afitrox 90mg tablet allopathy (Etoricoxib (90mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India
afitrox 90mg tablet allopathy (Etoricoxib (90mg)) - Uses in Hindi, Side Effects, Substitutes & Price in India manufactured by Garwyn Remedies. Contains Etoricoxib (90mg).

afitrox 90mg tablet - Uses, Price, Side Effects & Substitutes

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Etoricoxib (90mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Garwyn Remedies 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 21, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is afitrox 90mg tablet used for?

afitrox 90mg tablet (Etoricoxib (90mg)) is used to treat pain analgesics. It contains Etoricoxib (90mg), which works by treating the condition effectively. Always consult your doctor before use. Take as prescribed.

  • Generic Name: Etoricoxib (90mg)
  • Manufacturer: Garwyn Remedies
  • Medicine Form: Allopathy
  • Pregnancy Category: Consult doctor

🇮🇳 afitrox 90mg tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

afitrox 90mg tablet का उपयोग मुख्य रूप से pain analgesics और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में Etoricoxib (90mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? The Indian pharmaceutical market is expected to reach $130 billion by 2030.

📋 Drug Information

Generic Name(s)Etoricoxib (90mg)
Brand Nameafitrox 90mg tablet
ManufacturerGarwyn Remedies
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic ClassPAIN ANALGESICS
Action ClassNSAID's -Selective COX-2 Inhibitors
Route of AdministrationOral
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Shelf LifeAs per manufacturer

💡 How and when to take afitrox 90mg tablet?

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💊 afitrox 90mg tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

⚠️ What are the side effects of afitrox 90mg tablet?

  • Oral ulcer
  • Bronchospasm
  • Increased liver enzymes
  • Esophagitis
  • Stomach pain
  • Diarrhea

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🔄 Best Substitutes for afitrox 90mg tablet

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Medical Note: Always consult your doctor before switching medications. Generic alternatives with same salts are therapeutically equivalent.

🔬 Drug Interactions

🛡️ Safety & Warnings

🛑 Myths vs. Facts about afitrox 90mg tablet

  • Myth: Generic substitutes of afitrox 90mg tablet are less effective.
    Fact: Approved generic medicines contain the exact same active ingredients (Etoricoxib (90mg)) and are just as safe and effective as the branded version.
  • Myth: Taking a double dose will cure my symptoms faster.
    Fact: Taking more than the prescribed dose of afitrox 90mg tablet can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to your doctor's dosage.
  • Myth: This medicine is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. Safety depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies. Always consult a doctor.

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Complete Guide to Diabetes Diet Plan - 29-05-2026

