं करतीं या ब्लड शुगर बहुत अधिक है, तो इंसुलिन इंजेक्शन दिए जाते हैं। यह गर्भावस्था में सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है क्योंकि यह प्लेसेंटा को पार नहीं करता। प्रकार: तेजी से काम करने वाला इंसुलिन (लिस्प्रो, एस्पार्ट) - भोजन से पहले लिया जाता है। लंबे समय तक काम करने वाला इंसुलिन (डिटेमिर, ग्लार्गिन) - बेसल स्तर बनाए रखने के लिए। कैसे काम करता है: यह ब्लड शुगर को कोशिकाओं में भेजता है, जिससे शुगर कम होता है। डॉक्टर खुराक को व्यक्तिगत रूप से निर्धारित करते हैं। मॉनिटरिंग: दिन में 4-6 बार ब्लड शुगर चेक करना (फास्टिंग, खाने के 1-2 घंटे बाद) आवश्यक है। लक्ष्य: फास्टिंग < 95 mg/dL, खाने के 1 घंटे बाद < 140 mg/dL, 2 घंटे बाद < 120 mg/dL। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies) मेथी दाना (Fenugreek Seeds): रातभर 1 चम्मच मेथी दाना पानी में भिगोएं। सुबह खाली पेट पानी पिएं और दाने चबाएं। मेथी में फाइबर और कंपाउंड होते हैं जो शुगर को नियंत्रित करते हैं। दालचीनी (Cinnamon): 1/2 चम्मच दालचीनी पाउडर को गुनगुने पानी या चाय में मिलाकर पिएं। यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है। (गर्भावस्था में अधिक मात्रा से बचें - प्रति दिन 1-2 ग्राम से अधिक न लें)। करेला (Bitter Gourd): करेले का जूस या सब्जी खाने से शुगर कम हो सकता है। इसमें पॉलीपेप्टाइड-पी नामक यौगिक होता है जो इंसुलिन जैसा काम करता है। आंवला (Indian Gooseberry): आंवला विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है। 1 आंवला रोज खाएं या इसका जूस पिएं। यह पैनक्रियाज के कार्य को सुधारता है। ग्रीन टी (Green Tea): दिन में 1-2 कप बिना चीनी की ग्रीन टी पिएं। इसमें कैटेचिन होता है जो ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) नियमित व्यायाम: हर दिन कम से कम 30 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज (जैसे तेज चलना, तैराकी, प्रेग्नेंसी योगा, साइकिलिंग)। यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है और वजन नियंत्रित रखता है। पर्याप्त नींद: रात में 7-9 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से शुगर बढ़ सकता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। तनाव प्रबंधन: तनाव (स्ट्रेस) हार्मोन कोर्टिसोल को बढ़ाता है, जो शुगर बढ़ाता है। ध्यान (मेडिटेशन), गहरी सांस लेने की तकनीक, या हल्का संगीत सुनें। हाइड्रेशन: दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। पानी शुगर को पतला करने और किडनी के माध्यम से निकालने में मदद करता है। धूम्रपान और शराब से बचें: ये गर्भावस्था और शुगर दोनों के लिए हानिकारक हैं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव चिंता और तनाव: GDM के निदान से "मेरे बच्चे को क्या होगा?" जैसी चिंताएं हो सकती हैं। बार-बार शुगर चेक करना, डाइट में सख्ती, और डॉक्टर के पास जाना तनावपूर्ण हो सकता है। अवसाद (Depression): कुछ महिलाओं में GDM के साथ अवसाद के लक्षण (उदासी, रुचि की कमी, अत्यधिक थकान) देखे जा सकते हैं। हार्मोनल बदलाव और शारीरिक परेशानी इसे बढ़ा सकती है। अपराधबोध (Guilt): "मैंने कुछ गलत खा लिया" या "मेरी वजह से बच्चे को खतरा है" जैसी भावनाएं आ सकती हैं। याद रखें, GDM हार्मोनल है, आपकी गलती नहीं। दैनिक जीवन पर प्रभाव डाइट मैनेजमेंट: हर भोजन की योजना बनाना, बाहर का खाना छोड़ना, और मीठे की क्रेविंग से जूझना मुश्किल हो सकता है। समय प्रबंधन: शुगर चेक करना, एक्सरसाइज करना, और डॉक्टर की नियुक्तियां - ये सब समय लेते हैं, खासकर अगर आप कामकाजी हैं या पहले से बच्चे हैं। सामाजिक जीवन: शादी, पार्टी, या त्योहारों पर खाने-पीने से परहेज करना अलग-थलग महसूस करा सकता है। परिवार और दोस्तों को अपनी स्थिति समझाएं। समाधान: अपने पार्टनर, परिवार या किसी काउंसलर से बात करें। GDM सपोर्ट ग्रुप (ऑनलाइन या ऑफलाइन) से जुड़ें। याद रखें, यह अस्थायी है और सही प्रबंधन से आप और आपका बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे। 7. 10 विस्तृत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 1. क्या गर्भकालीन मधुमेह हमेशा के लिए रहता है? उत्तर: नहीं, अधिकांश मामलों में बच्चे के जन्म के बाद ब्लड शुगर सामान्य हो जाता है। हालांकि, लगभग 50% महिलाओं में भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चे के जन्म के 6-12 सप्ताह बाद शुगर टेस्ट कराना और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना जरूरी है। 2. क्या गर्भकालीन मधुमेह से बच्चे को नुकसान हो सकता है? उत्तर: हां, अगर शुगर अनियंत्रित रहे, तो बच्चा बहुत बड़ा (मैक्रोसोमिया) हो सकता है, जिससे डिलीवरी में समस्या (सी-सेक्शन की संभावना) हो सकती है। साथ ही, बच्चे को जन्म के बाद हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। सही इलाज से ये जोखिम कम हो जाते हैं। 3. क्या मैं गर्भकालीन मधुमेम में फल खा सकती हूं? उत्तर: हां, लेकिन कम मात्रा में और सही फल चुनें। सेब, नाशपाती, जामुन, संतरा, कीवी जैसे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) वाले फल खाएं। केला, आम, अंगूर, चीकू जैसे उच्च GI फलों से बचें या बहुत कम खाएं। फल का रस न पिएं, पूरा फल खाएं। 4. क्या गर्भकालीन मधुमेह में दही खा सकते हैं? उत्तर: हां, बिना मीठा दही (योगर्ट) खाना फायदेमंद है। इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं जो पाचन सुधारते हैं और प्रोटीन शुगर को स्थिर रखता है। मीठी लस्सी या फ्लेवर्ड दही से बचें। 5. क्या गर्भकालीन मधुमेह में व्यायाम करना सुरक्षित है? उत्तर: हां, व्यायाम बहुत फायदेमंद है। तेज चलना, तैराकी, प्रेग्नेंसी योगा, और स्ट्रेचिंग सुरक्षित हैं। लेकिन कोई भी नया व्यायाम शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। अगर आपको ब्लीडिंग, चक्कर, या सांस फूलने जैसी समस्या हो, तो तुरंत रुकें। 6. क्या गर्भकालीन मधुमेह में इंसुलिन लेना सुरक्षित है? उत्तर: हां, इंसुलिन गर्भावस्था में सबसे सुरक्षित दवा है क्योंकि यह प्लेसेंटा को पार नहीं करता और बच्चे तक नहीं पहुंचता। यह ब्लड शुगर को प्रभावी रूप से नियंत्रित करता है। डॉक्टर आपको इंजेक्शन लगाने का सही तरीका सिखाएंगे। 7. क्या गर्भकालीन मधुमेह से सी-सेक्शन होना जरूरी है? उत्तर: जरूरी नहीं। अगर ब्लड शुगर कंट्रोल में है और बच्चे का वजन सामान्य है, तो नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है। लेकिन अगर बच्चा बहुत बड़ा (4 किलो से अधिक) हो जाता है, तो डॉक्टर सी-सेक्शन की सलाह दे सकते हैं ताकि डिलीवरी के दौरान चोट से बचा जा सके। 8. क्या गर्भकालीन मधुमेम में मीठा खाने की क्रेविंग को कैसे कंट्रोल करें? उत्तर: क्रेविंग को पूरी तरह से दबाने की कोशिश न करें। इसके बजाय, हेल्दी विकल्प चुनें: 1-

