apce-t8 tablet allopathy (Aceclofenac (100mg) + Thiocolchicoside (8mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
apce-t8 tablet allopathy (Aceclofenac (100mg) + Thiocolchicoside (8mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by DSV Healthcare. Contains Aceclofenac (100mg) + Thiocolchicoside (8mg).

apce-t8 tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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🏭 DSV Healthcare 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 21, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is apce-t8 tablet used for?

apce-t8 tablet (Aceclofenac (100mg) + Thiocolchicoside (8mg)) is used to treat pain analgesics. It contains Aceclofenac (100mg) + Thiocolchicoside (8mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Aceclofenac (100mg) + Thiocolchicoside (8mg)
  • Manufacturer: DSV Healthcare
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 apce-t8 tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

apce-t8 tablet का उपयोग मुख्य रूप से pain analgesics और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Aceclofenac (100mg) + Thiocolchicoside (8mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Aceclofenac (100mg) + Thiocolchicoside (8mg)
Brand Nameapce-t8 tablet
ManufacturerDSV Healthcare
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassPAIN ANALGESICS
Action ClassInformation pending
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take apce-t8 tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 apce-t8 tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of apce-t8 tablet?

  • Nausea
  • Vomiting
  • Heartburn
  • Stomach pain/epigastric pain
  • Loss of appetite
  • Diarrhea

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

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  1. edoclof-max tablet
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  2. xynac th 100mg/8mg tablet
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Medical Note: Always consult your doctor before switching medications. Generic alternatives with same salts are therapeutically equivalent.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about apce-t8 tablet

  • Myth: Generic substitutes of apce-t8 tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Aceclofenac (100mg) + Thiocolchicoside (8mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of apce-t8 tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Diabetic Neuropathy & Foot Pain - 13-06-2026