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(How it happens inside the body?) इंसुलिन का काम: जब आप खाना खाते हैं, तो कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में टूट जाता है। यह ग्लूकोज ब्लड में आता है। पैंक्रियाज इंसुलिन रिलीज करता है, जो एक चाबी की तरह काम करता है और कोशिकाओं के दरवाजे खोलता है ताकि ग्लूकोज अंदर जा सके और एनर्जी बने। टाइप 1 डायबिटीज: इसमें इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं (बीटा कोशिकाओं) पर हमला करता है। इसलिए इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। यह ज्यादातर बच्चों और युवाओं में होता है। टाइप 2 डायबिटीज: इसमें शरीर इंसुलिन रेजिस्टेंट हो जाता है – कोशिकाएं इंसुलिन को पहचानती नहीं हैं। पैंक्रियाज पहले ज्यादा इंसुलिन बनाता है, लेकिन धीरे-धीरे थक जाता है। यह 90% मामलों में होता है और मोटापा, खराब डाइट और एक्सरसाइज की कमी से जुड़ा है। गर्भकालीन डायबिटीज (Gestational Diabetes): प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। यह आमतौर पर डिलीवरी के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन बाद में टाइप 2 का खतरा बढ़ा देता है। ब्लड शुगर क्यों बढ़ता है? जब इंसुलिन कम होता है या काम नहीं करता, ग्लूकोज कोशिकाओं में 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सीड्स, जैतून का तेल, सरसों का तेल, नारियल तेल (सीमित)। मसाले और जड़ी-बूटियां: हल्दी, दालचीनी, मेथी दाना, अदरक, लहसुन, जीरा। ये इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाते हैं। पेय पदार्थ: पानी (दिन में 8-10 गिलास), नारियल पानी (बिना चीनी), हर्बल चाय (ग्रीन टी, तुलसी चाय), नींबू पानी (बिना नमक/चीनी)। क्या न खाएं (What to Avoid – Red List) रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा, सफेद ब्रेड, नूडल्स, पास्ता। ये तुरंत शुगर बढ़ाते हैं। चीनी और मीठी चीजें: मिठाई (गुलाब जामुन, जलेबी, रसगुल्ला), कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, केक, बिस्कुट, आइसक्रीम। फ्राइड और तला-भुना: समोसा, पकौड़ा, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स, भटूरे। ये ट्रांस फैट और कैलोरी से भरे होते हैं। फुल फैट डेयरी: मलाई, क्रीम, फुल क्रीम दूध, मक्खन, घी (सीमित मात्रा में ले सकते हैं)। प्रोसेस्ड मीट: सॉसेज, बेकन, सलामी। इनमें सोडियम और अनहेल्दी फैट होता है। फल (ज्यादा मात्रा में): केला, आम, अंगूर, चीकू, खजूर – इनमें नेचुरल शुगर ज्यादा होती है। अल्कोहल: बीयर, वाइन, शराब – यह ब्लड शुगर को अस्थिर करता है और लिवर को प्रभावित करता है। नमक का अधिक सेवन: अचार, पापड़, चटनी, पैकेज्ड फूड – हाई ब्लड प्रेशर का खतरा। सैंपल डेली डाइट चार्ट (Indian Style) सुबह (6:30-7:00 AM): 1 गिलास गुनगुना पानी + 1 चम्मच मेथी दाना (रात भर भिगोया हुआ) या 1 कप ग्रीन टी। नाश्ता (8:00-9:00 AM): 1 कटोरी ओट्स/दलिया (सब्जियों के साथ) + 1 अंडा उबला या 2 मूंग दाल का चीला + 1 कप दही। मिड-मॉर्निंग (10:30-11:00 AM): 1 सेब या अमरूद + 5-6 बादाम। दोपहर का खाना (1:00-2:00 PM): 1 कटोरी ब्राउन राइस या 2 रोटी (ज्वार/बाजरा) + 1 कटोरी दाल + हरी सब्जी + सलाद (खीरा, टमाटर, प्याज) + 1 कटोरी दही। शाम (4:00-5:00 PM): 1 कप हर्बल चाय + 1 मुट्ठी भुने चने या भेल (बिना चटनी के)। रात का खाना (7:30-8:30 PM): 1 कटोरी सूप (टमाटर/मिक्स वेज) + 1 रोटी (गेहूं) + ग्रिल्ड पनीर/चिकन + सब्जी। रात को सोने से पहले (9:30-10:00 PM): 1 गिलास गर्म दूध (हल्दी के साथ) या 1 कटोरी दही। टिप: खाने के बाद 10-15 मिनट टहलें। इससे शुगर कंट्रोल में रहता है। 4. चिकित्सा प्रबंधन: दवाएं और उनका काम (Medical Management: Medicines & How They Work) डायबिटीज का इलाज डॉक्टर की सलाह से ही करें। यहां केवल शैक्षिक जानकारी दी गई है। दवाएं आमतौर पर टाइप 2 के लिए दी जाती हैं, जबकि टाइप 1 में इंसुलिन जरूरी है। टाइप 2 डायबिटीज की दवाएं मेटफॉर्मिन (Metformin): सबसे आम दवा। यह लिवर से ग्लूकोज बनना कम करता है और कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति संवेदनशील बनाता है। साइड इफेक्ट: पेट खराब, दस्त (शुरू में)। सल्फोनिलयूरिया (Sulfonylureas) – जैसे ग्लिमेपीराइड: ये पैंक्रियाज को ज्यादा इंसुलिन बनाने के लिए उत्तेजित करते हैं। खतरा: हाइपोग्लाइसीमिया (लो शुगर)। डीपीपी-4 इनहिबिटर (DPP-4 Inhibitors) – जैसे सीताग्लिप्टिन: ये