Yaar, shadi ke baad 5 kilo in 3 months! PCOS aur saas ka pressure—kaise handle karu? 😢

Hi everyone… I’m really worried yaar. Mera weight shadi ke baad se bohot badh gaya hai. Pehle thoda control tha, but ab toh 5 kilo aur aa gaye in just 3 months. PCOS hai, periods bhi regular nahi aate—3-4 mahine naturally nahi aate bina meds ke. Mummy-in-law ne aaj kaha, “Beta, kya ho raha hai, itna weight badh gaya?” Unko pata nahi hai mera issue. Main toh kuch bata nahi paati. Aaj ek nuskha try kiya—subah warm water with lemon and methi seeds. Koi result nahi aaya abhi but let’s see. Koi hai jo PCOS ke saath weight gain manage kar raha hai? Please koi easy tip dedo jo ghar par ho sake. Bahut pressure hai na… shaadi ke baad sab expect karte hain sab perfect ho. 😢

Holter monitor laga liya, par neend uda di! Kya koi aur bhi pareshan hai?

Aaj hi Holter monitor laga ke aayi hoon. Bahut dar lag raha tha pehle, but doctor ne kaha bas 24 ghante normal kaam karo. Toh maine socha chalo karti hoon. Par problem yeh hai ki wires bahut tang kar rahe hain, aur neend nahi aa rahi. Raat ko uth ke baitha raha hoon. Pata nahi ismein kya pata chalega. Kya kisi aur ne bhi karwaya hai? Kya sach mein isse dil ki bechaini pata chal jaati hai? Main toh sochti hoon shayad machine hi mere dil ko aur pareshan kar de. Blood thinner bhi le rahi hoon, toh koi chot lagne ka dar bhi hai. Doctor ne kaha ki Holter monitor se koi nuksaan nahi hota, lekin mujhe toh ab bhi ghabrahat ho rahi hai. Batao apna experience.

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