डायबिटिक न्यूरोपैथी और पैरों का दर्द: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका (Diabetic Neuropathy & Foot Pain: A Complete Guide) नमस्ते! अगर आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज (मधुमेह) से जूझ रहा है और पैरों में जलन, सुन्नपन या दर्द महसूस करता है, तो यह गाइड आपके लिए ही है। डायबिटिक न्यूरोपैथी एक गंभीर जटिलता है, लेकिन सही जानकारी और देखभाल से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। इस लेख में हम हर पहलू को गहराई से समझेंगे – बीमारी क्यों होती है, इसके लक्षण, खान-पान, दवाइयां, घरेलू उपाय और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव। 1. गहन परिचय और रोग तंत्र (Deep Introduction & Disease Mechanism) डायबिटिक न्यूरोपैथी एक प्रकार की तंत्रिका क्षति (nerve damage) है जो लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर के कारण होती है। यह मुख्य रूप से पैरों और हाथों की नसों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। यह कैसे होता है? (How does it happen?) उच्च रक्त शर्करा (Hyperglycemia): जब ब्लड शुगर लगातार बढ़ा रहता है, तो यह नसों की छोटी रक्त वाहिकाओं (capillaries) को नुकसान पहुंचाता है जो नसों को ऑक्सीजन और पोषण देती हैं। मेटाबोलिक पथ (Metabolic Pathways): हाई शुगर से शरीर में कुछ हानिकारक रसायन (जैसे सोर्बिटोल) बनते हैं, जो नसों की कोशिकाओं में जमा हो जाते हैं और उन्हें खराब करते हैं। ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative Stress): हाई शुगर से फ्री रेडिकल्स बढ़ते हैं, जो नसों की सुरक्षात्मक परत (myelin sheath) को नष्ट कर देते हैं। सूजन (Inflammation): शरीर में क्रोनिक सूजन बढ़ जाती है, जो नसों को और नुकसान पहुंचाती है। इस प्रक्रिया से नसों का संकेत (signal) सही से नहीं पहुंच पाता, जिससे दर्द, सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होती है। पैरों में यह समस्या सबसे पहले दिखती है क्योंकि पैर शरीर के सबसे दूर के हिस्से होते हैं और उनमें रक्त प्रवाह कमजोर होता है। 2. सामान्य और दुर्लभ लक्षण (Common & Rare Symptoms) सामान्य लक्षण (Common Symptoms): पैरों में जलन (Burning sensation): खासकर रात के समय पैरों के तलवों में आग जैसी जलन होना। झुनझुनी या चींटी चलने जैसा महसूस होना (Tingling): पैरों की उंगलियों या तलवों में सुई चुभन जैसा एहसास। सुन्नपन (Numbness): पैरों में कुछ महसूस न होना, जैसे वे "मर गए" हों। तेज दर्द (Sharp pain): अचानक से पैरों में चाकू चुभने जैसा दर्द। स्पर्श के प्रति संवेदनशीलता (Allodynia): हल्का स्पर्श भी बहुत दर्दनाक लगना। मांसपेशियों में कमजोरी: पैरों में ताकत कम होना, चलने में परेशानी। त्वचा में बदलाव: पैरों की त्वचा सूखी, फटी हुई या लाल होना। दुर्लभ लक्षण (Rare Symptoms): धुंधली दृष्टि (Blurry vision): आंखों की नसों पर प्रभाव के कारण। चक्कर आना या बेहोशी (Dizziness): ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी के कारण ब्लड प्रेशर कंट्रोल खराब होना। पाचन समस्याएं: कब्ज, दस्त, या पेट फूलना (गैस्ट्रोपेरेसिस)। पसीना आने में परेशानी: बहुत ज्यादा या बहुत कम पसीना आना। यौन समस्याएं: पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन, महिलाओं में योनि सूखापन। बार-बार इंफेक्शन: पैरों में छोटे-छोटे घाव भी जल्दी न भरना और संक्रमण होना। ध्यान दें: अगर आपको पैरों में कोई भी चोट या घाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। डायबिटिक फुट अल्सर गैंग्रीन में बदल सकता है। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan) डायबिटिक न्यूरोपैथी में खान-पान सबसे अहम भूमिका निभाता है। सही डाइट से ब्लड शुगर कंट्रोल रहेगा और नसों को और नुकसान से बचाया जा सकेगा। ✅ क्या खाएं (Kya Khaye) – Indian Foods: फाइबर युक्त अनाज: जई (Oats), ज्वार, बाजरा, रागी (Finger Millet), ब्राउन राइस। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों का साग, ब्रोकली। प्रोटीन के स्रोत: दालें (मूंग, मसूर, चना), सोया, पनीर, मछली, चिकन (बिना त्वचा के)। हेल्दी फैट: घी (सीमित मात्रा में), नारियल तेल, जैतून का तेल, बादाम, अखरोट, अलसी के बीज। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल: सेब, नाशपाती, जामुन, अमरूद, संतरा, कीवी। जड़ी-बूटियां और मसाले: हल्दी (करक्यूमिन), अदरक, दालचीनी, मेथी दाना, लहसुन। ये सूजन कम करते हैं। ड्रिंक्स: नारियल पानी, हर्बल चाय (ग्रीन टी, तुलसी चाय), नींबू पानी (बिना चीनी)। ❌ क्या न खाएं (Kya Na Khaye) – Avoid These: चीनी और मीठे पदार्थ: मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, केक, बिस्कुट। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा, सफेद ब्रेड, नूडल्स। तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड: समोसा, पकौड़ा, चिप्स, फास्ट फूड। ट्रांस फैट: वनस्पति घी, मार्जरीन, बाजार की पेस्ट्री। ज्यादा नमक: अचार, पापड़, नमकीन स्नैक्स। शराब और धूम्रपान: ये नसों की क्षति को बढ़ाते हैं। नमूना डाइट प्लान (Sample Diet Plan): सुबह (7:00 AM): गुनगुना पानी + 1 चम्मच मेथी दाना (भिगोया हुआ)। नाश्ता (8:00 AM): जई का दलिया + दूध + कटे हुए बादाम, या 2 मूंग दाल चीला + हरी चटनी। मिड-मॉर्निंग (10:30 AM): 1 सेब या 1 मुट्ठी भुने चने। दोपहर का खाना (1:00 PM): 1 रोटी (ज्वार/बाजरा) + हरी सब्जी (जैसे लौकी) + दाल + सलाद (खीरा, टमाटर, प्याज)। शाम (4:00 PM): हर्बल चाय + 2-3 अखरोट। रात का खाना (7:00 PM): ग्रिल्ड पनीर/मछली + उबली हुई ब्रोकली + 1 रोटी। सोने से पहले (10:00 PM): 1 गिलास गुनगुना दूध (हल्दी डालकर)। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management) डायबिटिक न्यूरोपैथी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाइयों और थेरेपी से लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। यहां केवल शैक्षिक जानकारी दी गई है – कृपया डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। आमतौर पर प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाएं: ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाएं: मेटफॉर्मिन (Metformin): लिवर में शुगर उत्पादन कम करता है। सल्फोनीलयूरिया (Sulfonylureas): जैसे ग्लिमेपिराइड, पैंक्रियाज से इंसुलिन रिलीज बढ़ाता है। इंसुलिन (Insulin): टाइप 1 या एडवांस टाइप 2 डायबिटीज के लिए। न्यूरोपैथी के दर्द के लिए दवाएं: गैबापेंटिन (Gabapentin) या प्रीगाबालिन (Pregabalin): ये नसों की असामान्य गतिविधि को शांत करते हैं। डुलोक्सेटीन (Duloxetine): एक एंटीडिप्रेसेंट जो नसों के दर्द में मदद करता है। एमिट्रिप्टिलाइन (Amitriptyline): नींद लाने और दर्द कम करने के लिए (कम खुराक में)। सामयिक क्रीम (Topical Creams): कैप्साइसिन क्रीम (Capsaicin Cream): मिर्च से बनी यह क्रीम दर्द के सिग्नल को ब्लॉक करती है। लिडोकेन पैच (Lidocaine Patch): स्थानीय एनेस्थेटिक की तरह काम करता है। एंटीऑक्सीडेंट और सप्लीमेंट: अल्फा-लिपोइक एसिड (Alpha-Lipoic Acid): नसों की क्षति को कम करने में मदद करता है। बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन (B1, B6, B12): नसों की मरम्मत के लिए जरूरी। अन्य चिकित्सा उपचार: फिजियोथेरेपी: मांसपेशियों की कमजोरी और संतुलन सुधारने के लिए। ट्रांसक्यूटेनियस इलेक्ट्रिकल नर्व स्टिमुलेशन (TENS): एक छोटी मशीन से हल्के करंट के जरिए दर्द कम किया जाता है। पैरों की देखभाल (Foot Care): नियमित रूप से पैरों की जांच, नाखून काटना, और मॉइस्चराइजर लगाना। 5. सिद्ध घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) घरेलू उपाय (Home Remedies): गर्म पानी से पैरों की सिकाई: रात को सोने से पहले 10-15 मिनट गुनगुने पानी (बहुत गर्म नहीं) में पैर डालें। इससे रक्त संचार बढ़ता है और दर्द कम होता है। एप्सम सॉल्ट का उपयोग: पानी में 1-2 चम्मच एप्सम सॉल्ट (मैग्नीशियम सल्फेट) डालकर पैर भिगोएं। यह सूजन और दर्द को कम करता है। हल्दी और दूध: रात को 1 गिलास गर्म दूध में 1 चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं। हल्दी में करक्यूमिन होता है जो नसों की सूजन को कम करता है। आंवला और नीम: आंवला विटामिन C का अच्छा स्रोत है, जो नसों की मरम्मत में मदद करता है। नीम की पत्तियों का पेस्ट पैरों के घावों पर लगाया जा सकता है (लेकिन डॉक्टर से पूछकर)। एलोवेरा जेल: पैरों की जलन और सूखापन कम करने के लिए एलोवेरा जेल लगाएं। लहसुन का तेल: 2-3 लहसुन की कलियों को सरसों के तेल में हल्का गर्म करके पैरों पर मालिश करें। लहसुन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes): रोजाना व्यायाम: 30 मिनट तक तेज चलना, योग (जैसे पादहस्तासन, वज्रासन), या स्विमिंग करें। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल होता है और नसों में रक्त प्रवाह बढ़ता है। पैरों की नियमित जांच: हर दिन पैरों को देखें – कोई कट, छाला, लालिमा या सूजन तो नहीं है? शीशे की मदद से तलवों की जांच करें। सही जूते पहनें: ढीले, आरामदायक जूते पहनें जो पैरों पर दबाव न डालें। मोजे सूती और सीमलेस हों। धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये दोनों नसों की क्षति को तेज करते हैं। तनाव प्रबंधन: ध्यान (मेडिटेशन), गहरी सांस लेना, और संगीत सुनना तनाव कम करता है, जो ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है। पर्याप्त नींद: रात में 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से दर्द बढ़ सकता है। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) डायबिटिक न्यूरोपैथी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत थका देने वाली हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: अवसाद (Depression): लगातार दर्द और सुन्नपन से मूड खराब हो सकता है। कई लोग उदासी, निराशा या अकेलापन महसूस करते हैं। चिंता (Anxiety): पैरों में घाव या इंफेक्शन का डर, या चलने-फिरने में परेशानी से चिंता बढ़ जाती है। नींद की समस्या: रात में पैरों में दर्द या जलन के कारण नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। सामाजिक अलगाव: दर्द के कारण लोग पार्टी-वार्टी या परिवार के साथ घूमने नहीं जा पाते, जिससे वे अकेले हो जाते हैं। दैनिक जीवन पर प्रभाव: चलने-फिरने में कठिनाई: पैरों में कमजोरी या दर्द के कारण सीढ़ियां चढ़ना, बाजार जाना या रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है। काम पर असर: जिन लोगों को लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है (जैसे दुकानदार, टीचर), उनके लिए यह बहुत मुश्किल हो सकता है। ड्राइविंग में समस्या: पैरों में सुन्नपन के कारण ब्रेक या क्लच का सही से इस्तेमाल नहीं हो पाता, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है। आत्म-देखभाल में कमी: दर्द और थकान के कारण लोग खुद की देखभाल (जैसे पैर धोना, क्रीम लगाना) भी नहीं कर पाते। समाधान: परिवार का सहयोग, काउंसलिंग, और सपोर्ट ग्रुप्स (जैसे डायबिटीज इंडिया) बहुत मददगार हो सकते हैं। अगर आपको लगता है कि आप उदास या चिंतित हैं, तो डॉक्टर या मनोचिकित्सक से बात करने में संकोच न करें। 7. 10 विस्तृत FAQ (Frequently Asked Questions) 1. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी पूरी तरह ठीक हो सकती है? नहीं, यह पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती, लेकिन सही इलाज और जीवनशैली से लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है। 2. पैरों में जलन के लिए तुरंत क्या करें? पैरों को ठंडे पानी (बर्फ नहीं) से धोएं, हल्दी वाला दूध पिएं, और डॉक्टर से प्रीगाबालिन या गैबापेंटिन जैसी दवा लेने के बारे में पूछें। घरेलू उपाय के रूप में एलोवेरा जेल लगा सकते हैं। 3. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में पैरों की मालिश करनी चाहिए? हां, हल्की मालिश (लहसुन के तेल या सरसों के तेल से) फायदेमंद हो सकती है, लेकिन बहुत जोर से न दबाएं। अगर पैरों में घाव या संक्रमण है, तो मालिश न करें। 4. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी से हाथों में भी दर्द होता है? हां, इसे "डायबिटिक पोलीन्यूरोपैथी" कहते हैं। इसमें हाथों की उंगलियों में भी झुनझुनी, जलन या सुन्नपन हो सकता है। 5. क्या वजन कम करने से न्यूरोपैथी में फायदा होता है? बिल्कुल! वजन कम करने से ब्लड शुगर कंट्रोल होता है और नसों पर दबाव कम होता है। हर 1 किलो वजन घटाने से डायबिटीज कंट्रोल में सुधार आता है। 6. क्या मैं दवाइयों के बिना सिर्फ डाइट से न्यूरोपैथी को कंट्रोल कर सकता हूं? शुरुआती चरणों में डाइट और व्यायाम से ब्लड शुगर कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में दवाइयों की जरूरत होती है। डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 7. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी में पैरों के नाखून काटना सुरक्षित है? हां, लेकिन सावधानी से। नाखूनों को सीधा काटें, गोल नहीं। अगर आपको दिखाई नहीं देता या हाथ कांपते हैं, तो किसी पोडियाट्रिस्ट से कटवाएं। 8. क्या शराब डायबिटिक न्यूरोपैथी को बढ़ाती है? हां, शराब नसों की क्षति को तेज करती है और ब्लड शुगर को अस्थिर करती है। इसे पूरी तरह से बंद करना सबसे अच्छा है। 9. क्या गर्भावस्था में डायबिटिक न्यूरोपैथी खतरनाक है? हां, गर्भावस्था में ब्लड शुगर का बढ़ना नसों को और नुकसान पहुंचा सकता है। गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की निगरानी में रहना चाहिए और इंसुलिन थेरेपी लेनी पड़ सकती है। 10. क्या डायबिटिक न्यूरोपैथी के लिए कोई सर्जरी होती है? सीधे तौर पर न्यूरोपैथी के लिए सर्जरी नहीं होती, लेकिन अगर पैरों में गंभीर घाव या गैंग्रीन हो जाए, तो एम्प्यूटेशन (अंग काटना) जरूरी हो सकता है। इससे बचने के लिए समय पर इलाज कराएं। महत्वपूर्ण चिकित्सा अस्वीकरण (Medical Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। डायबिटिक न्यूरोपैथी एक गंभीर स्थिति है, और किसी भी दवा, डाइट या उपचार को शुरू करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या डायबिटीज विशेषज्ञ से परामर्श करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की चिकित्सीय समस्या के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और नियमित जांच कराते रहें। नोट: अगर आपको यह गाइड उपयोगी लगी हो, तो कृपया इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करें। डायबिटीज के मरीजों को सही जानकारी और सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। स्वस्थ रहें, मुस्कुराते रहें!