इंसुलिन रिलीज को बढ़ाते हैं और ग्लूकागन (शुगर बढ़ाने वाला हार्मोन) को कम करते हैं। एसजीएलटी2 इनहिबिटर (SGLT2 Inhibitors) – जैसे डापाग्लिफ्लोजिन: ये किडनी के जरिए पेशाब में शुगर निकालते हैं। वजन घटाने में भी मदद करते हैं। जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 Agonists) – जैसे सेमाग्लूटाइड: ये इंसुलिन स्राव बढ़ाते हैं, भूख कम करते हैं और वजन घटाते हैं। इंजेक्शन के रूप में लिया जाता है। टाइप 1 डायबिटीज का इलाज इंसुलिन थेरेपी: यह जरूरी है। इंसुलिन के प्रकार: तेज-अभिनय (लिसप्रो), लंबे समय तक काम करने वाला (ग्लार्गिन)। डॉक्टर दिन में 2-4 बार इंजेक्शन या इंसुलिन पंप लगाने की सलाह देते हैं। मॉनिटरिंग कैसे करें? फास्टिंग ब्लड शुगर: सुबह खाली पेट – 70-130 mg/dL लक्ष्य। पोस्टप्रैंडियल (खाने के 2 घंटे बाद): 180 mg/dL से कम। HbA1c: 3 महीने का औसत शुगर – 7% से कम रखना चाहिए। ध्यान दें: कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। हर व्यक्ति की डोज अलग होती है। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) ये उपाय दवाओं के साथ मिलकर काम करते हैं, लेकिन इन्हें दवा का विकल्प न समझें। घरेलू उपचार (Home Remedies) करेला (Bitter Gourd): इसमें पॉलीपेप्टाइड-पी (पी-इंसुलिन) होता है जो शुगर कम करता है। 1 कटोरी करेले का जूस रोज सुबह पिएं (नमक/चीनी न डालें)। मेथी दाना (Fenugreek Seeds): 1 चम्मच मेथी दाना रात भर पानी में भिगोएं, सुबह खाली पेट चबाकर खाएं। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है। दालचीनी (Cinnamon): आधा चम्मच दालचीनी पाउडर रोज खाने में डालें। यह ब्लड शुगर को 10-15% तक कम कर सकता है। जामुन (Indian Blackberry): जामुन के बीजों को पीसकर पाउडर बनाएं और रोज 1 चम्मच पानी के साथ लें। जामुन का फल भी खाएं। एलोवेरा: एलोवेरा जूस (बिना चीनी) आधा कप रोज पिएं। यह पैंक्रियाज की कोशिकाओं को रिपेयर करता है। नीम: नीम की पत्तियों का काढ़ा या 2-3 पत्तियां रोज चबाएं। यह ब्लड शुगर और इंफेक्शन दोनों में मदद करता है। जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) रोजाना एक्सरसाइज: कम से कम 30 मिनट तेज चलना, योग (सूर्य नमस्कार, कपालभाति), साइकिलिंग या स्विमिंग। एक्सरसाइज से मांसपेशियां ग्लूकोज ज्यादा एब्जॉर्ब करती हैं। वजन कम करें: शरीर के वजन का 5-10% कम करने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में बड़ा सुधार होता है। तनाव कम करें: तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो शुगर बढ़ाता है। मेडिटेशन, प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) करें। नींद पूरी करें: 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद की कमी से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। धूम्रपान और शराब छोड़ें: ये ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं और डायबिटीज कॉम्प्लिकेशन को बढ़ाते हैं। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) डायबिटीज सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण है। इसे समझना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डायबिटीज डिस्ट्रेस: ब्लड शुगर को लेकर लगातार चिंता, डाइट पर नियंत्रण का दबाव, और दवाओं का पालन करने का तनाव। यह डिप्रेशन और एंग्जायटी का कारण बन सकता है। डिप्रेशन: डायबिटीज के मरीजों में डिप्रेशन का खतरा 2-3 गुना ज्यादा होता है। लक्षण: उदासी, रुचि कम होना, नींद की समस्या। हाइपोग्लाइसीमिया का डर: लो शुगर का डर (जैसे बेहोशी या कंपकंपी) मरीजों को सामाजिक गतिविधियों से दूर कर सकता है। सामाजिक कलंक: कुछ लोग डायबिटीज को कमजोरी या "बुढ़ापे की बीमारी" समझते हैं, जिससे शर्मिंदगी महसूस होती है। दैनिक जीवन पर प्रभाव खाने की योजना: हर भोजन की प्लानिंग करनी पड़ती है। बाहर खाने पर मेनू चेक करना पड़ता है। शारीरिक गतिविधि: एक्सरसाइज का समय निकालना मुश्किल हो सकता है, खासकर कामकाजी लोगों के लिए। यात्रा: दवाएं, इंसुलिन और ब्लड शुगर मॉनिटर हमेशा साथ रखना पड़ता है। टाइम जोन बदलने पर शुगर प्रभावित हो सकता है। काम पर प्रभाव: बार-बार पेशाब या थकान के कारण काम में ध्यान कम लग सकता है। समाधान: परिवार और दोस्तों से बात करें, सपोर्ट ग्रुप जॉइन करें, और मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से मदद लें। याद रखें, डायबिटीज आपकी पहचान नहीं 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