adniva 400 tablet - Uses, Price and Side Effects

adniva 400 tablet: Uses in Hindi (Fayde), Price, Side Effects & Substitutes

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S-Adenosyl L-Methoinine Disulfate Tosylate (400mg) (Click to see all medicines with same salt)
🏭 Palvin Pharmaceuticals 📦 Varies by brand 💊 Allopathy 📅 Updated: Jun 13, 2026
Medically Reviewed
By SaathiMed Expert Medical Panel

What is adniva 400 tablet used for? (Quick Answer)

🩺 Primary Use:
adniva 400 tablet (manufactured by Palvin Pharmaceuticals) is a highly effective medicine primarily used for the treatment of . It helps in relieving symptoms and improving your overall health. Find the complete list of adniva 400 tablet uses in Hindi, alternatives, price in India, and dosage on SaathiMed below.
🧪 Active Ingredient & Working:
It contains S-Adenosyl L-Methoinine Disulfate Tosylate (400mg) which works by treating the underlying condition effectively.
⚠️ Safety Warning:
Always consult your doctor before using this medicine, especially to check if it is safe during pregnancy or if you suffer from liver or kidney issues.

🇮🇳 adniva 400 tablet के बारे में संक्षिप्त जानकारी (Hindi Summary)

adniva 400 tablet का उपयोग मुख्य रूप से और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा में मुख्य सामग्री के रूप में S-Adenosyl L-Methoinine Disulfate Tosylate (400mg) मौजूद है। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए, खासकर गर्भावस्था (pregnancy) और लिवर (liver) की समस्याओं में।

मुख्य फायदे (Key Benefits): Detailed medical information is being added to our database.... Read more below.

💡 Did You Know? India has the highest number of USFDA-compliant plants outside the USA.

📋 Drug Information

Generic Name(s)S-Adenosyl L-Methoinine Disulfate Tosylate (400mg)
Manufacturer / BrandPalvin Pharmaceuticals
Packaging / FormVaries by brand (Allopathy)
Therapeutic Class
Action Class
Prescription Required✓ Yes (Schedule H Drug)
StorageRoom temperature (15-30°C), away from moisture
Onset of Action:
30 to 60 minutes
Duration:
6 to 8 hours
Habit Forming:
No (Non-addictive)
Food:
Take after meal

💊 adniva 400 tablet Uses in Hindi (Ke Fayde), Benefits & Indications

Detailed medical information is being added to our database.

💡 How to Take adniva 400 tablet (Dosage & Khane ka tarika)

Follow your doctor's prescription exactly.

  • ✅ Take exactly as prescribed by your doctor.
  • ✅ Do not exceed the recommended dose
  • ✅ Complete the full course of medication
  • ✅ Store at room temperature away from moisture

💡 Expert Tips for Best Results

  • Take adniva 400 tablet at the same time every day to maintain consistent medicine levels in your body.
  • If you experience stomach upset or acidity, try taking it with a light meal or a glass of milk.
  • Stay hydrated! Drink at least 8-10 glasses of water daily unless your doctor has restricted your fluid intake.
  • Do not crush or chew the medicine if it is an extended-release (ER) or delayed-release tablet.
  • Always monitor for unusual swelling, severe rashes, or breathing issues—report these immediately to an emergency room.

⚠️ adniva 400 tablet Side Effects (Nuksan) & Precautions

Common and serious side effects may include:

  • Headache
  • Dizziness
  • Vomiting
  • Upset stomach
  • Diarrhea
  • Constipation
  • Increased sweating
  • Insomnia (difficulty in sleeping)

Consult your doctor if you experience any unusual symptoms.

🛑 Myths vs. Facts about adniva 400 tablet

  • Myth: adniva 400 tablet can be stopped once I feel better.
    Fact: Always complete the full course prescribed by your doctor to prevent the condition from returning or causing resistance.
  • Myth: Taking a double dose will cure me faster.
    Fact: A double dose can lead to severe toxicity or an overdose. Stick strictly to the prescribed dosage.
  • Myth: It is 100% safe for everyone.
    Fact: No medicine is universally safe. It depends on your medical history, ongoing medicines, and potential allergies.