Endometriosis ka dard! Gharwale samajhte kyun nahi? 😔

Mujhe aaj kal kuch samajh nahi aa raha hai. Pichle 3-4 din se periods ka pain itna zyada hai ki main bed se uth nahi pa rahi. Pata hai endometriosis hai, doctor ne 2 saal pehle diagnose kiya tha. Lekin gharwale... meri amma aur pati dono kehte hain "bas thoda aur tolerate karo, sab theek ho jayega." Jaise main pretend kar rahi hoon. Unko lagta hai main bahut drama kar rahi hoon. Kal toh meri amma ne kaha "tumhari umar mein itna dard nahi hota, bas mann ka khel hai." Yaar, seriously? Mera pet phool jata hai, legs mein pain hota hai, nausea rehta hai. Main roz hot water bag rakh leti hoon, kuch aram nahi hota. Ek naya ayurvedic powder try kiya hai, naam bhool gayi, lekin abhi tak farak nahi aaya. Kya main galat hoon ki main unhe samjha nahi pa rahi? Ya yeh sab ignore karna normal hai? Koi aur bhi hai jiske gharwale aise rehte hain? Please koi bataye, main akela feel kar rahi hoon. 😔

Subah uthke fingers akad jaate hain? Koi remedy batao yaar!

Subah uthi toh fingers bilkul akad gaye the, jaise band ho gaye hain. Garm paani me haath rakha toh thoda aaram mila, lekin atta gundne baithi toh dard aisa ki bas chhodna pada. Bohot mushkil hota hai yaar, roz ki yehi problem. Kisi ko bhi aisa hota hai? Koi remedy bataye jo ghar pe try kar sakte hain? Maine calcium tablets bhi liye but kuch fark nahi padta. Kya garmi me bhi ye dard rukta hai?

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