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Complete Guide to Hypothyroidism - 01-06-2026

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भारीपन (Hoarseness): गले पर दबाव के कारण आवाज बैठ जाना या भारी हो जाना। मासिक धर्म में अनियमितता: महिलाओं में पीरियड्स अनियमित, भारी या बिल्कुल बंद हो जाना। प्रजनन समस्याएं: पुरुषों में कामेच्छा में कमी और स्तंभन दोष (Erectile Dysfunction)। महिलाओं में गर्भधारण में कठिनाई। मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव: गंभीर डिप्रेशन, चिंता, और कभी-कभी "मायक्सेडेमा कोमा" (Myxedema Coma) नामक जानलेवा स्थिति, जिसमें व्यक्ति बेहोश हो सकता है। हृदय पर प्रभाव: धीमी हृदय गति (Bradycardia), उच्च रक्तचाप (खासकर डायस्टोलिक), और कोलेस्ट्रॉल बढ़ना। 3. विस्तृत डाइट प्लान (Detailed Diet Plan - Indian Foods) हाइपोथायरायडिज्म में डाइट का मतलब केवल "क्या खाएं" नहीं, बल्कि "कैसे खाएं" भी है। यहां बिल्कुल साफ-साफ बताया गया है। ✅ क्या खाएं (Foods to Eat) - थायरॉयड के लिए फायदेमंद: आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थ (Iodine-rich): आयोडीन युक्त नमक (Iodized Salt) का उपयोग करें। समुद्री शैवाल (Seaweed) जैसे नोरी, केल्प (लेकिन बहुत अधिक न लें)। सेलेनियम (Selenium): यह T4 को T3 में बदलने में मदद करता है। ब्राजील नट्स (Brazil Nuts) - रोज 2-3 दाने काफी हैं। ट्यूना, सार्डिन, अंडे (खासकर जर्दी), सूरजमुखी के बीज। जिंक (Zinc): थायरॉयड हार्मोन उत्पादन के लिए जरूरी। कद्दू के बीज, चने, दालें, मांस, सीफूड। फाइबर (Fiber): कब्ज से बचने के लिए। ओट्स, जौ, साबुत गेहूं, ब्राउन राइस, फल (सेब, नाशपाती), सब्जियां (पालक, गाजर, ब्रोकली - लेकिन पकाकर)। प्रोटीन (Protein): मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है। दालें, सोया (थोड़ी मात्रा में), अंडे, चिकन, मछली, पनीर, दूध (अगर लैक्टोज इंटॉलरेंस न हो)। एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants): सूजन कम करने के लिए। जामुन (ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी), हरी चाय, हल्दी, अदरक, लहसुन। ❌ क्या न खाएं (Foods to Avoid) - थायरॉयड को नुकसान पहुंचाने वाले: गोइट्रोजेनिक खाद्य पदार्थ (Goitrogenic Foods): ये थायरॉयड हार्मोन के उत्पादन को बाधित कर सकते हैं। लेकिन इन्हें पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, बस पकाकर या भाप में पकाकर खाएं। क्रूसिफेरस सब्जियां: ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी, केल, ब्रसेल्स स्प्राउट्स। (कच्ची न खाएं, पकाकर खाएं) सोया उत्पाद: टोफू, सोया मिल्क, सोया चंक्स। (बहुत अधिक मात्रा में न लें। खासकर अगर आपको आयोडीन की कमी है) बाजरा (Millet): विशेष रूप से अगर आप बड़ी मात्रा में खाते हैं। मूंगफली, पाइन नट्स, स्ट्रॉबेरी, पीच, नाशपाती (थोड़ी मात्रा में ठीक हैं)। प्रोसेस्ड फूड और शुगर: ये सूजन बढ़ाते हैं और मेटाबॉलिज्म को धीमा करते हैं। पैकेज्ड स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, मिठाइयां, रिफाइंड आटा (मैदा) से बचें। कैफीन और अल्कोहल: ये दवा के अवशोषण को बाधित कर सकते हैं। दवा लेने के 1 घंटे बाद तक चाय/कॉफी न पिएं। बहुत अधिक फाइबर: हालांकि फाइबर जरूरी है, लेकिन बहुत ज्यादा फाइबर (जैसे चोकर) थायरॉयड दवा के अवशोषण को कम कर सकता है। दवा और फाइबर युक्त भोजन के बीच कम से कम 2-3 घंटे का अंतर रखें। नमूना डाइट चार्ट (Sample Diet Chart): सुबह (6-7 AM): गुनगुना पानी + नींबू + शहद। (दवा लेने के 30 मिनट बाद) नाश्ता (8-9 AM): ओट्स/दलिया (दूध या पानी में) + मुट्ठी भर कद्दू के बीज या बादाम। या 2 अंडे का भुर्जी + साबुत गेहूं की ब्रेड। मिड-मॉर्निंग (11 AM): 1 सेब या नाशपाती + मुट्ठी भर ब्राजील नट्स (2-3) । दोपहर का खाना (1-2 PM): 2 रोटी (साबुत गेहूं) + दाल + हरी सब्जी (पकी हुई) + सलाद। या ब्राउन राइस + चिकन/मछली करी। शाम (4-5 PM): हर्बल चाय (ग्रीन टी या अदरक वाली चाय) + 1 मुट्ठी भुने चने। रात का खाना (7-8 PM): हल्का भोजन - सूप + सलाद + ग्रिल्ड पनीर/चिकन। या खिचड़ी (दाल-चावल) + दही। सोने से पहले (10 PM): 1 कप गर्म दूध (हल्दी के साथ) - अगर पचता हो। 4. चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management - Medicines & How They Work) हाइपोथायरायडिज्म का इलाज मुख्य रूप से दवाओं से किया जाता है। यह एक आजीवन इलाज हो सकता है, लेकिन सही दवा से आप पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं। मुख्य दवा: लेवोथायरोक्सिन (Levothyroxine) कैसे काम करती है: यह सिंथेटिक T4 हार्मोन है। आपका शरीर इसे प्राकृतिक T4 की तरह ही उपयोग करता है। यह धीरे-धीरे शरीर में T3 में बदल जाता है, जिससे मेटाबॉलिज्म सामान्य हो जाता है। ब्रांड नाम: भारत में आम ब्रांड हैं - थायरोनॉर्म (Thyronorm), एल्ट्रोक्सिन (Eltroxin), लेवोथायरोक्स (Levothyrox)। खुराक (Dosage): डॉक्टर आपके TSH स्तर (ब्लड टेस्ट) के आधार पर खुराक तय करते हैं। शुरुआत में छोटी खुराक (25-50 mcg) दी जाती है, फिर धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है। कभी भी खुद से खुराक न बदलें या बंद न करें। कैसे लें (Crucial Rules): खाली पेट: सुबह उठने के बाद, नाश्ते से कम से कम 30-60 मिनट पहले लें। पानी के साथ: केवल सादा पानी (एक गिलास) के साथ लें। दूध, चाय, कॉफी, जूस या कैल्शियम युक्त पेय के साथ न लें। अन्य दवाओं से दूरी: आयरन, कैल्शियम, एंटासिड, या मल्टीविटामिन लेने से कम से कम 4 घंटे का अंतर रखें। अन्य दवाएं (Rarely Used): लियोथायरोनिन (Liothyronine) - सिंथेटिक T3: कभी-कभी लेवोथायरोक्सिन के साथ दी जाती है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव (जैसे घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना) अधिक हो सकते हैं। प्राकृतिक थायरॉयड (Natural Thyroid - जैसे Armour Thyroid): सूअर या गाय के थायरॉयड से बनाई जाती है। इसमें T3 और T4 दोनों होते हैं, लेकिन खुराक स्थिर नहीं होती, इसलिए आमतौर पर इसकी सिफारिश नहीं की जाती। 5. सिद्ध घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (Proven Home Remedies & Lifestyle Changes) ध्यान रखें: ये उपचार दवा का विकल्प नहीं हैं, बल्कि दवा के साथ सहायक हैं। नियमित व्यायाम (Exercise): रोज 30-45 मिनट की मध्यम गति की एक्सरसाइज (तेज चलना, योग, तैराकी, साइकिलिंग) मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती है और वजन कम करने में मदद करती है। योग में सर्वांगासन (Shoulder Stand) और मत्स्यासन (Fish Pose) थायरॉयड ग्रंथि के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माने जाते हैं। तनाव प्रबंधन (Stress Management): तनाव कोर्टिसोल (Cortisol) बढ़ाता है, जो थायरॉयड हार्मोन को बाधित करता है। ध्यान (Meditation), प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, भ्रामरी), और गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं। पर्याप्त नींद (Sleep): रोज 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। नींद की कमी से हार्मोनल असंतुलन बढ़ता है। गर्म पानी का सेवन: दिन भर में गुनगुना पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और कब्ज से राहत मिलती है। हर्बल उपचार (सावधानी के साथ): अश्वगंधा (Ashwagandha): यह एक एडाप्टोजेन है जो तनाव कम करता है और थायरॉयड फंक्शन को सपोर्ट कर सकता है। लेकिन अगर आपको हाइपरथायरायडिज्म है तो न लें। डॉक्टर से सलाह लें। गुग्गुल (Guggul): यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी थायरॉयड मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद कर सकती है। नारियल तेल (Coconut Oil): इसमें मीडियम-चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCTs) होते हैं जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ा सकते हैं। खाना पकाने में उपयोग करें। त्वचा और बालों की देखभाल: रूखी त्वचा के लिए नारियल तेल या एलोवेरा जेल लगाएं। बालों के लिए आंवला, मेथी, और नारियल तेल का हेयर मास्क उपयोगी है। 6. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रभाव (Impact on Mental Health & Daily Life) हाइपोथायरायडिज्म का असर सिर्फ शरीर पर नहीं, बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी गहरा पड़ता है। डिप्रेशन और चिंता (Depression & Anxiety): थायरॉयड हार्मोन का कम होना सीधे मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे सेरोटोनिन) को प्रभावित करता है। इससे बिना कारण उदासी, निराशा, चिड़चिड़ापन, और चिंता हो सकती है। कई मरीजों को पता ही नहीं चलता कि उनका डिप्रेशन थायरॉयड की वजह से है। ब्रेन फॉग (Brain Fog): ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, याददाश्त कमजोर होना, और निर्णय लेने में धीमापन। यह ऑफिस के काम और पढ़ाई को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। सामाजिक जीवन पर असर: लगातार थकान, वजन बढ़ना, और मूड स्विंग्स के कारण लोग सामाजिक मेलजोल से कतराने लगते हैं। कई बार रिश्तों में तनाव आ जाता है। काम पर प्रभाव: ऊर्जा की कमी और मानसिक धीमेपन के कारण कार्यक्षमता (Productivity) घट जाती है। नौकरी में परेशानी हो सकती है। नींद की समस्या: कुछ मरीजों को अत्यधिक नींद आती है (Hypersomnia), जबकि कुछ को अनिद्रा (Insomnia) होती है। समाधान: सही दवा और डाइट से ये लक्षण काफी हद तक ठीक हो जाते हैं। मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग या थेरेपी लेना भी फायदेमंद हो सकता है। परिवार और दोस्तों को अपनी बीमारी के बारे में बताएं ताकि वे आपको समझ सकें। 7. 10 विस्तृत FAQ (Frequently Asked Questions) 1. क्या हाइपोथायरायडिज्म पूरी तरह ठीक हो सकता है? ज्यादातर मामलों में, खासकर हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस में, यह एक आजीवन स्थिति है। लेकिन सही दवा (लेवोथायरोक्सिन) से आप पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं। कुछ मामलों में (जैसे आयोडीन की कमी या प्रेग्नेंसी के बाद), यह अस्थायी हो सकता है और ठीक हो सकता है। 2. क्या हाइपोथायरायडिज्म वजन बढ़ने का कारण बनता है? हां, यह एक बहुत आम लक्षण है। थायरॉयड हार्मोन की कमी से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे वजन बढ़ता है। दवा लेने के बाद मेटाबॉलिज्म सामान्य हो जाता है, लेकिन वजन कम करने के लिए डाइट और एक्सरसाइज जरूरी है। 3. क्या मैं गर्भवती हो सकती हूं अगर मुझे हाइपोथायरायडिज्म है? हां, बिल्कुल। लेकिन गर्भावस्था से पहले और दौरान थायरॉयड स्तर को सामान्य रखना बहुत जरूरी है। अनियंत्रित हाइपोथायरायडिज्म गर्भपात, प्री-एक्लेम्पसिया, और बच्चे के मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टर आपकी खुराक बढ़ा सकते हैं। 4. क्या मैं शराब या कैफीन ले सकता हूं? सीमित मात्रा में ले सकते हैं, लेकिन दवा लेने के तुरंत बाद न लें। कैफीन और अल्कोहल दवा के अवशोषण को बाधित कर सकते हैं। कम से कम 1 घंटे का अंतर रखें। 5. क्या मुझे आयोडीन युक्त नमक खाना चाहिए? हां, आयोडीन की कमी हाइपोथायरायडिज्म का एक मुख्य कारण है। आयोडीन युक्त नमक का उपयोग करें, लेकिन बहुत अधिक आयोडीन (जैसे सप्लीमेंट) न लें, क्योंकि यह हाशिमोटो को बढ़ा सकता है। 6. क्या हाइपोथायरायडिज्म से बाल झड़ते हैं? हां, यह एक आम लक्षण है। थायरॉयड हार्मोन की कमी से बालों के रोम कमजोर हो जाते हैं। दवा शुरू करने के 3-6 महीने बाद बाल आमतौर पर वापस उगने लगते हैं। 7. क्या मैं व्यायाम कर सकता हूं? हां, व्यायाम बहुत फायदेमंद है। यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है, वजन कम करता है, और मूड को बेहतर करता है। हल्के व्यायाम से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। 8. क्या हाइपोथायरायडिज्म दिल की बीमारी का कारण बन सकता है? अनियंत्रित हाइपोथायरायडिज्म से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और दिल की धड़कन धीमी हो सकती है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन सही इलाज से यह जोखिम कम हो जाता है। 9. क्या मुझे हाइपोथायरायडिज्म के लिए सर्जरी की जरूरत है? आमतौर पर नहीं। सर्जरी केवल तब की जाती है जब थायरॉयड ग्रंथि बहुत बड़ी हो (गोइटर) या कैंसर का संदेह हो। ज्यादातर मामलों में दवा ही काफी है।

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